बिहार चुनाव से पहले सियासी ताना-बाना, ओवैसी ने महागठबंधन से गठजोड़ के दिए संकेत
Asaduddin Owaisi
भारत
चेतना मंच
29 Jun 2025 04:37 PM
Bihar Assembly Elections : बिहार की सियासत में नए समीकरणों के संकेत मिलने लगे हैं। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने रविवार को साफ किया कि उनकी पार्टी का मुख्य उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनावों में NDA को सत्ता में लौटने से रोकना है। इसके लिए उन्होंने महागठबंधन से बातचीत के संकेत भी दिए हैं। ओवैसी ने बताया कि पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने आरजेडी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से संपर्क साधा है। उन्होंने कहा, "हमने महागठबंधन के कुछ नेताओं से बात की है और उन्हें स्पष्ट रूप से बताया है कि हम नहीं चाहते कि भाजपा या एनडीए दोबारा सत्ता में आए। अब यह फैसला विपक्षी दलों के हाथ में है कि वे साथ आना चाहते हैं या नहीं।"
"हम हर सीट पर लड़ने को तैयार हैं"
हालांकि ओवैसी ने यह भी कहा कि अगर विपक्षी गठबंधन ने उनकी पार्टी को साथ नहीं लिया तो AIMIM अकेले सभी सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, "अगर वे साथ नहीं आते तो हम अपने रास्ते पर चलेंगे। सीटों की संख्या का ऐलान समय आने पर किया जाएगा।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि AIMIM सीमांचल के अलावा बिहार के अन्य हिस्सों में भी अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। गौरतलब है कि 2020 के विधानसभा चुनावों में सीमांचल क्षेत्र में AIMIM ने पांच सीटें जीती थीं, लेकिन 2022 में पार्टी को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके चार विधायक आरजेडी में शामिल हो गए।
वोटर लिस्ट जांच पर भी उठाए सवाल
ओवैसी ने हाल ही में बिहार में चल रही वोटर लिस्ट की पुनः जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने भारत के मुख्य चुनाव आयोग को पत्र लिखते हुए आरोप लगाया कि "यह एक कानूनी रूप से संदिग्ध प्रक्रिया है, जिससे गरीब और हाशिए पर खड़े लोगों को वोट देने के अधिकार से वंचित किया जा सकता है।" उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "अब नागरिकों को न सिर्फ अपने जन्म प्रमाण पत्र दिखाने होंगे, बल्कि यह भी साबित करना होगा कि उनके माता-पिता का जन्म कब और कहां हुआ था। जबकि हमारे देश में जन्म पंजीकरण की स्थिति अब भी अधूरी है और सरकारी दस्तावेजों में खामियां आम हैं।" ओवैसी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग इस प्रक्रिया के जरिए "पिछले दरवाजे से एनआरसी लागू कर रहा है," जो गरीबों और कमजोर तबकों के संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।