बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में शुक्रवार को 'भूमिहार' और 'भूमिहार ब्राह्मण' शब्द को लेकर जोरदार राजनीतिक बहस देखने को मिली। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि सरकारी अभिलेखों, जाति प्रमाण पत्रों और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में संबंधित जाति का उल्लेख केवल 'भूमिहार' के रूप में ही किया जाएगा।

Bihar News : बिहार विधानसभा के मानसून सत्र में शुक्रवार को 'भूमिहार' और 'भूमिहार ब्राह्मण' शब्द को लेकर जोरदार राजनीतिक बहस देखने को मिली। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि सरकारी अभिलेखों, जाति प्रमाण पत्रों और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में संबंधित जाति का उल्लेख केवल 'भूमिहार' के रूप में ही किया जाएगा। सरकार के इस रुख के बाद भाजपा के ही दो विधायकों ने सदन में अपनी सरकार को घेर लिया, जिससे कुछ देर तक तीखी नोकझोंक का माहौल बना रहा। Bihar News
दरभंगा के जाले विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पुराने सरकारी अभिलेखों, राजस्व रिकॉर्ड और गजट में कई स्थानों पर 'भूमिहार ब्राह्मण' दर्ज है, जबकि वर्तमान में जारी जाति प्रमाण पत्रों और सरकारी सूची में केवल 'भूमिहार' लिखा जा रहा है। उनका कहना था कि इससे सरकारी दस्तावेजों में असंगति पैदा हो रही है और लोगों को व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जीवेश मिश्रा ने सदन में कहा कि सामाजिक संगठनों ने इस संबंध में सरकार को 1931 की जनगणना रिपोर्ट और राजस्व विभाग के पुराने अभिलेख उपलब्ध कराए हैं, जिनमें संबंधित जाति का उल्लेख 'भूमिहार ब्राह्मण' के रूप में किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग ने 23 जून 2026 को जारी एक पत्र में इस विषय को विचाराधीन बताया था। विधायक ने सरकार से आग्रह किया कि जाति सूची और प्रमाण पत्रों में एकरूपता लाने के लिए जल्द निर्णय लिया जाए। Bihar News
सामान्य प्रशासन विभाग संभाल रहे उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि उच्च जाति आयोग की सिफारिशों के अनुसार सवर्ण वर्ग में ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार और कायस्थ अलग-अलग श्रेणियां हैं। उन्होंने कहा कि आयोग ने 'भूमिहार' का नाम बदलकर 'भूमिहार ब्राह्मण' करने की कोई अनुशंसा नहीं की है। इसलिए सरकारी रिकॉर्ड में केवल 'भूमिहार' ही दर्ज किया जाएगा और इस संबंध में फिलहाल किसी बदलाव का प्रस्ताव नहीं है। सरकार के जवाब से असहमति जताते हुए जीवेश मिश्रा ने कहा कि मंत्री ने उनके मूल प्रश्न का उत्तर नहीं दिया। उन्होंने सदन में पुराने सरकारी दस्तावेज और 1931 की जनगणना का हवाला देते हुए दावा किया कि कई आधिकारिक रिकॉर्ड में 'भूमिहार ब्राह्मण' दर्ज है। विधायक ने यह भी सवाल उठाया कि यदि विभिन्न विभागों के पुराने रिकॉर्ड में यह नाम दर्ज है तो वर्तमान व्यवस्था अलग क्यों है। Bihar News
बहस के दौरान भाजपा विधायक विशाल प्रशांत भी चर्चा में शामिल हो गए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार 'भूमिहार ब्राह्मण' शब्द को स्वीकार नहीं करती, तो भूमिहार समाज को अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा देने पर विचार किया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि समाज का एक बड़ा वर्ग आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। बाद में सोशल मीडिया पर भी उन्होंने सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल औपचारिक जवाब देकर इस विषय को नहीं टाला जा सकता। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की मांग की। बहस के दौरान उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने दोबारा स्पष्ट किया कि सरकारी दस्तावेजों में 'भूमिहार' ही मान्य नाम रहेगा। उन्होंने कहा कि 'भूमिहार ब्राह्मण' जैसे शब्दों के उपयोग से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है, इसलिए आधिकारिक रिकॉर्ड में केवल स्वीकृत जाति नाम का ही इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं, विपक्ष और भाजपा के कुछ विधायकों के विरोध के बीच यह मुद्दा पूरे दिन सदन में चर्चा का केंद्र बना रहा। Bihar News
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