
Bihar caste census data : “जिसकी जितनी संख्या भारी उतनी उसकी हिस्सेदारी” भारत के संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर ने इस नारे की नींव डाली थी। बाद में प्रसिद्ध दलित नेता मान्यवर कांशीराम ने इस नारे को धार दी थी। एक बार फिर से यह नारा पूरे देश में शोर मचाने लगा है। लोग कह रहे हैं कि जिस बिरादरी की जितनी संख्या भारी है, उसे सत्ता, सरकारी नौकरी और अन्य व्यवस्थाओं में उतनी ही हिस्सेदारी दी जाए।
आपको बता दें कि जातीय जनगणना के आंकडे जारी करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बना है। बिहार में जातीय जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद जहां राजनीतिक दलों में हलचल तेज हो गई है, वहीं केंद्र की भाजपा सरकार के मंत्रियों और नेताओं कें माथे पर शिकन की लकीर आ गई है। राजनीति विश्लेषकों की माने तो बिहार के जातीय जनगणना आगामी लोकसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि देश के कुछ राज्यों में जातीय जनगणना कराए जाने की मांग काफी समय से उठती रही है।
बिहार सरकार द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक बिहार की कुल 13 करोड़ की आबादी में पिछड़े वर्ग की संख्या 27.13 फीसदी है। इसी तरह अत्यंत पिछड़े वर्ग की कुल आबादी 36.01 प्रतिशत है। यानी पिछड़ा वर्ग और अन्य पिछड़ा वर्ग की संयुक्त आबादी 63.14 प्रतिशत है। केवल 15.52 प्रतिशत लोग सामान्य वर्ग के हैं। अनुसूचित जाति के लोग 19.65 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति की कुल आबादी 1.68 प्रतिशत है। राज्य में 3.6 फीसदी ब्राह्मण, 3.45 प्रतिशत राजपूत, 2.89 प्रतिशत भूमिहार, 0.60 प्रतिशत कायस्थ, 14.26 प्रतिशत यादव, 2.87 प्रतिशत कुर्मी, 2.81 प्रतिशत तेली, 3.08 प्रतिशत मुसहर, 0.68 प्रतिशत सुनार हैं। बिहार की कुल आबादी में 81.99 प्रतिशत हिंदू हैं। केवल 17.7 प्रतिशत लोग मुसलमान हैं। बाकी ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन तथा अन्य धर्म को मानने वालों की संख्या मात्र 1 प्रतिशत से भी कम है।
आपको बता दें कि 2024 में लोकसभा के चुनाव संपन्न होने हैं। ऐसे में बिहार राज्य के जातीय आंकड़े जारी किए जाने से सबसे बड़ा झटका भाजपा को लग सकता है। क्योंकि पिछले काफी समय से जाति आधारित जनगणना किए जाने की मांग की जा रही है, लेकिन भाजपा केंद्र और राज्य सरकारें जाति आधारित जनगणना कराने को तैयार नहीं है। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि यदि देश में जाति आधारित जनगणना की जाती है तो उसका बड़ा आर्थिक बोझ केंद्र सरकार पर पड़ेगा। जाति आधारित जनगणना कराए जाने के बाद उस जाति के उत्थान और विकास के लिए एक बजट सरकार को तय करना होता है। इसके अलावा जातीय जनगणना का डाटा सामने आने के बाद राजनीतिक रुप से भी असर पड़ता है। फिर जाति आधारित आरक्षण की मांग भी जोर पकड़ सकती है।
आपको बता दें कि मंगलवार को बिहार में जातीय जनगणना का डाटा होने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मंगलवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा फिलहाल हम इस मामले में कुछ नहीं कर सकते हैं। आगामी 6 अक्टूबर को मामले सुनवाई के लिए तारीख निर्धारित की गई है।
बिहार में जातीय जनगणना के आंकड़े जारी किए जाने का बसपा सुप्रीमो मायावती ने स्वागत किया है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि बसपा को खुशी है कि देश की राजनीति उपेक्षित बहुजन समाज के पक्ष में इस कारण नया करवट ले रही है, जिसका नतीजा है कि एससी-एसटी आरक्षण को निष्क्रिय और निष्प्रभावी बनाने और घोर ओबीसी-मण्डल विरोधी जातिवादी एवं साम्प्रदायिक दल भी अपने भविष्य के प्रति चिन्तित नजर आने लगे हैं। वैसे तो यूपी सरकार को अब अपनी नीयत व नीति में जन भावना और जन अपेक्षा के अनुसार सुधार करके जातीय जनगणना/सर्वे तुरंत शुरू करा देना चाहिए, लेकिन इसका सही समाधान तभी होगा जब केन्द्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर जातीय जनगणना कराकर उन्हें उनका वाजिब हक देना सुनिश्चित करेगी।
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा, बिहार जाति आधारित जनगणना प्रकाशित, ये है सामाजिक न्याय का गणतीय आधार। जातिगत जनगणना 85-15 के संघर्ष का नहीं बल्कि सहयोग का नया रास्ता खोलेगी और जो लोग प्रभुत्वकामी नहीं हैं बल्कि सबके हक़ के हिमायती हैं, वो इसका समर्थन भी करते हैं और स्वागत भी। जो सच में अधिकार दिलवाना चाहते हैं वो जातिगत जनगणना करवाते हैं। भाजपा सरकार राजनीति छोड़े और देशव्यापी जातिगत जनगणना करवाए।
अखिलेश यादव ने कहा कि जब लोगों को ये मालूम पड़ता है कि वो गिनती में कितने हैं तब उनके बीच एक आत्मविश्वास भी जाग्रत होता है और सामाजिक नाइंसाफी के खिलाफ एक सामाजिक चेतना भी, जिससे उनकी एकता बढ़ती है और वो एकजुट होकर अपनी तरक्की के रास्ते में आनेवाली बाधाओं को भी दूर करते हैं, नये रास्ते बनाते हैं और सत्ताओं और समाज के परम्परागत ताकतवर लोगों द्वारा किए जा रहे अन्याय का खात्मा भी करते हैं. इससे समाज बराबरी के मार्ग पर चलता है और समेकित रूप से देश का विकास होता है. जातिगत जनगणना देश की तरक्की का रास्ता है। अब ये निश्चित हो गया है कि PDA ही भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेगा। Bihar caste census data