"एकतरफा प्यार अब नहीं चलेगा..." ओवैसी का गठबंधन पर वार, तीसरे मोर्चे की फिर वकालत
Bihar Chunav
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 05:51 PM
Bihar Chunav : जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, राज्य की सियासत में बयानबाजी और समीकरणों का पारा चढ़ता जा रहा है। आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमएआईएम) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर महागठबंधन (इंडिया गठबंधन) पर तीखा हमला करते हुए साफ कर दिया कि उनकी पार्टी इस बार किसी भी "एकतरफा रिश्ते" का हिस्सा नहीं बनेगी।
ओवैसी ने अपने बयान में कहा
"एकतरफा प्यार अब नहीं चलने वाला... हमने पिछली बार भी दिखाया था कि हमारे पास जमीन पर जनाधार है। बिहार की जनता समझ चुकी है कि जो आरोप हम पर लगाए गए, वो राजनीतिक साजिश का हिस्सा थे ताकि दलितों, मुसलमानों और पिछड़े तबकों की आवाज को कुचला जा सके।"
"हम अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे" गठबंधन को खारिज करते हुए दो टूक संदेश
अपने विरोधियों पर निशाना साधते हुए ओवैसी ने स्पष्ट कहा कि एआईएमएआईएम अब किसी के अधीन राजनीति करने को तैयार नहीं है। उन्होंने महागठबंधन की ओर इशारा करते हुए कहा कि, "वे चाहते हैं कि गरीब और मजलूम तबके के लोग उनके गुलाम बने रहें। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। हम अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे। जनता को सच्चाई बताई जाएगी।" गौरतलब है कि पिछली बार एआईएमएआईएम ने सीमांचल क्षेत्र में 5 सीटों पर जीत दर्ज कर राजनीतिक समीकरणों को चौंकाया था।
तीसरे मोर्चे की फिर पैरवी, बीजेपी-इंडिया दोनों पर साधा निशाना
ओवैसी ने भारतीय जनता पार्टी (एनडीए) और इंडिया गठबंधन दोनों को जनता की समस्याओं से दूर बताते हुए तीसरे मोर्चे की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआईएमएआईएम बिहार में एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच की संभावनाओं को तलाश रही है, और उनके प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान इस दिशा में संवाद कर रहे हैं।
वोटिंग लिस्ट विवाद पर केंद्र को घेरा
बिहार के सीमांचल क्षेत्र में मतदाता सूची की समीक्षा और प्रयासों को लेकर ओवैसी ने आशंका जताई। उन्होंने कहा, "गृह मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर राज्य सरकार या अन्य एजेंसियों द्वारा मतदाता सूची में छेड़छाड़ करना संविधान और लोकतंत्र दोनों के लिए खतरा है। यह पीछे के दरवाजे से लागू करने जैसा प्रयास है।" विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी का यह तेवर आने वाले चुनावों में न सिर्फ सीमांचल, बल्कि अन्य मुस्लिम बहुल इलाकों में भी नए ध्रुवीकरण की संभावना को जन्म दे सकता है। उनके तीसरे मोर्चे की पहल से उन दलों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं जो अब तक अकटकट को हाशिए की पार्टी मानते थे।