बिहार में फिर फिसली कांग्रेस! क्या डुबोएगी महागठबंधन की नैया?
भारत
चेतना मंच
01 Oct 2025 01:18 PM
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले आए JVC ओपिनियन पोल ने एक बार फिर महागठबंधन के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। सर्वे में यह साफ संकेत मिला है कि कांग्रेस का कमजोर प्रदर्शन इस बार भी राजद के लिए गले की फांस बन सकता है। तमाम कोशिशों और आक्रामक प्रचार के बावजूद राहुल गांधी की रणनीति मतदाताओं को नहीं भा सकी और कांग्रेस की सियासी जमीन लगातार खिसकती दिख रही है। Bihar Election 2025
राहुल गांधी की रणनीति फेल?
राहुल गांधी ने इस बार ‘वोट चोरी’ और SIR जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की भरपूर कोशिश की। 16 अगस्त से 3 सितंबर तक बिहार दौरे में तेजस्वी यादव के साथ मिलकर उन्होंने कई तीखे हमले किए लेकिन JVC सर्वे के अनुसार, 52% मतदाताओं ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। इसका मतलब साफ है कि राहुल गांधी का आक्रामक रवैया लोगों को प्रभावित नहीं कर पाया। ऐसे में राजद की उम्मीदें कमजोर कांग्रेस के भरोसे कितनी टिक पाएंगी यह बड़ा सवाल बन गया है।
कांग्रेस को तगड़ा झटका
सर्वे में सीटों का जो गणित सामने आया है, वह कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है। राजद को 57-71 सीटें मिलने की संभावना है। कांग्रेस सिर्फ 11-14 सीटों पर सिमट सकती है। महागठबंधन की कुल सीटें 81-103 के बीच रहने की संभावना है। इसके मुकाबले एनडीए गठबंधन मजबूत स्थिति में है भाजपा को 66-77 सीटें, जदयू को 52-58 सीटें कुल मिलाकर NDA को 131-150 सीटों का अनुमान है। यह साफ दर्शाता है कि कांग्रेस की कमजोरी महागठबंधन को निर्णायक बढ़त से दूर कर रही है।
मुख्यमंत्री की रेस में कौन आगे?
मुख्यमंत्री पद को लेकर जनता की राय भी तेजस्वी यादव के लिए चिंता की बात है। नीतीश कुमार को 27% लोगों ने पहली पसंद बताया। तेजस्वी यादव 25% के साथ दूसरे नंबर पर हैं। प्रशांत किशोर को भी 15% लोगों का समर्थन मिला है जो उन्हें ‘X-फैक्टर’ बना सकता है। इसके अलावा चिराग पासवान (11%) और सम्राट चौधरी (8%) जैसे नाम भी इस दौड़ में मौजूद हैं। नीतीश कुमार की लोकप्रियता और सीट अनुमान दोनों ही संकेत देते हैं कि वह अब भी बिहार की सियासत में मजबूती से टिके हुए हैं।
जन सुराज पार्टी की दस्तक
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को इस चुनाव में 10-11% वोट शेयर और 4-6 सीटें मिल सकती हैं। यह प्रदर्शन अगर हुआ तो यह न केवल महागठबंधन बल्कि एनडीए की रणनीतियों को भी प्रभावित कर सकता है। उनका वोट शेयर कई सीटों पर खेल बिगाड़ सकता है।
JVC का ताजा सर्वे यह स्पष्ट कर रहा है कि बिहार चुनाव में कांग्रेस एक बार फिर महागठबंधन की सबसे कमजोर कड़ी बन सकती है। अगर रणनीति में बदलाव नहीं किया गया तो तेजस्वी यादव के मुख्यमंत्री बनने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा कांग्रेस की गिरती साख ही साबित हो सकता है। बिहार की जमीनी राजनीति में अब यह तय करना बाकी है कि क्या तेजस्वी कांग्रेस के साथ पुराने फॉर्मूले पर आगे बढ़ेंगे या कोई नया समीकरण गढ़ेंगे। Bihar Election 2025