
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की घोषणा हो चुकी है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की घोषणा होते ही बिहार NDA में सीट बंटवारे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कल पटना में एनडीए के सभी घटक दलों की एक अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें बीजेपी, जेडीयू, एलजेपी-आर, हम (HAM) और आरएलएम (RLM) के शीर्ष नेता शामिल होंगे। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी खुद मौजूद रहेंगे। Bihar Election
केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान आज दिल्ली से पटना पहुंच रहे हैं, जहां वे अपने पैतृक गांव खगड़िया के शहरबन्नी में पिता रामविलास पासवान की पुण्यतिथि कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। लेकिन इस दौरे की राजनीतिक अहमियत कहीं ज़्यादा है — क्योंकि सीट बंटवारे को लेकर दिल्ली में हुई उनकी हालिया बैठक से कई संकेत निकले हैं।
सूत्रों के अनुसार बीजेपी और जेडीयू ने इस बार बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने का फॉर्मूला लगभग तय कर लिया है। दोनों दल 102-102 सीटों पर मैदान में उतर सकते हैं, जबकि एक सीट पर लचीलापन रखा गया है। राज्य की कुल 243 विधानसभा सीटों में से बची हुई 38 सीटें छोटे घटक दलों — एलजेपी-आर (चिराग पासवान), हम (जीतन राम मांझी) और आरएलएम (उपेंद्र कुशवाहा) — के बीच बांटी जाएंगी।
अब तक की जानकारी के मुताबिक—
एलजेपी-आर (चिराग पासवान) को 25 सीटों का ऑफर दिया गया है।
हम (जीतन राम मांझी) को 7 सीटें मिलने की संभावना है।
आरएलएम (उपेंद्र कुशवाहा) को 6 सीटें दी जा सकती हैं।
हालांकि, चिराग पासवान कुछ खास सीटों को लेकर अड़े हुए हैं। वे चाहते हैं कि पार्टी को उन क्षेत्रों से टिकट मिले, जहां उनकी पकड़ मज़बूत है और उनके उम्मीदवारों की जीत की संभावना ज़्यादा है। बीजेपी और जेडीयू फिलहाल इस मांग पर सहमत नहीं दिख रहे हैं। अगर चिराग को मनाने के लिए उनकी सीटें बढ़ाई जाती हैं, तो इसका सीधा असर मांझी और कुशवाहा की सीटों पर पड़ सकता है। यानि चिराग की नाराज़गी दूर करने की कीमत एनडीए को दलित और ओबीसी वोट बैंक के दो नेताओं से उठानी पड़ सकती है।
सूत्रों का दावा है कि अगर छोटे दलों की सीटों में कटौती करनी पड़ी, तो उन्हें राज्यसभा या विधान परिषद की सीट देकर संतुष्ट करने की कोशिश की जाएगी। बीजेपी की रणनीति साफ है — बिखराव से बचना और एनडीए गठबंधन को एकजुट दिखाना।
इससे पहले मंगलवार को दिल्ली में बीजेपी के बिहार प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान और संगठन महामंत्री विनोद तावड़े ने चिराग पासवान से मुलाकात की। हालांकि दोनों के बीच हुई इस बैठक में सीटों पर सहमति बनती नहीं दिखी। अब सारी निगाहें पटना बैठक पर टिकी हैं। अगर आज के भीतर सहमति नहीं बनती, तो एनडीए की सीट शेयरिंग पर बातचीत कुछ और दिनों के लिए टल सकती है — जबकि बिहार में चुनावी तारीखों की घोषणा के बाद हर दल चाहता है कि जल्द से जल्द उम्मीदवारों की सूची तय की जाए ताकि मैदान में प्रचार रणनीति शुरू हो सके। Bihar Election