
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के प्रचार अभियान ने अब पूरी गति पकड़ ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पटना पहुंच चुके हैं और आने वाले 10-15 दिनों में वे राज्य के विभिन्न हिस्सों में दर्जनों रैलियों और रोड शो के जरिए सीधे जनता से संवाद करेंगे। 24 अक्टूबर को समस्तीपुर में पहली रैली के बाद बेगूसराय में दूसरी सभा का आयोजन राजनीतिक विश्लेषकों के लिए खासा चर्चा का विषय बन गया है। प्रधानमंत्री ने अपनी चुनावी मुहिम की शुरुआत जननायक कर्पूरी ठाकुर की जन्मभूमि समस्तीपुर से की। PM Modi In Bihar Election
लेकिन सवाल यह है कि महज 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बेगूसराय में दूसरी रैली का चुनाव क्यों किया गया? राजनीतिक जानकार इसे छठ पर्व से पहले एक महत्वपूर्ण संकेत मान रहे हैं। इस चुनावी रणनीति को देश की मशहूर लोकगायिका और ‘छठ गीतों की रानी’ शारदा सिन्हा के ससुराल से भी जोड़कर देखा जा रहा है। पीएम मोदी ने शारदा सिन्हा के निधन के समय अपनी संवेदनाएँ व्यक्त की थीं, और इस बार उनकी उपस्थिति राजनीतिक और सांस्कृतिक संदेश दोनों देने वाली मानी जा रही है।
बेगूसराय को बिहार में ‘भूमिहारों की राजधानी’ कहा जाता है और यह समुदाय एनडीए, खासकर भाजपा का मजबूत कोर वोट बैंक माना जाता है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भी इसी लोकसभा क्षेत्र से हैं और भाजपा में हिंदुत्व के प्रमुख प्रतिनिधि माने जाते हैं। इस बार विपक्ष ने भूमिहार नेताओं को टिकट देकर भाजपा के मजबूत वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है। ऐसे में पीएम मोदी की बेगूसराय में उपस्थिति न केवल राजनीतिक संदेश देती है, बल्कि एनडीए की रणनीतिक बढ़त को भी मजबूत करती है।
समस्तीपुर और बेगूसराय रैलियों के माध्यम से प्रधानमंत्री लगभग 25-30 विधानसभा सीटों पर अपना प्रभाव जमाने की योजना पर हैं। समस्तीपुर की रैली ईबीसी यानी अति पिछड़ा वर्ग को लुभाने की रणनीति का हिस्सा है, जबकि बेगूसराय में बरौनी रिफाइनरी, गंगा नदी पर पुल और अन्य विकास परियोजनाओं का ज़िक्र कर युवा वर्ग को रोजगार और विकास का संदेश दिया जाएगा। यह रणनीति दर्शाती है कि पीएम मोदी केवल जातिगत गणित पर ही नहीं, बल्कि विकास और रोजगार के मुद्दे पर भी चुनावी माहौल बनाने में जुटे हैं।
बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र में कुल सात विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें से बीजेपी का दबदबा कायम है। बावजूद इसके, यह क्षेत्र आरजेडी के यादव-मुस्लिम गठजोड़ और सीपीआई के पिछड़े वर्ग के लिए रणनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में छठ पर्व से ठीक पहले पीएम मोदी की रैली न केवल राजनीतिक उत्साह को बढ़ाएगी, बल्कि पूरे क्षेत्र का चुनावी परिदृश्य भी गरमा देगी। एनडीए की योजना स्पष्ट है बेगूसराय और उसके आसपास की हर विधानसभा सीट पर अपनी पकड़ मज़बूत करना और विरोधी गठबंधन की संभावनाओं को सीमित करना। इस रैली से क्षेत्रीय मतदाताओं के बीच चुनावी संदेश प्रभावशाली ढंग से पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। PM Modi In Bihar Election