बिहार में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत डोमिसाइल आधारित आरक्षण लागू, युवाओं के लिए आयोग बना
Bihar Election :
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 01:26 PM
Bihar Election : आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की आधी आबादी को साधने के लिए एक अहम फैसला लिया है। बिहार कैबिनेट की हालिया बैठक में तय किया गया कि अब राज्य की महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण केवल तभी मिलेगा जब वे बिहार की मूल निवासी हों। यानी अब यह आरक्षण केवल डोमिसाइल धारक महिला अभ्यर्थियों के लिए सुरक्षित रहेगा। इस नीति परिवर्तन को न केवल महिलाओं के हित में एक ठोस कदम माना जा रहा है, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से यह नीतीश कुमार का इलेक्शन मास्टरस्ट्रोक भी बताया जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब राज्य में सियासी समीकरण लगातार बदल रहे हैं।
महिला सशक्तीकरण की राह पर नीतीश मॉडल
नीतीश कुमार की सियासत में महिला सशक्तीकरण हमेशा एक केंद्रीय बिंदु रहा है। वर्ष 2005 में सत्ता में आने के बाद से ही उन्होंने पंचायतों में महिलाओं को 50% आरक्षण, सरकारी सेवाओं में हिस्सेदारी और कन्या उत्थान जैसी योजनाओं को प्राथमिकता दी। इसका असर यह हुआ कि आज बिहार के कई गांवों-कस्बों में महिलाएं मुखिया, शिक्षक और पुलिसकर्मी के रूप में सक्रिय भूमिका में दिखती हैं। नीतीश कुमार का मानना है कि अगर महिलाएं शिक्षित और आत्मनिर्भर होंगी तो परिवार, समाज और राज्य मजबूत होगा। डोमिसाइल आधारित आरक्षण इसी दिशा में उठाया गया एक और निर्णायक कदम है।
युवाओं को साधने की रणनीति : 'युवा आयोग' का गठन
महिलाओं के साथ-साथ बिहार सरकार ने युवाओं के लिए भी बड़ा ऐलान किया है। राज्य में 'बिहार राज्य युवा आयोग' के गठन को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। यह आयोग सुनिश्चित करेगा कि निजी क्षेत्र की नौकरियों में बिहार के स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिले। यह कदम युवाओं में बढ़ते नौकरी असंतोष को शांत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
दिव्यांग अभ्यर्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रोत्साहन
कैबिनेट बैठक में दिव्यांगजनों के लिए भी विशेष प्रावधान किया गया है। अब यदि कोई दिव्यांग उम्मीदवार बीपीएससी या यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा पास करता है, तो राज्य सरकार उसे मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की तैयारी के लिए आर्थिक सहायता देगी। बीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा पास करने पर 50,000 और यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा पास करने पर 1,00,000 रुपये मिलेंगे। यह पहल सामाजिक न्याय की दिशा में एक ठोस हस्तक्षेप मानी जा रही है।
राजनीतिक संदेश स्पष्ट है
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन फैसलों के जरिए नीतीश सरकार राज्य की दो अहम जनसंख्यात्मक वर्गों महिलाओं और युवाओं को संदेश देना चाहती है कि वह उनके भविष्य को लेकर गंभीर और प्रतिबद्ध है। हालांकि विपक्ष इस निर्णय को चुनाव से पहले की 'राजनीतिक नौटंकी' करार दे रहा है, लेकिन जमीन पर इसके सामाजिक प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बिहार में चुनावी बिसात बिछ चुकी है और नीतीश कुमार ने अपना पहला बड़ा मोहरा चल दिया है। अब देखना यह होगा कि इसका असर मतपेटियों तक कितना पहुंचता है, और विपक्ष इसका जवाब किस रणनीति से देता है। Bihar Election