
बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही राजनीतिक गलियारों में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान तेज हो गई है। एनडीए और महागठबंधन दोनों ही अपनी-अपनी गठबंधन रणनीतियों में उलझे हैं, जबकि चिराग पासवान, जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा और मुकेश सहनी जैसी प्रमुख राजनीतिक हस्तियाँ अपनी पार्टियों के लिए ज्यादा से ज्यादा सीटें पाने की जुगत में हैं। 6 और 11 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव और 14 नवंबर को होने वाली मतगणना से पहले यह लड़ाई गठबंधन की ताकत और जातीय समीकरणों पर भी सवाल खड़ा कर रही है। हर दल अपने क्षेत्रीय और जातिगत आधार को बनाए रखने के लिए किसी भी तरह की छूट देने को तैयार नहीं है, जिससे सीटों का बंटवारा इस बार और भी पेचीदा और राजनीतिक दृष्टि से रोमांचक बन गया है। Bihar Elections 2025
भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जदयू, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), जीतन राम मांझी की हम(एस) और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं। दूसरी ओर, महागठबंधन में वीआईपी के प्रमुख मुकेश सहनी इस बार उपमुख्यमंत्री पद की दावेदारी लिए हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार की सियासत में जातीय समीकरण और गठबंधन की मजबूरी हर दल के लिए निर्णायक हैं। कोई भी गठबंधन अपने दलित और अन्य पिछड़े वर्गों में मजबूत पकड़ वाले घटक को नजरअंदाज नहीं करना चाहता। यही वजह है कि सीट बंटवारे की चर्चा इस बार सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि सत्ता की गणित और जातिगत रणनीति का खेल बन गई है। Bihar Elections 2025
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) जल्द ही सीट बंटवारे के फॉर्मूले का ऐलान करने की योजना में है, लेकिन उसके पहले गठबंधन के भीतर खींचतान कम नहीं हुई है। इस बीच, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने शनिवार को अहम बैठक बुलाई, जिसमें सीट बंटवारे और उम्मीदवारों की फाइनल सूची पर चर्चा की जाएगी। लोजपा (RV) ने कुल 30 विधानसभा सीटों की मांग की थी, जबकि भाजपा 22 से ज्यादा देने के लिए तैयार नहीं थी। सूत्रों का कहना है कि बातचीत के बाद चिराग की पार्टी को करीब 25-26 सीटें मिलने की संभावना है। हालांकि शुरुआत में चिराग ने 45 सीटों की दावेदारी की थी, जिससे गठबंधन के भीतर तनाव और सियासी जटिलताएं बढ़ गई थीं।
NDA के घटक दलों में हम(एस) भी सीट बंटवारे को लेकर सशक्त दावेदारी कर रही है। पार्टी के संस्थापक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने साफ किया है कि उनका मुख्य उद्देश्य 2015 में स्थापित हम(एस) को राजनीतिक मान्यता दिलाना है। इसके लिए कम से कम आठ सीटें जीतना जरूरी है। इस बार भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि वे हम(एस) को 10 से अधिक सीटें नहीं देंगी, जिससे गठबंधन के भीतर मांझी की रणनीति और तेवर चर्चा का केंद्र बन गए हैं।
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने शनिवार को स्पष्ट किया कि बिहार में एनडीए घटक दलों के बीच सीट बंटवारे की बातचीत अभी पूरी तरह से अंतिम रूप नहीं ले पाई है। हालांकि उनकी मांगों में थोड़ी नरमी आई है, लेकिन कुशवाहा सात सीटों की अपनी अड़ियल दावेदारी पर कायम हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि उनकी यह स्थिति गठबंधन के भीतर सियासी संतुलन और सीटों की रणनीति पर अहम असर डाल सकती है। Bihar Elections 2025
महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान चरम पर है। राजद के तेजस्वी यादव और वीआईपी के प्रमुख मुकेश सहनी के बीच देर रात हुई बैठक भी निष्फल रही, क्योंकि सहनी कथित तौर पर 20 सीटों से कम पर सहमत नहीं हैं, जबकि राजद, कांग्रेस और वामपंथी दल केवल 12-15 सीटें देने को तैयार हैं। याद रहे, पिछले चुनाव में भी सहनी असंतुष्ट होकर महागठबंधन छोड़ चुके हैं और एनडीए में शामिल हो गए थे। इस बार भी उनकी मांग ने महागठबंधन की रणनीति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। कांग्रेस ने राजद से सीट बंटवारे को जल्द फाइनल करने का दबाव बनाया है और चेतावनी दी है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो वह 13 अक्टूबर से अपने उम्मीदवारों की घोषणा शुरू कर देगी। इस बार बिहार की सियासत में सीटों की यह जंग पहले से कहीं अधिक तेज और निर्णायक नजर आ रही है। Bihar Elections 2025