
बिहार की सियासत अब अपने चरम पर है। मैदान में एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जोड़ी एनडीए के रथ को रफ्तार दे रही है, तो दूसरी ओर महागठबंधन की पतवार थामे तेजस्वी यादव पूरे जोश में हैं। इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी एक बार फिर बिहार की जंग में उतर चुके हैं। अब सवाल यही है क्या राहुल गांधी इस बार तेजस्वी के ‘रणकृष्ण’ बनकर चुनावी समीकरण पलट पाएंगे, या फिर एनडीए की रणनीति महागठबंधन के सपनों पर भारी पड़ेगी? Bihar Elections 2025
लगभग एक महीने की राजनीतिक दूरी के बाद राहुल गांधी एक बार फिर बिहार के रण में उतरने को तैयार हैं। बुधवार से वे मुजफ्फरपुर में महागठबंधन के चुनावी अभियान का बिगुल फूंकेंगे, जहां मंच पर उनके साथ तेजस्वी यादव भी मौजूद रहेंगे। 24 सितंबर को पटना में हुई कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक के बाद राहुल ने राज्य की राजनीति से थोड़ी दूरी बना ली थी, लेकिन अब चुनावी माहौल गरमाने के साथ ही उनकी एंट्री फिर से जोश भरने वाली मानी जा रही है। कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि राहुल की वापसी से महागठबंधन के प्रचार में नई जान फूंकी जाएगी और एनडीए के खिलाफ एक बार फिर माहौल बनाने की कोशिश तेज होगी। Bihar Elections 2025
राहुल गांधी की चुनावी वापसी का आगाज मुजफ्फरपुर के सकरा से होगा, जहां वे कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद उनका काफिला दरभंगा पहुंचेगा, जहां वे तेजस्वी यादव के साथ साझा मंच पर आरजेडी उम्मीदवार के लिए माहौल बनाएंगे। यह सिर्फ राहुल का नहीं, बल्कि कांग्रेस का पूरा ‘कमांड शो’ होगा क्योंकि अगले दस दिनों में मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता बिहार के अलग-अलग इलाकों में ताबड़तोड़ रैलियों की बौछार करने वाले हैं। राहुल - प्रियंका की यह ‘डबल इंजन’ जोड़ी अब महागठबंधन को नई रफ्तार देने की कोशिश में है, लेकिन सवाल वही रहेगा—क्या यह जोड़ी एनडीए के सियासी एक्सप्रेस को पछाड़ पाएगी?
राहुल गांधी की गैरमौजूदगी ने बीते एक महीने में महागठबंधन के तेवर ठंडे कर दिए थे। ‘वोटर अधिकार यात्रा’ से जिस जोश और जनसमर्थन की लहर उठी थी, वह धीरे-धीरे फीकी पड़ने लगी। इस बीच तेजस्वी यादव अकेले मोर्चा संभालते रहे जबकि लालू प्रसाद यादव बीमारी के चलते सक्रिय राजनीति से दूर हैं और तेज प्रताप यादव अपनी ही राह पर निकल चुके हैं। कांग्रेस, वीआईपी और वामदलों के बीच तालमेल की कमी ने भी गठबंधन की गति पर ब्रेक लगाने का काम किया। अब राहुल की वापसी से उम्मीदें फिर जागी हैं कि महागठबंधन की बिखरी रणनीति को एक दिशा और ताकत मिल सकेगी।
एनडीए के पास इस बार भी चेहरों की लंबी फेहरिस्त है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की करिश्माई मौजूदगी, अमित शाह की सटीक रणनीति, नीतीश कुमार का अनुभव और चिराग पासवान का युवा उत्साह। ऐसे में तेजस्वी यादव अब तक अकेले इस सियासी जंग को लड़ा रहे थे। लेकिन राहुल गांधी की वापसी ने महागठबंधन खेमे में नई जान फूंक दी है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि उनकी मौजूदगी से चुनावी हवा करवट लेगी और तेजस्वी को आखिरकार वह ‘सारथी’ मिल जाएगा जो महागठबंधन की नैया को मंजिल तक पहुंचा सके।
राहुल और प्रियंका गांधी इस बार बिहार चुनाव में फुल फॉर्म में दिखने वाले हैं। दोनों नेताओं की करीब 20 जनसभाओं का खाका तैयार हो चुका है, और कांग्रेस के प्रचार अभियानों में इनकी मांग सबसे ज्यादा है। पार्टी ने रणनीति बनाई है कि अगले कुछ दिनों तक बिहार में हर दिन या तो राहुल या प्रियंका मैदान में रहेंगे, ताकि जनता के बीच कांग्रेस और महागठबंधन की मौजूदगी लगातार महसूस हो। कांग्रेस को भरोसा है कि भाई-बहन की यह जोड़ी सिर्फ भीड़ नहीं, बल्कि माहौल भी बनाएगी और यही लय एनडीए की चुनौती को कमजोर कर सकती है।
बीते कुछ हफ्तों से सीट बंटवारे और प्रचार रणनीति को लेकर महागठबंधन के भीतर उठी दरारें अब धीरे-धीरे भरने की कोशिश में हैं। कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि मतभेदों की गूंज जनता तक न पहुंचे और गठबंधन की तस्वीर एकजुट दिखे। इसी कवायद के तहत राहुल गांधी की मैदान में वापसी को ‘मास्टर स्ट्रोक’ माना जा रहा है ताकि संदेश साफ जाए कि महागठबंधन अब पूरी ताकत और तालमेल के साथ एनडीए को चुनौती देने के लिए तैयार है। Bihar Elections 2025
महागठबंधन का घोषणा पत्र जारी हो चुका है और तेजस्वी यादव को औपचारिक तौर पर सीएम उम्मीदवार के रूप में पेश किया जा चुका है। अब बारी है राहुल गांधी की, जिनकी भूमिका पहले से कहीं ज़्यादा अहम मानी जा रही है। वे तेजस्वी के साथ कदम से कदम मिलाकर मैदान में उतरने जा रहे हैं। बिहार की सियासी जमीन पर इस वक्त तेजस्वी की छवि सबसे प्रमुख चेहरा बन चुकी है, और कांग्रेस की सक्रियता उसी छवि को और धार देने की कवायद मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यही देखना दिलचस्प होगा कि राहुल गांधी महज़ ‘सहयोगी’ बनकर रह जाते हैं या फिर सच में वह ‘सारथी’ साबित होते हैं, जो तेजस्वी के रथ को सत्ता के द्वार तक पहुंचाएगा। Bihar Elections 2025