बिहार के कथित फर्जी आईएएस मनीष गुप्ता की पूरी कहानी जानिए। 10वीं में जिला टॉपर से फर्जी अफसर बनने तक का सफर, आलीशान घर, महंगी गाड़ियां और पुलिस की छापेमारी में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे।

बिहार में एक ऐसे कथित फर्जी आईएएस अफसर का मामला सामने आया है, जिसने अपनी पहचान और रुतबे का ऐसा जाल बुना कि आसपास के लोगों से लेकर पुलिस तक कुछ समय के लिए असमंजस में पड़ गई। मनीष गुप्ता नाम के इस शख्स पर आरोप है कि वह खुद को वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बताकर लोगों पर रौब जमाता था। इतना ही नहीं, वह खुद को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की टीम का हिस्सा और अंडरकवर एजेंट तक बताता था। वह यह दावा भी करता था कि उसकी सीधी बातचीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अजीत डोभाल से होती है।
मनीष गुप्ता की कहानी इसलिए भी हैरान करने वाली है क्योंकि उसकी शुरुआती पढ़ाई और शैक्षणिक पृष्ठभूमि अच्छी बताई जाती है। रिपोर्टों के मुताबिक, उसने 1991 में मैट्रिक की परीक्षा में अपने जिले में टॉप किया था। इसके बाद 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह आईएएस की तैयारी करने के लिए दिल्ली चला गया था। लेकिन आगे चलकर उसने जिस तरह खुद को आईएएस अधिकारी के तौर पर पेश किया, उसने पूरे मामले को बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला बना दिया।
मनीष कुमार गुप्ता खगड़िया जिले का रहने वाला बताया जाता है। उसका जन्म 1975 में हुआ था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उसके पिता परमेश्वर प्रसाद गुप्ता खगड़िया के केडीएस कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर थे। परिवार को पढ़ा-लिखा और प्रतिष्ठित बताया जाता है।
मनीष की शुरुआती पढ़ाई जमालपुर गोगरी इलाके के एक सरकारी स्कूल में हुई। साल 1991 में उसने मैट्रिक की परीक्षा में जिले में टॉप किया था। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह आईएएस बनने की तैयारी के लिए दिल्ली में रहने वाले अपने बड़े भाई के पास चला गया था।
यहीं से उसके जीवन का एक अलग दौर शुरू हुआ। आगे चलकर उसने खुद को आईएएस अधिकारी के तौर पर पेश करना शुरू किया और इसी पहचान के सहारे उसने लोगों के बीच अपना प्रभाव बनाया।
खुद को अजीत डोभाल का अंडरकवर एजेंट बताता था
मनीष गुप्ता के बारे में सबसे चौंकाने वाला दावा यही है कि वह खुद को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की टीम का हिस्सा बताता था। वह लोगों के सामने यह दावा करता था कि वह अंडरकवर एजेंट के तौर पर काम करता है और उसकी सीधी बातचीत देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अजीत डोभाल से होती है।
जब पुलिस उसके घर पहुंची तो उसने पुलिसकर्मियों के सामने भी खुद को वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बताया। उसने कहा कि वह अजीत डोभाल की टीम में काम करता है। उसके आत्मविश्वास और बात करने के तरीके से पुलिसकर्मी भी कुछ समय के लिए असमंजस में पड़ गए।
हालांकि, जांच के दौरान उसके दावों की सच्चाई सामने आने लगी। उसने पुलिस को अपने मोबाइल फोन पर एक आईडी कार्ड भी दिखाया था। अधिकारियों ने जब उस आईडी कार्ड की जांच की तो वह फर्जी निकला।
खगड़िया पुलिस को सूचना मिली थी कि जमालपुर में रहने वाला मनीष गुप्ता अपनी गाड़ियों पर सरकारी नंबर प्लेट लगाकर खुद को आईएएस अधिकारी बताता है। इसी सूचना के आधार पर पुलिस ने 8 अगस्त की रात उसके घर पर छापेमारी की।
पुलिस जब उसके घर पहुंची तो बाहर दो गाड़ियां खड़ी थीं। दोनों गाड़ियों पर सरकारी नंबर प्लेट लगी हुई थी। इसी दौरान घर के बाहर एक व्यक्ति हाफ पैंट और टीशर्ट में टहलता मिला। पुलिस ने जब उसकी पहचान पूछी तो उसने अपना नाम मनीष गुप्ता बताया और खुद को वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बताया।
उसने पुलिसकर्मियों से यह भी सवाल किया कि वे उसके घर आने की हिम्मत कैसे कर सकते हैं। छापेमारी के दौरान वह लगातार पुलिस अधिकारियों से बहस करता रहा और अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने की धमकी देता रहा। वह पुलिसकर्मियों को निलंबित कराने की बात भी कहता था।
मनीष गुप्ता की संपत्ति और रहन-सहन ने भी इस पूरे मामले को चर्चा में ला दिया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उसने करीब 7000 वर्गफुट जमीन पर एक बेहद आलीशान मकान बनवाया था। उसके घर को मुकेश अंबानी के एंटीलिया जैसा बताया गया है।
इस मकान का नाम परमेश्वरी भवन बताया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, घर में स्विमिंग पूल और थिएटर जैसी सुविधाएं मौजूद थीं। घर की अंदरूनी सजावट में महंगे इटालियन टाइल्स का इस्तेमाल किया गया था।
घर की सुरक्षा के लिए परिसर में 25 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। घर की बनावट भी ऐसी बताई गई है, जहां से आसपास की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, मनीष गुप्ता जब गाजियाबाद से यहां आया था, तब से वह अपने घर में लगातार मरम्मत और निर्माण से जुड़े काम करवाता रहता था। उसका आलीशान घर आसपास के लोगों के बीच भी चर्चा का विषय था।
मनीष गुप्ता के पड़ोसियों के लिए भी उसके फर्जी आईएएस होने की बात किसी बड़े झटके से कम नहीं थी। पड़ोसी उसे महंगी गाड़ियों और आलीशान घर की वजह से बड़ा अधिकारी मानते थे।
बताया गया कि उसके पास टेस्ला की कार थी, जिसे लेकर भी आसपास के लोगों को लगता था कि वह कोई बड़ा अधिकारी या बेहद प्रभावशाली व्यक्ति है। हालांकि, पड़ोसियों ने यह भी बताया कि उन्होंने कभी अखबारों में उसके आईएएस बनने की खबर नहीं पढ़ी थी।
मनीष के एक दोस्त के मुताबिक, एक विवाद के दौरान उसने जमालपुर कचहरी स्थित मिडिल स्कूल के एक शिक्षक को दूर से अपना आईडी कार्ड दिखाया था। उस दौरान उसने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए शिक्षक को धमकी भी दी थी।
8 अगस्त को हुई पुलिस की छापेमारी के दौरान मनीष गुप्ता के घर से कई ऐसी चीजें मिलीं, जिनसे उसकी आलीशान जीवनशैली का अंदाजा लगाया जा सकता है। पुलिस को 20 क्रेडिट कार्ड और आठ बैंक खातों से जुड़ी जानकारी मिलने की बात सामने आई है।
इसके अलावा उसके पास से पांच आईफोन और एक आईपैड भी बरामद किए गए। उसके घर में एक बड़ा बार भी बनाया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक, वहां जापान और फ्रांस समेत दुनिया के 22 देशों की 33 प्रीमियम शराब की बोतलें मिलीं।
इन बरामद चीजों और उसके आलीशान रहन-सहन ने इस मामले को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। हालांकि, उसकी कथित संपत्ति और कमाई से जुड़े सभी दावों की वास्तविकता जांच का विषय है।
मनीष गुप्ता के परिवार के बारे में भी मीडिया रिपोर्टों में कई जानकारियां सामने आई हैं। उसके पिता परमेश्वर प्रसाद गुप्ता गोगरी जमालपुर स्थित केडीएस कॉलेज में प्रोफेसर थे। परिवार का यहां पुश्तैनी घर भी बताया जाता है।
उसके बड़े भाई संजय कुमार गुप्ता दिल्ली में प्रोफेसर बताए जाते हैं, जबकि एक अन्य भाई डंपी कुमार कनाडा में रहते हैं। परिवार के दूसरे सदस्य भी अलग-अलग शहरों में निजी कंपनियों में काम करते बताए जाते हैं।
मनीष गुप्ता का मामला इस वजह से कई सवाल खड़े करता है कि आखिर वह लंबे समय तक खुद को एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के तौर पर कैसे पेश करता रहा। उसके पास सरकारी नंबर प्लेट वाली गाड़ियां थीं, वह आईएएस अधिकारी होने का दावा करता था और लोगों के सामने बड़े अधिकारियों से अपने संपर्क की बात करता था।
उसके आत्मविश्वास और रहन-सहन ने भी उसकी बनाई हुई पहचान को मजबूत किया। आलीशान घर, महंगी गाड़ियां, महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान और सुरक्षा के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरों ने आसपास के लोगों के मन में उसके प्रभावशाली होने की छवि बनाई।
लेकिन पुलिस को मिली शिकायत और उसके बाद हुई छापेमारी ने इस पूरी कहानी को पलट दिया। पुलिस की जांच में आईडी कार्ड के फर्जी होने की बात सामने आई और इसके बाद उसके आईएएस अधिकारी होने के दावे पर सवाल खड़े हो गए।
मनीष गुप्ता से जुड़े मामले ने बिहार में फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को प्रभावित करने के तौर-तरीकों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सामने आई जानकारी के आधार पर पुलिस की कार्रवाई और जांच इस पूरे मामले की अहम कड़ी है।
10वीं में जिला टॉप करने वाले मनीष गुप्ता से लेकर खुद को वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और अजीत डोभाल की टीम का सदस्य बताने तक की कहानी बेहद चौंकाने वाली है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि उसने अपनी कथित फर्जी पहचान के जरिए कितने लोगों को प्रभावित किया और उसके दावों के पीछे असल सच्चाई क्या थी। पुलिस जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले से जुड़े और तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
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