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बिहार की राजनीति का नाम आते ही लोगों के जहां में अक्सर जातीय समीकरण, राजनीतिक दांव-पेंच और बाहुबली छवि की तस्वीर उभरती है। लेकिन सम्राट कैबिनेट में एक ऐसा चेहरा भी शामिल है, जिसने अपनी पहचान सिर्फ राजनीति से नहीं बल्कि शानदार अकादमी उपलब्धियों से बनाई है।

Bihar News : बिहार की राजनीति का नाम आते ही लोगों के जहां में अक्सर जातीय समीकरण, राजनीतिक दांव-पेंच और बाहुबली छवि की तस्वीर उभरती है। लेकिन सम्राट कैबिनेट में एक ऐसा चेहरा भी शामिल है, जिसने अपनी पहचान सिर्फ राजनीति से नहीं बल्कि शानदार अकादमी उपलब्धियों से बनाई है। हम बात कर रहे हैं झंझारपुर से बीजेपी विधायक नीतीश मिश्रा की, जिन्हें शिक्षा यात्रा पटना से शुरू होकर दिल्ली, लंदन, नीदरलैंड और अमेरिका के प्रतिष्ठित संस्थाओं तक पहुंची। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी जैसे विश्वविख्यात संस्थान से प्रशिक्षण हासिल कर चुके नीतीश मिश्रा आज बिहार की राजनीति में उन जानकार नेताओं में गिने जाते हैं, जिनके पास राजनीतिक अनुभव के साथ वैश्विक स्तर की अकादमिक समझ भी है। Bihar News
नीतीश मिश्रा की शुरुआती शिक्षा पटना के प्रतिष्ठित सेंट माइकल हाई स्कूल में हुई, जहां वह स्कूल कैप्टन भी रहे। छात्र जीवन से ही उनकी पहचान एक मेधावी और अनुशासित विद्यार्थी के रूप में थी। इसके बाद उन्होंने दिल्ली का रुख किया और दिल्ली विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन कॉलेज से इतिहास विषय में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें ‘अकादमिक उत्कृष्टता’ सम्मान भी मिला। सिर्फ भारत तक लिमिटेड न रहकर नीतीश मिश्रा ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से भी उच्च शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने दिल्ली के फोर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट और नीदरलैंड के मास्ट्रिच स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से एमबीए किया। इसके बाद उन्हें प्रतिष्ठित ‘ब्रिटिश शेविंग स्कॉलर’ चुना गया और उन्होंने इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ हल से ग्लोबल पॉलिटिकल इकोनॉमी में पोस्ट ग्रेजुएट अवार्ड हासिल किया। जाहिर नहीं, साल 2016 में उन्होंने दुनिया की मशहूर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के जॉन एफ. कैनेडी स्कूल से ‘इमर्जिंग लीडर्स प्रोग्राम’ भी पूरा किया। उनकी यह अकादमी यात्रा उन्हें बिहार की राजनीति में एक अलग पहचान देती है। नीतीश मिश्रा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के बेटे हैं। उनके चाचा ललित नारायण मिश्रा देश के रेल मंत्री रह चुके हैं। हालांकि राजनीतिक परिवार से आने के बावजूद उन्होंने खुद को केवल विरासत तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अपनी छवि एक पढ़े-लिखे, आधुनिक सोच वाले और टेक्नोक्रेट नेता के रूप में तैयार की। साल 2008 में उन्हें ‘एमटीवी यूथ आइकॉन’ सम्मान भी मिला, जबकि ब्रिटिश हाई कमीशन ने उन्हें भारत के 30 प्रभावशाली युवा नेताओं में शामिल किया था। राजनीति में आने के बाद नीतीश मिश्रा ने अपनी शिक्षा और प्रबंधन कौशल का इस्तेमाल बिहार के विकास मॉडल में भी किया। उद्योग मंत्री रहते हुए उन्होंने ‘लैंड बैंक’ और ‘इथेनॉल पॉलिसियों’ जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम किया, जिसकी काफी चर्चा हुई। झंझारपुर से पांचवीं बार विधायक बने मिश्रा का राजनीतिक अनुभव लगभग तीन दशक पुराना है। Bihar News
नवंबर 2025 में कैबिनेट विस्तार के दौरान उन्हें जगह नहीं मिली थी, लेकिन 7 मई 2026 को उन्होंने दोबारा मंत्री पद की शपथ लेकर जोरदार वापसी की। सम्राट कैबिनेट में उन्हें पर्यटन और औद्योगिक विकास जैसे अहम विभाग सौंपे गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उनकी अंतरराष्ट्रीय समझ और प्रशासनिक अनुभव बिहार में निवेश और पर्यटन को नई दिशा दे सकता है। दरभंगा की मिट्टी से जुड़े और सुपौल में राजनीतिक आधार रखने वाले नीतीश मिश्रा को अब बिहार की नई पीढ़ी के पढ़े-लिखे नेताओं में एक मजबूत चेहरा माना जा रहा है। Bihar News
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