बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर तस्वीर फिलहाल साफ होती नजर नहीं आ रही है। राज्य में इस साल पंचायत चुनाव होने की संभावना कम है। इसकी सबसे बड़ी वजह चुनाव से पहले होने वाली परिसीमन की प्रक्रिया है।

Bihar News : बिहार में पंचायत चुनाव को लेकर तस्वीर फिलहाल साफ होती नजर नहीं आ रही है। राज्य में इस साल पंचायत चुनाव होने की संभावना कम है। इसकी सबसे बड़ी वजह चुनाव से पहले होने वाली परिसीमन की प्रक्रिया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। परिसीमन के बाद आरक्षण रोस्टर तैयार किया जाएगा, मतदाता सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा और मतदान केंद्रों का निर्धारण समेत कई अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। जानकारों के मुताबिक, पंचायत चुनाव के लिए केवल परिसीमन की प्रक्रिया में ही छह महीने से अधिक का समय लग सकता है। Bihar News
राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव के लिए परिसीमन की तैयारियों को लेकर बैठकों का सिलसिला शुरू कर दिया है। चुनाव से पहले आयोग को परिसीमन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार करने होंगे। इन्हीं दिशा-निर्देशों के आधार पर जिलों में पंचायत क्षेत्रों की सीमाओं का निर्धारण किया जाएगा।
इस काम की जिम्मेदारी जिला स्तर पर जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी की निगरानी में पूरी होने की संभावना है। परिसीमन के दौरान गांवों की आबादी, भौगोलिक स्थिति और पंचायत क्षेत्रों की सीमाओं का नए सिरे से आकलन किया जाएगा। Bihar News
पंचायत क्षेत्रों के परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा। नए मानकों के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी और भौगोलिक स्थिति का अध्ययन करने के बाद बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के तहत अलग-अलग पंचायत क्षेत्रों की सीमाएं निर्धारित की जाएंगी।
इसमें ग्राम पंचायत क्षेत्र, प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र, पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्रों का सीमांकन शामिल होगा। इसके बाद संबंधित क्षेत्रों के नक्शे तैयार किए जाएंगे और आबादी व मतदाताओं से जुड़े आंकड़ों का संकलन किया जाएगा। परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रस्तावित सीमाओं को लेकर गजट प्रकाशित किया जाएगा। इसके जरिए आम लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे जाएंगे। प्राप्त आपत्तियों पर विचार और उनके निपटारे के बाद परिसीमन को अंतिम रूप दिया जाएगा। Bihar News
पंचायत क्षेत्रों की नई सीमाएं तय होने के बाद अगला बड़ा काम आरक्षण रोस्टर तैयार करना होगा। इसमें अलग-अलग पंचायत पदों और निर्वाचन क्षेत्रों में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) और महिलाओं के लिए आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा। इसके लिए भी तय प्रक्रिया के तहत सीटों का वर्गीकरण और आरक्षण निर्धारित करना होगा। यही वजह है कि परिसीमन पूरा होने के बाद भी चुनाव की तैयारियों में काफी समय लग सकता है। Bihar News
आरक्षण प्रक्रिया के साथ मतदाता सूची को भी चुनाव के लिए तैयार और अपडेट करना होगा। इसके अलावा मतदान केंद्रों का निर्धारण, निर्वाचन क्षेत्रों से जुड़े जरूरी दस्तावेज तैयार करना और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। जानकारों के अनुसार, परिसीमन के बाद इन सभी कामों में लगभग छह महीने का समय और लग सकता है। ऐसे में पंचायत चुनाव की पूरी तैयारी जल्द पूरी होना मुश्किल माना जा रहा है। बिहार में मौजूदा पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल 2026 के नवंबर-दिसंबर के आसपास समाप्त हो रहा है। राज्य में पिछली बार पंचायत चुनाव 2021 में सितंबर से दिसंबर के बीच कराए गए थे। ऐसे में मौजूदा पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने से पहले चुनाव कराना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी। परिसीमन, आरक्षण और मतदाता सूची जैसी प्रक्रियाओं में लगने वाले संभावित समय को देखते हुए 2026 में चुनाव की संभावना कमजोर नजर आ रही है। Bihar News
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