
बिहार का इस बार का चुनाव बेहद रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका है। टिकट बंटवारे को लेकर हर ओर नाराजगी और हलचल देखने को मिल रही है। पहले चरण के नामांकन के लिए अब सिर्फ तीन दिन बचे हैं, लेकिन सहयोगी दलों में सहमति का कोई संकेत नहीं है। महागठबंधन हो या एनडीए, दोनों तरफ सीटों को लेकर कड़ी टकराहट और रणनीतिक जंग जारी है। हालात ऐसे हैं कि कई सीटों पर फ्रेंडली मुकाबले की संभावना बढ़ गई है, जहां दल एक-दूसरे के सामने सीधे उतर सकते हैं। Bihar Assembly Elections 2025
राष्ट्रीय जनता दल की अगुवाई वाले महागठबंधन में घटक दल अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए जोर दे रहे हैं। कांग्रेस ने भी अपने सख्त तेवर बनाए रखे हैं और बिहार में 65 सीटों से कम पर समझौता करने को तैयार नहीं है, जबकि आरजेडी अपनी बड़ी सहयोगी को 60 से कम सीट देने की योजना पर अड़ी हुई है। अब तक आरजेडी ने 71 उम्मीदवारों को अपने सिंबल पर घोषित कर दिया है। इसके अलावा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी-माले ने 18 और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने 6 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर चुनावी तालमेल को और जटिल बना दिया है। Bihar Assembly Elections 2025
बिहार में महागठबंधन की राजनीति इस बार बेहद पेचीदा और हाई-टेंशन वाली दिख रही है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस के अलावा वाम दल और विकासशील इंसान पार्टी (VIP) भी गठबंधन में शामिल हैं, लेकिन सीटों के बंटवारे को लेकर घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा। विपक्षी दल फिलहाल अंतिम समझौते की दिशा में जुटे हैं और माना जा रहा है कि बुधवार सुबह तक इसका ऐलान हो सकता है। कांग्रेस अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर कम से कम 65 सीटों पर अड़ी हुई है, जबकि तेजस्वी यादव की RJD 58 से अधिक सीटें देने के पक्ष में नहीं है। इस खींचतान के बीच कई सीटों पर बातचीत फेल हो चुकी है और अब वहां फ्रेंडली मुकाबले की संभावना तेजी से बढ़ रही है। यानी, महागठबंधन के भीतर ही कुछ सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ टक्कर देखने को मिल सकती है।
बिहार के इस चुनाव में महागठबंधन के भीतर भी विवाद और टकराव तेज हो गया है। खासकर घोषी, मटिहानी, राजापाकड़, फुलवारी, कहलगांव, पालीगंज, मांझी, बछवाड़ा, तरारी और कुटुंबा जैसी 10 सीटों पर दो-दो घटक दल आमने-सामने आने की संभावना है। यानी, महागठबंधन के अंदर ही कई जगह मतदाताओं के लिए दिलचस्प टक्कर देखने को मिलेगी। महागठबंधन की तरह सत्तारूढ़ एनडीए में भी सब कुछ शांतिपूर्ण नहीं है। कम से कम 6 ऐसी सीटें हैं, जहां सहयोगी दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों को उतारने की घोषणा कर दी है। जनता दल यूनाइटेड ने सीट बंटवारे को लेकर पहले ही नाराजगी जताई है, जबकि एनडीए के भीतर आपसी सहमति नहीं बन पाने से फ्रेंडली मुकाबले की उम्मीद और बढ़ गई है। इस बार बिहार में गठबंधनों के बीच टकराव और आंतरिक टक्कर दोनों ही चुनाव को और रोमांचक बनाने वाले हैं।
बिहार में इस बार का चुनाव सियासी ड्रामे और टकराव से भरपूर दिख रहा है। एनडीए के भीतर चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के खिलाफ अब जेडीयू ने भी मोर्चा खोल दिया है। जेडीयू ने चार विधानसभा सीटों—सोनबरसा, गायघाट, राजगीर और एकमा—पर अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है, जिससे एनडीए के भीतर फ्रेंडली मुकाबले की संभावना और बढ़ गई है। इसी बीच, हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (सेकुलर) के नेता जीतन राम मांझी भी सीट बंटवारे को लेकर नाराज दिखे। Bihar Assembly Elections 2025
हालांकि उन्होंने आधिकारिक रूप से बंटवारे को स्वीकार कर लिया, लेकिन लोक जनशक्ति पार्टी की दो सीटों—मखदुमपुर और बोधगया—पर अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर दिया है। इन घटनाओं के बीच बिहार चुनाव 2025 और भी रोमांचक बन गया है। न केवल गठबंधन के बीच कड़ी टक्कर है, बल्कि कई सीटों पर आपसी मुकाबला यानी फ्रेंडली टक्कर भी देखने को मिलेगी। अब सवाल यह है कि मतदाता किस गठबंधन के साथ खड़े होंगे और कौन अपनी रणनीति में बाज़ी मार पाएगा। Bihar Assembly Elections 2025