
बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस इस बार बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ी है न वह पूरे दमखम से लड़ पा रही है, न ही उन सीटों पर भरोसा कर सकती है जो उसके खाते में आई हैं। महागठबंधन से मिली 61 सीटों में पार्टी की असली जंग 52 सीटों पर है, जहां उसे विपक्षी गठबंधनों के साथ-साथ अपने सहयोगियों की परोक्ष नाराजगी का भी सामना करना पड़ रहा है। मजेदार लेकिन चिंताजनक स्थिति यह है कि इन 61 सीटों में से 9 सीटों पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों राजद या वाम दलों के बीच ‘फ्रेंडली फाइट’ यानी आपसी टकराव की स्थिति बन गई है। जाहिर है, इसका सीधा असर वोट बैंक पर पड़ेगा और महागठबंधन की एकजुटता पर भी सवाल उठेगा। Bihar Election
इन 52 सीटों का चुनावी इतिहास कांग्रेस के लिए उत्साहजनक नहीं रहा है। 2008 के परिसीमन के बाद हुए सात विधानसभा चुनावों में से 23 सीटें ऐसी हैं जहां महागठबंधन के किसी भी घटक चाहे कांग्रेस हो, राजद या वामदल ने एक भी बार जीत हासिल नहीं की। यानी ये इलाके एनडीए या निर्दलीय उम्मीदवारों के प्रभाव में रहे हैं। इसी तरह 38 सीटें ऐसी हैं जहां महागठबंधन की पार्टियां या तो कभी नहीं जीतीं या सिर्फ एक बार जीत पाईं।
इस आंकड़े से साफ है कि कांग्रेस जिन इलाकों में इस बार उतरी है, वहां जीत का रास्ता बेहद मुश्किल है। Bihar Election
| सीट | जिला/क्षेत्र | चरण/शामिल दल | प्रमुख उम्मीदवार |
|---|---|---|---|
| वारसलिगंज | नवादा (मगध) | पहला – कांग्रेस vs आरजेडी | सतीश कुमार (कांग्रेस), अनीता देवी (आरजेडी) |
| बाबूबरही | मधुबनी (मिथिला) | दूसरा – वीआईपी vs आरजेडी | बिंदू गुलाब यादव (वीआईपी), अरुण कुमार सिंह (आरजेडी) |
| गौरा-बौराम | दरभंगा (मिथिला) | दूसरा – वीआईपी vs आरजेडी | गणेश भारती (वीआईपी), अफजल अली खान (आरजेडी) |
| कुशेश्वर स्थान | दरभंगा (मिथिला) | दूसरा – वीआईपी vs आरजेडी | गणेश भारती (वीआईपी), आरजेडी उम्मीदवार |
| मोहनिया | रोहतास (मगध) | पहला – आरजेडी vs निर्दलीय | श्वेता सुमन (आरजेडी), रवि पासवान (निर्दलीय, महागठबंधन समर्थन) |
| बछवाड़ा | बेगूसराय (मगध) | दूसरा – कांग्रेस vs सीपीआई | प्रकाश गारिब दास (कांग्रेस), अवधेश रॉय (सीपीआई) |
| कड़वा | कटिहार (सीमांचल) | पहला – कांग्रेस vs आरजेडी | शकील अहमद खान (कांग्रेस), आरजेडी उम्मीदवार |
| बिहार शरीफ | नालंदा (मगध) | दूसरा – कांग्रेस vs सीपीआई | ओमैर खान (कांग्रेस), शिव कुमार यादव (सीपीआई) |
| काहलगांव | भागलपुर (सीमांचल) | पहला – कांग्रेस vs आरजेडी | प्रवीण सिंह कुशवाहा (कांग्रेस), आरजेडी उम्मीदवार |
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कांग्रेस के “रणनीतिक पुनर्वास” का चुनाव है। पार्टी उन इलाकों में उतर रही है जहां उसका जनाधार लगभग समाप्त हो चुका था।
इसके पीछे दो वजहें बताई जा रही हैं।
महागठबंधन में राजद का दबदबा — सीट बंटवारे में कांग्रेस को कमजोर क्षेत्रों से समझौता करना पड़ा।
संगठन को पुनर्जीवित करने की कोशिश — पार्टी चाहती है कि इन इलाकों में जमीनी ढांचा दोबारा खड़ा हो, ताकि लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अपनी मौजूदगी दर्ज करा सके।
लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या यह रणनीति सफल होगी या कांग्रेस एक बार फिर ‘सहयोगी दल’ की भूमिका में सिमट जाएगी?
2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 70 सीटों पर लड़कर सिर्फ 19 जीती थीं। अब 61 सीटों पर उतरना, रणनीतिक रूप से एक “कंट्रोल्ड कॉम्पिटिशन” की नीति लग सकती है, लेकिन यह भी साफ है कि कांग्रेस इस बार संख्या नहीं, साख बचाने की लड़ाई लड़ रही है। पार्टी बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर फोकस कर रही है, पर बिहार की ज़मीनी राजनीति में स्थानीय चेहरों और जातीय समीकरणों की पकड़ ज़्यादा असर डालती है। राजद की लोकप्रियता और तेजस्वी यादव की सक्रियता के बीच कांग्रेस की आवाज़ अक्सर दब जाती है। Bihar Election
बिहार में कांग्रेस अब विचारधारा की नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। अगर वह इन 52 सीटों में से 15-20 पर भी जीत हासिल कर लेती है, तो यह उसके लिए बड़ी राहत होगी। लेकिन अगर प्रदर्शन कमजोर रहा, तो महागठबंधन में उसका राजनीतिक वजन और घट जाएगा। यह चुनाव कांग्रेस के लिए सीटों की गिनती से ज़्यादा साख की परीक्षा है। उसे वहीं से उम्मीदें तलाशनी हैं, जहां अब तक इतिहास उसके खिलाफ रहा है। सवाल बस इतना है क्या इस बार ‘हाथ’ में कुछ ठोस आएगा या फिर इतिहास खुद को दोहराएगा? Bihar Election