
बिहार की राजनीति में भ्रष्टाचार एक बार फिर सुर्खियों के केंद्र में है। जन सुराज अभियान के मुखिया प्रशांत किशोर ने मंत्री अशोक चौधरी पर जमीन घोटाले का आरोप जड़कर न केवल सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है, बल्कि सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘सुशासन बाबू’ वाली छवि पर चोट की है। अशोक चौधरी और उनकी सांसद बेटी शांभवी चौधरी ने भले ही सफाई पेश की हो, मगर सियासी नुकसान की आंच फिलहाल नीतीश कुमार तक ही पहुंचती दिख रही है। अब तक विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ही नीतीश सरकार पर भ्रष्टाचार के वार करते रहे थे, लेकिन प्रशांत किशोर के हमले ने पूरे चुनावी माहौल को और गर्मा दिया है। यह हमला सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उस छवि पर चोट माना जा रहा है, जिसे वर्षों से ‘सुशासन बाबू’ के नाम से गढ़ा गया है। Bihar News
प्रशांत किशोर का आरोप है कि अशोक चौधरी ने बीते तीन सालों में पत्नी और सांसद बेटी शांभवी चौधरी के नाम पर करोड़ों की जमीन खरीदी और इन सौदों में गड़बड़ी हुई। उनका दावा है कि रकम का एक हिस्सा उस ट्रस्ट तक भी पहुंचा, जिसका रिश्ता शांभवी चौधरी के ससुराल पक्ष से जुड़ा है। किशोर का कहना है कि नीतीश कुमार को इस मामले में वही कड़ाई बरतनी चाहिए, जैसी उन्होंने 2017 में तेजस्वी यादव पर लगे आरोपों के बाद दिखाई थी। हालांकि, अशोक चौधरी इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हैं और कहते हैं कि उनकी सभी संपत्तियां खुले दस्तावेजों में दर्ज हैं और वह हर साल आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं। शांभवी चौधरी ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके परिवार पर लगाए गए आरोप निराधार और दुर्भावना से प्रेरित हैं, जबकि उनकी संपत्ति पूरी तरह पारदर्शी है। Bihar News
सियासी जानकारों का कहना है कि आरोप सीधे अशोक चौधरी पर लगे हों, लेकिन असली चोट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि पर पड़ रही है। विपक्षी नेता तेजस्वी यादव पहले ही उन्हें ‘भ्रष्टाचार का पितामह’ करार दे चुके हैं और अब प्रशांत किशोर भी उसी सुर में चोट कर रहे हैं। जेडीयू के भीतर भी बेचैनी झलक रही है, हालांकि पार्टी प्रवक्ता नीरज कुमार नीतीश के बचाव में खड़े होकर कहते हैं—“दो दशक की राजनीति में नीतीश जी ने ईमानदारी की नई मिसाल पेश की है। जिन पर सवाल उठे हैं, सफाई भी वही दें, क्योंकि नीतीश जी पर भ्रष्टाचार का दाग कोई नहीं लगा सकता। Bihar News
यह विवाद अब सिर्फ जेडीयू तक सीमित नहीं रहा। प्रशांत किशोर ने निशाने पर बीजेपी नेताओं को भी ले लिया है—सम्राट चौधरी, मंगल पांडेय और दिलीप जायसवाल पर सवाल उठाकर उन्होंने एनडीए के भीतर असहजता और बढ़ा दी है। हालात तब और पेचीदा हो गए जब पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद आरके सिंह ने खुले मंच से कहा कि इन नेताओं को पारदर्शी जवाब देना चाहिए और पार्टी आलाकमान को भी अपना पक्ष साफ करना होगा। उनकी टिप्पणी से बीजेपी के भीतर खलबली मच गई है। सियासी जानकार मानते हैं कि प्रशांत किशोर का असली वार नीतीश कुमार पर है, जिनकी पहचान लंबे समय तक भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस वाली रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या नीतीश अपनी पुरानी नीति पर अडिग रहकर अशोक चौधरी से जवाबतलबी करेंगे, या फिर गठबंधन की मजबूरियां उन्हें चुप रहने पर मजबूर कर देंगी? Bihar News