
बिहार विधानसभा चुनाव की खुराक अब राजनीतिक गलियारों में नए फॉर्मूले के साथ गरमाने लगी है। बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी मुख्य विपक्षी महागठबंधन ने यह रणनीति बनाई है कि अगर सत्ता में आए, तो तीन उपमुख्यमंत्री बनाए जाएँ, जो राज्य के सामाजिक विविधता को बखूबी दर्शाएँ। योजना के अनुसार, एक उपमुख्यमंत्री दलित समुदाय से, दूसरा मुस्लिम और तीसरा अतिपिछड़ा वर्ग से होगा। इस गठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा तेजस्वी यादव होंगे, जो पिछड़े वर्ग से आते हैं और दो बार उपमुख्यमंत्री के तौर पर राज्य प्रशासन का अनुभव अपने नाम कर चुके हैं। हालांकि, अभी तक गठबंधन के सहयोगी दलों की ओर से उनका औपचारिक समर्थन नहीं आया है, लेकिन यह फॉर्मूला पहले ही राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बन चुका है। Bihar Elections 2025
चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही बिहार में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सभी प्रमुख पार्टियों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर लगातार बैठकें चल रही हैं। आरजेडी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने बुधवार को बताया कि महागठबंधन में न केवल सीटों का फॉर्मूला तय किया जा रहा है, बल्कि उपमुख्यमंत्रियों के चयन पर भी विचार चल रहा है। आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी के मुताबिक, पार्टी लगभग 125 सीटों पर चुनाव मैदान में उतरेगी, जबकि कांग्रेस को 50-55 और वीआईपी को 12 सीटें देने पर समझौता हो चुका है। शेष सीटों का वितरण अन्य सहयोगी दलों में किया जाएगा। इसके अलावा, रालोजपा के दो उम्मीदवार इस बार राजद के सिंबल पर चुनाव लड़ेंगे, जो गठबंधन की सामरिक तैयारी का अहम हिस्सा माना जा रहा है। Bihar Elections 2025
मृत्युंजय तिवारी का कहना है कि यह फॉर्मूला तेजस्वी यादव को महागठबंधन का स्पष्ट मुख्यमंत्री चेहरा बनाता है। यह सिर्फ आरजेडी की राजनीतिक विरासत को नए रंग में पेश करने का संकेत ही नहीं, बल्कि गठबंधन की रणनीतिक गहरी समझ का भी परिचायक है। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि तेजस्वी यादव अपनी राजनीति को केवल यादव वर्ग तक सीमित नहीं रखना चाहते; उनका लक्ष्य दलित, अतिपिछड़ा और अल्पसंख्यक समुदायों को समान अवसर और सशक्त नेतृत्व देना है, जिससे बिहार की सत्ता सभी वर्गों के लिए समावेशी बने।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रवीण कुशवाहा ने तीन उपमुख्यमंत्रियों के फॉर्मूले को बिहार की राजनीति में समावेशिता का प्रतीक बताया। उनका कहना है कि यह साफ संदेश है कि राहुल गांधी चाहते हैं कि राज्य की सत्ता में हर समुदाय का प्रतिनिधित्व हो। वहीं, वीआईपी प्रवक्ता देव ज्योति इसे तेजस्वी यादव की दूरदर्शिता और संतुलित राजनीतिक सोच का उदाहरण मानते हैं, जो गठबंधन के भीतर विविधता और सामंजस्य को कायम रखने की रणनीति का हिस्सा है।
बिहार की राजनीति में उपमुख्यमंत्री पद हमेशा ही शक्ति और संतुलन का प्रतीक रहा है। अब तक राज्य में कुल 10 उपमुख्यमंत्री रहे हैं। सबसे पहले अनुग्रह नारायण सिन्हा ने मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिन्हा के साथ 11 साल से अधिक समय तक सत्ता साझा की। समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर ने भी उपमुख्यमंत्री से मुख्यमंत्री बनने का लंबा राजनीतिक सफर तय किया। वहीं, जगदेव प्रसाद केवल चार दिन और राम जयपाल सिंह यादव 220 दिन इस पद पर रहे। Bihar Elections 2025
बीजेपी के सुशील कुमार मोदी ने 10 साल 316 दिन तक उपमुख्यमंत्री रहते हुए राजनीतिक स्थिरता और अनुभव का उदाहरण पेश किया। तेजस्वी यादव भी दो कार्यकालों में तीन साल से अधिक समय तक उपमुख्यमंत्री पद संभाल चुके हैं। इसके अलावा, तरकिशोर प्रसाद, रेणु देवी, विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी जैसे नेता भी इस पद पर रह चुके हैं, जिन्होंने बिहार की राजनीति में अलग-अलग दौर में महत्वपूर्ण योगदान दिया। Bihar Elections 2025