
Bihar : बिहार चुनाव 2025 का बिगुल बज चुका है और राज्य की 243 विधानसभा सीटों पर मुकाबला बेहद रोचक होने की संभावना है। क्या इस बार 2010 जैसा सियासी खेला फिर से होने वाला है? आइए, दावों, तैयारियों और संभावनाओं के बीच जमीनी सच्चाई को समझते हैं।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ओर से चुनावी रण में उतरेंगे।
जदयू, भाजपा और अन्य सहयोगी दलों में फिलहाल नेतृत्व को लेकर कोई असमंजस नहीं है।
नीतीश कुमार की स्थिर छवि और विकास के मुद्दे को NDA दोहराने जा रही है। Bihar
तेजस्वी यादव की पार्टी राजद को कांग्रेस की रणनीति से झटका लग सकता है।
कांग्रेस के तेवर और तैयारी देखकर लग रहा है कि वह इस बार गठबंधन से ज्यादा स्वतंत्र रणनीति बना रही है।
अगर ऐसा होता है, तो महागठबंधन में दरार पड़ सकती है।
वर्ष 2010 में कांग्रेस ने अकेले दम पर 243 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे करारी हार मिली थी।
तब केवल 4 सीटों पर जीत और 216 पर जमानत ज़ब्त हुई थी।
अब कांग्रेस फिर से पूरे राज्य में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश में है, जिससे 2010 की यादें ताजा हो रही हैं।
कांग्रेस ने बिहार में संगठनात्मक बदलाव कर दलित और पिछड़े वर्गों को साधने की रणनीति अपनाई है।
नए प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और जातीय समीकरण को साधते जिला अध्यक्षों की नियुक्ति इसके संकेत हैं।
राहुल गांधी के लगातार दौरे और सीधे जनता से संवाद की कोशिशें कांग्रेस के सक्रिय होने का प्रमाण हैं। Bihar
फिलहाल कांग्रेस ने इस पर कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।
लेकिन तैयारियां बता रही हैं कि या तो कांग्रेस सभी सीटों पर लड़ेगी, या फिर राजद पर दबाव बनाकर सीटें झटकेगी।
इससे तेजस्वी यादव की रणनीति को नए सिरे से गढ़ना पड़ेगा।
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने पहले ही सभी 243 सीटों पर लड़ने का ऐलान कर दिया है।
वहीं, पूर्व आईपीएस अफसर शिवदीप लांडे ने अपनी पार्टी ‘हिंद सेना’ बनाकर सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान कर राजनीति को नया मोड़ दे दिया है।
इस बार का चुनाव बहु-पक्षीय मुकाबला होगा, जिसमें NDA, महागठबंधन, कांग्रेस, जन सुराज और हिंद सेना आमने-सामने होंगी।
जातीय समीकरण, युवाओं की भूमिका, रोज़गार, शिक्षा, और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। Bihar :