BRICS Summit 2026 से पहले कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने भारत को BRICS से मिलने वाले फायदे पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। उनके बयान पर BJP ने जोरदार पलटवार करते हुए कांग्रेस को घेरा है। 'नाराज फूफा' वाली सियासी बहस के बीच BRICS से भारत को होने वाले वास्तविक लाभ पर नई राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।

National News : भारत में होने वाले BRICS Summit 2026 से पहले राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा सियासी टकराव सामने आया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने BRICS सहित अंतरराष्ट्रीय मंचों में भारत की भूमिका और उनसे देश को मिलने वाले ठोस लाभ पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चिदंबरम ने कहा कि पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों से उन्हें भारत के लिए कोई ठोस फायदा या ठोस नतीजा दिखाई नहीं दिया। चिदंबरम का यह बयान ऐसे समय आया है जब नई दिल्ली में BRICS Summit 2026 की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच रही हैं। दिल्ली में सम्मेलन से जुड़े मार्गों, भारत मंडपम के आसपास के क्षेत्रों, सड़कों, बाजारों, फुटपाथों और अन्य प्रमुख स्थानों पर साफ-सफाई, सौंदर्यीकरण और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने का काम तेज कर दिया गया है। National News
पी. चिदंबरम ने BRICS के साथ-साथ भारत की अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं में भागीदारी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि भारत BRICS, SCO, G20 और QUAD जैसे कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंचों का हिस्सा है, लेकिन सवाल यह है कि इन मंचों से भारत को वास्तविक और ठोस लाभ क्या मिल रहा है। चिदंबरम के मुताबिक, उन्हें पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों से कोई महत्वपूर्ण ठोस परिणाम दिखाई नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि पहले BRICS सम्मेलनों से कुछ ठोस फायदे निकलते थे, लेकिन हाल के सम्मेलनों को लेकर उन्हें ऐसा परिणाम नजर नहीं आया। उनका यह बयान महज एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन पर टिप्पणी नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे केंद्र सरकार की विदेश नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुपक्षीय कूटनीति पर कांग्रेस के सवाल के तौर पर देखा जा रहा है। National News
चिदंबरम के बयान के बाद भाजपा की ओर से कांग्रेस पर पलटवार शुरू हो गया है। भाजपा का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों की उपयोगिता को केवल तत्काल दिखाई देने वाले किसी एक आर्थिक लाभ से नहीं आंका जा सकता। BRICS जैसे मंच भारत को वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने, आर्थिक एवं रणनीतिक सहयोग बढ़ाने और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग को आगे बढ़ाने का अवसर देते हैं। यही वजह है कि BRICS को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच बहस अब केवल सम्मेलन की तैयारियों तक सीमित नहीं रही है। सवाल यह बन गया है कि क्या अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का मूल्यांकन केवल तत्काल आर्थिक लाभ से किया जाना चाहिए या फिर दीर्घकालिक रणनीतिक प्रभाव भी उसकी सफलता का पैमाना होना चाहिए? National News
दिलचस्प बात यह है कि BRICS को लेकर चिदंबरम की टिप्पणी उस राजनीतिक माहौल में आई है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'नाराज फूफा' वाले बयान को लेकर पहले से ही कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल में सरकार की विकास परियोजनाओं पर लगातार सवाल उठाने वाले आलोचकों पर तंज कसते हुए 'नाराज फूफा' शब्द का इस्तेमाल किया था। उन्होंने ऐसे लोगों का उदाहरण देते हुए कहा था कि कोई भी बड़ी परियोजना शुरू होते ही सवाल खड़े किए जाते हैं कि इसकी जरूरत क्या है और इससे क्या हासिल होगा। इस टिप्पणी पर विपक्ष ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। इसके बाद पी. चिदंबरम ने भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें 'दिमागी नक्सल' कहलाने पर खुशी है। उन्होंने प्रधानमंत्री के राजनीतिक नारों और नए-नए शब्दों के इस्तेमाल पर भी टिप्पणी की।चिदंबरम ने दावा किया कि उनके 'दिमागी नक्सल' वाले सोशल मीडिया पोस्ट को बड़ी संख्या में लाइक्स मिले। अब BRICS पर चिदंबरम का सवाल इस राजनीतिक बहस को एक नया मोड़ दे रहा है। National News
एक तरफ कांग्रेस नेता सम्मेलन के संभावित परिणामों पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में BRICS Summit की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में होने वाला सम्मेलन भारत की कूटनीतिक सक्रियता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्मेलन को लेकर दिल्ली नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने भारत मंडपम तथा उससे जुड़े प्रमुख मार्गों का निरीक्षण किया है। सराय काले खां, लोधी रोड, निजामुद्दीन, साकेत और शेख सराय सहित कई इलाकों में साफ-सफाई, यातायात मार्गों, सौंदर्यीकरण, प्रकाश व्यवस्था और अन्य नागरिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता का घोषित थीम 'Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability' है, जिसमें लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास पर जोर दिया गया है। National News
BRICS Summit 2026 को लेकर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सम्मेलन समाप्त होने के बाद भारत के हाथ में कौन-कौन से ठोस परिणाम आते हैं। क्या इससे व्यापार, निवेश, तकनीक, ऊर्जा, वैश्विक दक्षिण के सहयोग और रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती मिलेगी? क्या भारत वैश्विक संस्थाओं में सुधार की अपनी मांग को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा पाएगा? कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम का सवाल इसी बिंदु पर है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों की बैठकों के बाद भारत को दिखाई देने वाले ठोस परिणाम क्या हैं। वहीं भाजपा का पक्ष यह है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के परिणाम केवल तत्काल आंकड़ों में नहीं दिखाई देते, बल्कि लंबे समय में देश की रणनीतिक स्थिति और वैश्विक प्रभाव को भी प्रभावित करते हैं। यही बहस अब BRICS Summit 2026 को लेकर होने वाली राजनीतिक चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा बनती दिखाई दे रही है। एक तरफ मोदी सरकार इसे भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका के प्रदर्शन के अवसर के रूप में देख रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष सरकार से यह सवाल पूछ रहा है कि इस वैश्विक मंच का भारत के आम नागरिक और देश की अर्थव्यवस्था को वास्तविक लाभ कितना मिला। आने वाले दिनों में BRICS सम्मेलन की बैठकों और उसमें लिए जाने वाले फैसलों पर इस राजनीतिक बहस का असर साफ दिखाई दे सकता है। National News
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