एलपीजी पर बड़ी राहत : केंद्र ने राज्यों का 50% तक बढ़ाया आवंटन, मजदूरों को 5 किलो सिलेंडर

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए गैस आवंटन बढ़ाने का फैसला किया है, जिससे आम लोगों के साथ-साथ छोटे कारोबारियों और मजदूरों को राहत मिलने की उम्मीद है।

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अतिरिक्त गैस सप्लाई
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar21 Mar 2026 07:03 PM
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LPG Problem : देश में एलपीजी की उपलब्धता को लेकर जारी दबाव के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए गैस आवंटन बढ़ाने का फैसला किया है, जिससे आम लोगों के साथ-साथ छोटे कारोबारियों और मजदूरों को राहत मिलने की उम्मीद है।

23 मार्च से लागू होगा नया आदेश

मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश के अनुसार:

* 23 मार्च 2026 से अतिरिक्त 20% गैस सप्लाई शुरू की जाएगी

* इससे कुल आवंटन संकट से पहले के स्तर के लगभग 50% तक पहुंच जाएगा

* यह व्यवस्था अगले आदेश तक लागू रहेगी

इस फैसले का मकसद बाजार में गैस की कमी को कम करना और सप्लाई चेन को संतुलित करना है।

प्रवासी मजदूरों के लिए खास राहत

सरकार ने इस बार खास तौर पर प्रवासी मजदूरों को ध्यान में रखते हुए योजना बनाई है।

* 5 किलो के छोटे एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे

* ये सिलेंडर सस्ते और आसानी से ले जाने योग्य होंगे

* अस्थायी और कामकाजी लोगों को खाना बनाने में सहूलियत मिलेगी

इन सेक्टरों को मिलेगी प्राथमिकता

अतिरिक्त गैस सप्लाई को कुछ खास क्षेत्रों के लिए प्राथमिकता दी जाएगी:

* होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट

* औद्योगिक कैंटीन

* फूड प्रोसेसिंग और डेयरी यूनिट

* सरकारी और स्थानीय निकायों द्वारा चलाए जा रहे सस्ते भोजन केंद्र

* कम्युनिटी किचन

इससे इन सेवाओं में रुकावट कम होगी और आम लोगों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

ब्लैक मार्केटिंग पर सख्ती

सरकार ने गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं:

* छापेमारी अभियान तेज किया जाएगा

* सप्लाई का गलत इस्तेमाल रोकने के लिए निगरानी बढ़ेगी

* सभी व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है

आयात में बदलाव भी बना वजह

एलपीजी सप्लाई पर असर डालने वाले अंतरराष्ट्रीय कारक भी सामने आए हैं जिनमें हाल के दिनों में आयात में गिरावट दर्ज की गई। मध्य पूर्व से आने वाली सप्लाई कम हुई तथा वैकल्पिक स्रोतों, खासकर अमेरिका से आयात बढ़ाया जा रहा है। सरकार इन बदलावों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। केंद्र सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब गैस की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही थी। बढ़े हुए आवंटन, प्राथमिकता वाले सेक्टर और छोटे सिलेंडर जैसी पहल से आने वाले दिनों में हालात बेहतर होने की उम्मीद है। यह फैसला न सिर्फ आम जनता बल्कि छोटे व्यवसाय और प्रवासी मजदूरों के लिए भी राहत लेकर आ सकता है।


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जब शहनाई की तान से गूंजती थी काशी, कुछ ऐसा था बिस्मिल्लाह खान का जीवन

भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का जीवन भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा, सादगी और समर्पण की अद्भुत मिसाल है। उन्होंने शहनाई को सिर्फ एक वाद्ययंत्र नहीं रहने दिया, बल्कि उसे भारतीय आत्मा की आवाज भी बना दिया।

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान
उस्ताद बिस्मिल्लाह खान
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar21 Mar 2026 03:48 PM
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Ustad Bismillah Khan : भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का जीवन भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा, सादगी और समर्पण की अद्भुत मिसाल है। उन्होंने शहनाई को सिर्फ एक वाद्ययंत्र नहीं रहने दिया, बल्कि उसे भारतीय आत्मा की आवाज भी बना दिया। 21 मार्च 1916 को बिहार राज्य के डुमरांव में जन्मे उस्ताद ने अपनी संगीत साधना से ऐसा इतिहास रचा, जिसे पीढ़ियां याद रखेंगी। उनकी शहनाई की तान में एक ओर भक्ति का भाव था, तो दूसरी ओर भारतीय संस्कृति की गहरी जड़ें भी महसूस होती थीं। उन्होंने देश ही नहीं, दुनिया भर के श्रोताओं को अपने सुरों से प्रभावित किया। उनकी जयंती पर उन्हें याद करना दरअसल उस विरासत को प्रणाम करना है, जिसने भारतीय संगीत को वैश्विक सम्मान दिलाया।

बाबा विश्वनाथ के चरणों में समर्पित थी साधना

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का काशी और बाबा विश्वनाथ से बेहद गहरा आध्यात्मिक रिश्ता था। कहा जाता है कि जब तक वह जीवित रहे, तब तक अपनी शहनाई की मधुर तान से बाबा विश्वनाथ को जगाने की परंपरा निभाते रहे। उनके सुरों में भक्ति, बनारस की आत्मा और गंगा किनारे की आध्यात्मिक शांति का अनूठा संगम सुनाई देता था। यही वजह है कि उनकी शहनाई सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि साधना मानी जाती थी। एक दौर में शहनाई को सिर्फ शादी-ब्याह और शुभ अवसरों का वाद्ययंत्र माना जाता था। लेकिन उस्ताद बिस्मिल्लाह खान ने अपने अथक रियाज, अद्भुत प्रतिभा और समर्पण से इसे शास्त्रीय संगीत की ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। उन्होंने शहनाई को देश की सीमाओं से बाहर ले जाकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मान दिलाया। आज शहनाई को जो प्रतिष्ठा हासिल है, उसमें उस्ताद का योगदान सबसे अहम माना जाता है।

डुमरांव की मिट्टी से उठी सुरों की महान धारा

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान का जन्म बिहार के बक्सर जिले के डुमरांव में एक संगीतकार परिवार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें संगीत का वातावरण मिला और उसी ने उनके भीतर शहनाई के प्रति समर्पण का भाव पैदा किया। कठिन साधना और निरंतर अभ्यास ने उन्हें उस मुकाम तक पहुंचाया, जहां उनका नाम शहनाई का पर्याय बन गया। उनकी कला में बिहार की सादगी और बनारस की आत्मीयता एक साथ दिखाई देती थी। उस्ताद बिस्मिल्लाह खान केवल एक महान कलाकार ही नहीं थे, बल्कि वे भारतीय साझा संस्कृति और गंगा-जमुनी तहजीब के मजबूत प्रतीक भी थे। उनके व्यक्तित्व में विनम्रता, आध्यात्मिकता और इंसानियत की गहरी छाप थी। यही कारण है कि वे संगीत के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द की मिसाल के रूप में भी याद किए जाते हैं। भारतीय संगीत को समृद्ध करने और शहनाई को वैश्विक पहचान दिलाने में उनके ऐतिहासिक योगदान के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा गया। उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा हैं।

जयंती पर नेताओं ने किया स्मरण

उस्ताद बिस्मिल्लाह खान की जयंती पर देश के कई बड़े नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके अतुलनीय योगदान को याद करते हुए उन्हें नमन किया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उन्हें शहनाई का जादूगर बताते हुए विनम्र अभिवादन किया। वहीं शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उस्ताद की स्मृतियां शहनाई की मधुर धुन में हमेशा जीवित रहेंगी।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उन्हें याद करते हुए कहा कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खान ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई। उन्होंने अपने संगीत के माध्यम से राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव को मजबूत किया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उन्हें काशी और भारत की सांस्कृतिक चेतना का जीवंत स्वर बताया। वहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उनकी कला, सादगी और सांझी विरासत को भारतीय संगीत जगत की अमूल्य धरोहर कहा। Ustad Bismillah Khan

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संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कर दी बड़ी घोषणा

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने बड़ी घोषणा कर दी है। RSS प्रमुख की इस घोषणा को RSS में बदले हुए युग के रूप में देखा जा रहा है। RSS अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर चुका है। इन दिनों भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में RSS का शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है।

मोहन भागवत
मोहन भागवत
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar20 Mar 2026 04:34 PM
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Mohan Bhagwat : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने बड़ी घोषणा कर दी है। RSS प्रमुख की इस घोषणा को RSS में बदले हुए युग के रूप में देखा जा रहा है। RSS अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर चुका है। इन दिनों भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में RSS का शताब्दी वर्ष मनाया जा रहा है। RSS के शताब्दी वर्ष के सिलसिले में अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

RSS में होंगे 86 संभाग

RSS का राष्ट्रीय मुख्यालय महाराष्ट्र के नागपुर शहर में है। नागपुर में शुक्रवार को RSS का बड़ा आयोजन हुआ। RSS के इस आयोजन में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भविष्य में RSS के अलग-अलग 86 संभाग बनाए जाएंगे। वर्तमान में RSS के 46 प्रांत हैं। इन 46 प्रांतों को 86 संभाग में बदलकर RSS के संगठन में बड़ा बदलाव किया जाएगा। इसके साथ ही संघ प्रमुख मोहन भागवत ने यह घोषणा भी कर दी है कि RSS के संगठन का स्वरूप जरूर बदलेगा किन्तु RSS का काम तथा काम करने का तरीका बिल्कुल भी नहीं बदला जाएगा।

नागपुर में क्या बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत

नागपुर के कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी उन विचारधाराओं की ओर आकर्षित होती है, जिसमें राष्ट्र सेवा की भावना हो। उन्होंने कहा कि RSS को अच्छे कामों के लिए इंटरनेट मीडिया पर अपनी सक्रियता बढ़ाने की आवश्यकता है। जब उनसे पूछा गया कि RSS ने अपनी स्थापना के 100 साल पूरे होने के मौके पर हाल ही में संगठन में क्या बड़े बदलाव किए हैं, इस पर उन्होंने कहा कि RSS का कार्य बड़े स्तर पर बढ़ा है। इसलिए अब विकेंद्रीकरण की जरूरत है।

RSS के काम का तरीका कभी नहीं बदलेगा

भागवत ने कहा कि छोटी-छोटी इकाइयां जरूरी कामों को ज्यादा कुशलता से संभालेंगी, जबकि मित्रता रखने और स्वयं मिसाल बनकर नेतृत्व करने का मूल तरीका पहले जैसा ही रहेगा। उन्होंने कहा कि चूंकि RSS से लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं, इसलिए स्वयंसेवकों को भी अब ज्यादा परिश्रम करना होगा। इसलिए अब और भी छोटी-छोटी इकाइयां बनाई जाएंगी। जो काम पहले ऊपरी स्तर से होता था, वह अब ये छोटी इकाइयां करेंगी। जब कोई संगठन बड़ा होता है तो यह एक स्वाभाविक बदलाव है। उन्होंने कहा कि अब आरएसएस में 46 प्रांतों (प्रशासनिक इकाइयों) के बजाय 86 संभाग होंगे।उन्होंने स्पष्ट किया कि RSS के काम करने का ढंग नहीं बदलेगा। यह पहले जैसा ही रहेगा। काम करने का वह तरीका है मित्रता करना और स्वयं मिसाल बनकर बदलाव लाना। जब उनसे पूछा गया कि विपरीत परिस्थितियों में भी संघ का विस्तार कैसे हुआ तो उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन के विस्तार में प्रचार-प्रसार से मदद मिल सकती है, लेकिन RSS की असली ताकत कुछ और ही है। संघ का विस्तार ऐसे माध्यमों से नहीं होता। इसका विस्तार इसके काम और इसके कार्यकर्ताओं के बीच आपसी स्नेह से होता है। Mohan Bhagwat


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