
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले का माहौल हर दिन नया मोड़ ले रहा है। दरभंगा में कांग्रेस-आरजेडी के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां पर हुई अभद्र टिप्पणी ने अब पूरे चुनावी नैरेटिव को बदल दिया है। बीजेपी ने इस बयान को महिला अस्मिता से जोड़ते हुए इसे चुनावी रणभूमि का सबसे बड़ा मुद्दा बना दिया है। यही वजह है कि एनडीए ने 4 सितंबर को बिहार बंद का आह्वान किया, जिसे पूरी तरह बीजेपी महिला मोर्चा ने लीड किया। पटना से लेकर राज्य के अलग-अलग जिलों तक महिला मोर्चा की कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आईं और उनके साथ एनडीए के बड़े नेता भी मैदान में दिखाई दिए। इस तरह बीजेपी ने चुनाव से पहले अपनी रणनीति साफ कर दी है— महिला वोट बैंक और भावनाओं को केंद्र में रखकर महागठबंधन को घेरना। Bihar Assembly Election 2025
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले दरभंगा की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ में पीएम मोदी और उनकी मां पर की गई अभद्र टिप्पणी ने बीजेपी को बड़ा सियासी हथियार थमा दिया है। पार्टी ने इसे सीधे महिलाओं के सम्मान से जोड़कर महागठबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने भी जीविका दीदियों को संबोधित करते हुए साफ कहा कि “मां का अपमान मैं कांग्रेस को क्षमा कर सकता हूं, लेकिन बिहार की जनता कभी माफ नहीं करेगी।
इसके बाद से एनडीए की महिला ब्रिगेड आक्रामक मोड में आ गई है। बीजेपी की रणनीति साफ है—महिला मतदाताओं की नाराज़गी को चुनावी लाभ में बदलना और महागठबंधन को महिला विरोधी छवि में कैद करना। यही वजह है कि पार्टी नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस-आरजेडी की राजनीति गाली-गलौज की संस्कृति पर टिकी है और जब तक राहुल गांधी व तेजस्वी यादव माफी नहीं मांगते, यह लड़ाई थमेगी नहीं। Bihar Assembly Election 2025
बिहार की सियासत में महिला मतदाताओं की भूमिका हमेशा निर्णायक रही है। 2020 विधानसभा चुनाव में 243 सीटों में से 167 सीटों पर महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा मतदान किया था। उस चुनाव में 41% महिलाओं ने एनडीए को वोट दिया था, जबकि महागठबंधन को सिर्फ 31% वोट मिले थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार भी बीजेपी ने ‘महिला अस्मिता’ को चुनावी ट्रंप कार्ड बनाने की रणनीति बनाई है। पार्टी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि पीएम मोदी और उनकी मां का अपमान पूरे महिला समाज का अपमान है। साथ ही, अति पिछड़ा समुदाय से जुड़े परिवार के प्रति की गई टिप्पणी से सामाजिक समीकरण को भी साधने की कोशिश है।
बिहार बंद के ऐलान से पहले एनडीए ने अखबारों में विज्ञापन जारी कर जनता से भावुक अपील की थी। विज्ञापन में मां का चित्र और गुस्से से भरे चेहरे का ग्राफिक लगाकर यह संदेश दिया गया कि इस अपमान से पूरा बिहार शर्मसार हुआ है। कुल मिलाकर, बीजेपी और एनडीए ने इस विवाद को चुनावी नैरेटिव का केंद्र बना दिया है। सियासी जानकारों का कहना है कि ‘गाली विवाद’ महागठबंधन के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है, क्योंकि महिला वोटरों की नाराजगी किसी भी दल की चुनावी किस्मत पलट सकती है। Bihar Assembly Election 2025