पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति को नई धार दे दी है। राज्य में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होना है, जबकि 4 मई को नतीजे सामने आएंगे।

West Bengal Assembly Elections 2026 : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले भाजपा ने अपनी चुनावी रणनीति को नई धार दे दी है। राज्य में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होना है, जबकि 4 मई को नतीजे सामने आएंगे। ऐसे में चुनावी सरगर्मियों के बीच भाजपा और केंद्र सरकार का फोकस अब साफ तौर पर महिला मतदाताओं पर दिखाई दे रहा है। माना जा रहा है कि बंगाल के बदलते सियासी माहौल में महिलाओं से जुड़े मुद्दों को आगे रखकर पार्टी अपने पक्ष में मजबूत माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। यही वजह है कि चुनाव से ठीक पहले महिला वोटरों तक सीधा संदेश पहुंचाने, उनके बीच संवाद बढ़ाने और उन्हें राजनीतिक रूप से साधने की रणनीति पर तेजी से काम हो रहा है।
केंद्र सरकार ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके बाद 16 अप्रैल से तीन दिन का विशेष संसद सत्र बुलाने की तैयारी है। इस सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक को आगे बढ़ाने की योजना है। भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को महिलाओं के हित से जोड़ते हुए बड़े राजनीतिक संदेश में बदलना चाहती है।
विशेष संसद सत्र शुरू होने से पहले भाजपा महिलाओं तक सीधा संदेश पहुंचाने के लिए देशभर में संपर्क अभियान चलाने की तैयारी कर रही है। पार्टी की कोशिश है कि महिलाओं को बताया जाए कि सरकार उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए किस तरह काम कर रही है। इस अभियान के जरिए भाजपा महिला वोटरों के बीच भरोसा मजबूत करना चाहती है और यह संदेश देना चाहती है कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना उसकी प्राथमिकता में शामिल है।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन इस अभियान की तैयारियों को लेकर लगातार सक्रिय बताए जा रहे हैं। उन्होंने पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की है। इसके अलावा दूसरे राज्यों के नेताओं से भी बातचीत की गई है। इन बैठकों में यह चर्चा हुई कि महिला आरक्षण के मुद्दे को किस तरह व्यापक स्तर पर महिलाओं तक पहुंचाया जाए और इसे जनसंपर्क का बड़ा आधार बनाया जाए। इससे पहले भी नितिन नबीन ने महिला नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों के साथ कई दौर की बातचीत की थी। इन बैठकों में अभियान को ज्यादा प्रभावी बनाने के तरीकों पर मंथन हुआ। इसमें रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया राहतकर, सांसद कमलजीत सहरावत, भाजपा दिल्ली अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और संगठन महामंत्री बीएल संतोष समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे। इससे साफ है कि भाजपा इस मुद्दे को लेकर संगठनात्मक स्तर पर पूरी तैयारी में लगी हुई है।
खबर है कि 13 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिला कार्यकर्ताओं को संबोधित कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इस संवाद में वे महिला आरक्षण को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार के प्रयासों की जानकारी देंगे। पार्टी इस कार्यक्रम को महिला वर्ग के साथ सीधा जुड़ाव बनाने के मौके के रूप में देख रही है। यह संवाद राजनीतिक संदेश के साथ-साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाने की कोशिश भी माना जा रहा है।
भाजपा सिर्फ पारंपरिक राजनीतिक दायरे तक सीमित नहीं रहना चाहती। पार्टी महिला उद्यमियों और सोशल मीडिया पर प्रभाव रखने वाली महिला इन्फ्लुएंसर्स को भी इस अभियान से जोड़ने की कोशिश कर रही है। इसका मकसद है कि पार्टी का संदेश अलग-अलग वर्गों तक तेजी से पहुंचे और महिलाओं के बीच इसका असर बढ़े। स्थानीय निकायों की महिला प्रतिनिधियों को भी इस अभियान का हिस्सा बनाने की योजना बनाई जा रही है।
तीन दिन के विशेष संसद सत्र के दौरान कई महिला हस्तियों को विजिटर गैलरी में आमंत्रित करने की भी तैयारी है। इससे भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि महिलाओं से जुड़े इस बड़े फैसले को उनके सामने और उनकी भागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। पार्टी इसे प्रतीकात्मक और राजनीतिक दोनों रूप से अहम मान रही है। West Bengal Assembly Elections 2026