यूपी में बीजेपी को बदलनी पड़ी चुनावी रणनीति, ये है सबसे बड़ी वजह
यूपी चुनाव परिणाम
भारत
चेतना मंच
28 Dec 2021 06:30 AM
यूपी में चुनाव (UP Election) से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अपनी चुनावी रणनीति में अचानक बदलाव करने के लिए मजबूर होना पड़ा। राष्ट्रवाद, ध्रुवीकरण, कानून व्यवस्था या विकास के नारे के बजाए मोदी को प्रयागराज में एक खास कार्यक्रम करना पड़ा ताकि, समय रहते रणनीति में बदलाव किया जा सके।
क्या इसके लिए प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) जिम्मेदा हैं? क्या समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के दांव के चलते बीजेपी को ऐसा करना पड़ा या इसकी कोई और वजह है?
ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि, यूपी विधानसभा चुनाव (UP Election) से ठीक पहले सभी राजनीतिक दल अचानक महिलाओं को आकर्षित करने के लिए जोर लगाते दिख रहे हैं।
यूपी में महिला वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए सबसे पहले कांग्रेस (Congress) ने एक बड़ा दांव चला। कांग्रेस महासचिव और यूपी चुनाव प्रभारी प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने महिलाओं को 40% टिकट देने की घोषणा कर विपक्षी पार्टियों को महिलाओं के लिए बात करने को मजबूर कर दिया।
बीजेपी को लगा सबसे बड़ा झटका
कांग्रेस के मास्टर स्ट्रोक से सबसे ज्यादा झटका बीजेपी (BJP) को लगा। माना जाता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत में महिला वोटरों ने महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। इसकी सबसे बड़ी वजह उज्जवला योजना (Ujjwala Yojana) और शौचालयों का निर्माण था। इन योजनाओं के चलते महिलाओं ने जाति, धर्म से ऊपर उठकर बीजेपी के पक्ष में वोट डाला।
2019 के लोकसभा चुनाव के बाद स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने लालकिले से सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना, 'नल से जल' (Nal Se Jal Scheme) की घोषणा की। इस योजना का सबसे ज्यादा लाभ महिलाओं को ही होने वाला है क्योंकि, आज भी देश के ज्यादातर हिस्सों में पीने के पानी के लिए महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विधानसभा चुनाव में बीजेपी को इनसे है खतरा
लोकसभा चुनाव में मोदी ने बड़ी चतुराई से महिला वोटरों को अपने पक्ष में कर लिया था। उनकी यह रणनीति बिहार, बंगाल या उड़ीसा के विधानसभा चुनावों में पार्टी को जीत नहीं दिला पाई।
बिहार में नितीश कुमार (Nitish Kumar) के लगातार चुनाव जीतने की सबसे बड़ी वजह शराब बंदी है। इससे बिहार की महिलाओं को दोहरी राहत मिली है। शराब पीकर मारपीट करने यानी, घरेलू हिंसा में कमी आई है और आमदनी को शराब में खर्च करने पर लगाम लगी है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) द्वारा शुरू की गई कन्याश्री योजना, स्वास्थ्य साथी, रूपश्री प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण जैसी योजनाओं से महिलाओं को सीधा लाभ मिला है। विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिलने के पीछे महिला वोटरों का सबसे बड़ा हाथ माना जाता है।
ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक (Naveen Patnaik) भी महिला केंद्रित योजनाओं के चलते बेहद लोकप्रिय हैं। महिला किसानों के लिए मुफ्त स्मार्टफोन योजना को उनकी जीत की सबसे बड़ी वजह बताया जाता है।
बीजेपी को क्यों बदलनी पड़ी चुनावी रणनीति
यूपी चुनाव में प्रियंका गांधी की महिलाओं को 40% टिकट देने की घोषणा ने बीजेपी (BJP) को अपनी चुनावी रणनीति बदलने के लिए मजबूर कर दिया।
राष्ट्रवाद, ध्रुवीकरण और कानून व्यवस्था को मुद्दा बनाने की बीजेपी की कोशिशों को कांग्रेस के इस दांव से गहरा धक्का लगा है। यही वजह है कि सरकार ने आनन-फानन में लड़कियों की शादी की उम्र में संशोधन कर 21 साल करने का कानून पास किया ताकि, यूपी चुनाव में महिलाओं के पक्ष में कुछ ठोस कदम उठाने का दावा कर सके।
प्रयागराज (Prayagraj) में महिला सशक्तीकरण सम्मेलन का आयोजन और पीएम द्वारा 16 लाख महिलाओ के बैंक खाते में कैश ट्रांसफर इसी दबाव का नतीजा है।
क्यों महिलाएं बनीं चुनावी मुद्दा
महिलाओं के पक्ष में बात करने के लिए राजनीतिक दलों के मजबूर होने की सबसे बड़ी वजह महिलाओं की बढ़ती साक्षरता और जागरुकता है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है कि भारत में जन्म दर 2.1 हो गई है।
यानी, महिलाएं अब केवल बच्चे पैदा करने की मशीन बन कर नहीं रह जाना चाहतीं। महिलाओं में बढ़ती साक्षरता, आर्थिक आत्मनिर्भरता और जागरुकता ने उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग किया है।
वे खुलकर नहीं बोलतीं लेकिन, पति या घरवालों के बजाए अब वे खुद फैसला ले रही हैं और मनमुताबिक वोट डाल रही हैं। यही वजह है कि राजनीतिक दलों को भी चुनावी रणनीति और सरकारी योजनाओं में महिलाओं का ध्यान रखना पड़ रहा है।
एक सकारात्मक बदलाव का संकेत
चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक दलों के द्वारा जाति, धर्म को मुद्दा बनाना और मुफ्त में बिजली, पानी या राशन देने की घोषणा करना आम बात है। सच्चाई यह है कि मुफ्त कुछ भी नहीं होता। सरकारी खजाने में जमा एक-एक पैसा जनता से लिए गए टैक्स का नतीजा है।
हालांकि, जाति, धर्म या मुफ्त की घोषणाओं के बावजूद अगर महिलाओं से जुड़े मुद्दे, कानून व्यवस्था या विकास योजनाएं चुनावी मुद्दा बन रही हैं तो, यह सकारात्मक बदलाव का संकेत है। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव (UP Election) के नतीजों ने राजनीतिक पंडितों सहित नेताओं को भी चौंका दिया था। देखना दिलचस्प होगा कि इस बार यूपी की महिलाएं क्या फैसला देती हैं। याद रखिए कि जनसंख्या की दृष्टि से यूपी, देश का सबसे बड़ा राज्य तो है ही, यह देश की राजनीति की दिशा तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाने वाला राज्य भी है। अगर यहां की महिलाओं ने ठान लिया तो देश में बदलाव आने में वक्त नहीं लगेगा।