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देश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को लोकसभा में करारी हार का सामना करना पड़ा। बहुप्रतीक्षित महिला संशोधन विधेयक सदन में बहुमत हासिल नहीं कर सका और अंततः गिर गया।

Women's Reservation Bill : देश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को लोकसभा में करारी हार का सामना करना पड़ा। बहुप्रतीक्षित महिला संशोधन विधेयक सदन में बहुमत हासिल नहीं कर सका और अंततः गिर गया। इस घटनाक्रम ने न केवल सत्तापक्ष बल्कि पूरे राजनीतिक परिदृश्य को झकझोर कर रख दिया है।
सरकार द्वारा पेश किए गए इस महिला संशोधन विधेयक का उद्देश्य महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना और उन्हें अधिक अधिकार एवं प्रतिनिधित्व देना बताया जा रहा था। हालांकि विपक्षी दलों ने शुरुआत से ही इस विधेयक के कई प्रावधानों पर सवाल खड़े किए थे। उनका आरोप था कि विधेयक में व्यावहारिक खामियां हैं और यह वास्तविक सशक्तिकरण की बजाय राजनीतिक लाभ के लिए लाया गया है।
इस वोटिंग को दोबारा काउंट करने के बाद जो नतीजा सामने आया है उसमें 258 वोट सरकार के पक्ष में तथा 230 वोट सरकार के विरोधी में पड़े इस कारण दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा पूरा नहीं हो पाया दो तिहाई बहुमत न पूरा होने के कारण लोक सभा में सरकार का यह बिल गिर गया है इस बिल के गिरते ही इस मामले में सरकार को भी बड़ी हार मिली है
विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष एकजुट नजर आया। कई सहयोगी दलों ने भी अंतिम समय में सरकार का साथ छोड़ दिया, जिससे सरकार का आंकड़ा कमजोर पड़ गया। मतदान के दौरान सरकार बहुमत का आंकड़ा पार नहीं कर सकी और विधेयक गिर गया। सूत्रों के अनुसार, कुछ सांसदों की अनुपस्थिति और सहयोगी दलों की नाराजगी इस हार का बड़ा कारण बनी।
विपक्षी दलों ने इस हार को सरकार की नीतिगत विफलता करार दिया है। उनका कहना है कि सरकार बिना पर्याप्त तैयारी और सहमति के इतने महत्वपूर्ण विधेयक को लेकर आई, जिसका परिणाम अब सामने है। विपक्ष ने इसे “लोकतंत्र की जीत” बताते हुए कहा कि सरकार को जनता और प्रतिनिधियों की आवाज सुननी होगी।
वहीं सरकार की ओर से कहा गया है कि वह महिला सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में व्यापक चर्चा के बाद संशोधित रूप में विधेयक दोबारा लाया जा सकता है। सरकार के प्रवक्ताओं ने इसे “संख्यात्मक स्थिति” का परिणाम बताते हुए कहा कि मुद्दे पर उनका रुख स्पष्ट और मजबूत है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह हार आने वाले समय में केंद्र सरकार की रणनीति और गठबंधन की राजनीति पर असर डाल सकती है। साथ ही विपक्ष को भी एक बड़ा मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल गई है, जिससे संसद के आगामी सत्रों में टकराव और तेज हो सकता है।
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