गधा अब मूर्खता का प्रतीक नहीं, गधे पालने पर मिलेंगे 50 लाख रूपए
जल्दी ही गधा मूर्खता के प्रतीक से अलग हो जाएगा। भारत सरकार ने गधा पालने की एक बड़ी योजना घोषित की है। भारत सरकार की इस घोषणा में कहा गया है कि गधे पालने वाले व्यक्ति या संस्था को भारत सरकार 50ा लाख रूपए देगी।

Donkey Breeding : गधा शब्द हमेशा से मूर्खता का प्रतीक रहा है। किसी भी व्यक्ति को गधा कहने का अर्थ यह होता है कि वह व्यक्ति मूर्ख है। जल्दी ही गधा मूर्खता के प्रतीक से अलग हो जाएगा। भारत सरकार ने गधा पालने की एक बड़ी योजना घोषित की है। भारत सरकार की इस घोषणा में कहा गया है कि गधे पालने वाले व्यक्ति या संस्था को भारत सरकार 50ा लाख रूपए देगी।
भारत में तेजी से कम हो रहे हैं गधे
भारत में गधे बहुत तेजी से कम हो रहे हैं। गधों की प्रजाति का संरक्षण करने के मकसद से भारत सरकार ने गधे पालने की योजना घोषित की है। सरकारी आंकड़ों (2019 की 20वीं पशुगणना) के मुताबिक, देश में कुल 1.23 लाख (लगभग 1.2 लाख) गधे बचे हैं। 2012 से अब तक गधों की संख्या में करीब 60 फीसदी की कमी आ चुकी है. इसी कमी को पूरा करने के लिए केन्द्र सरकार गधा पालन को बढ़ावा दे रही है। दरअसल, गधे अब पहले जैसे काम (बोझ ढोना, ईंट-रेत ढोना) में कम इस्तेमाल हो रहे हैं, इसलिए उनकी संख्या घट रही है। सरकार चाहती है कि इनकी नस्ल बचे और लोग इन्हें पालें। नस्ल संरक्षण के लिए राज्यों सरकारों को भी केंद्र की ओर से मदद दी जाएगी। इसके लिए गधी के दूध से बने प्रोडक्ट का भी खूब प्रचार किया जा रहा है। एक सरकारी संस्थान ने तो गधी के दूध को फूड आइटम में शामिल करने के लिए FSSAI से मांगी है। इतना ही नहीं कुछ वक्त पहले ही सार्वजनिक तौर पर बाबा रामदेव ने गधी का दूध पीकर उसे स्वादिष्ट बताया था। राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) 2014-15 में शुरू हुई थी, लेकिन 2021-22 से इसे और बेहतर बनाया गया. इसका मुख्य उद्देश्य रोजगार पैदा करना, पशु नस्ल सुधारना, मांस, दूध, ऊन और चारे का उत्पादन बढ़ाना है।
गधा, घोड़ा तथा ऊंट पालने की योजना
एनएलएम योजना में अगर कोई व्यीक्ति, एफपीओ, एसएचजी, जेएलजी, एफसीओ और धारा 8 की कंपनी एनएलएम के तहत गधे-घोड़े और ऊंट पालन के लिए आवेदन करता है तो उसे स्कीम के तहत कुल लागत की 50 फीसद सब्सिडी का फायदा दिया जाएगा। सब्सिडी की ये रकम 50 लाख रुपये तक होगी। मतलब अगर आपका प्लान एक करोड़ रुपये का है तो केंद्र सरकार उसमें 50 लाख रुपये की मदद देगी। इतना ही नहीं अगर कोई राज्य सरकार गधे-घोड़े और ऊंट की नस्ल संरक्षण के लिए काम करती है तो केंद्र सरकार उसे भी मदद देगी. जैसे अगर कोई राज्य सरकार गधे-घोड़े और ऊंट संरक्षण के लिए वीर्य स्टेशन और न्यूक्लियस प्रजनन फार्म की स्थापना करना चाहती है तो उसे केन्द्र की ओर से 10 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इस योजना के तहत गधे पालने के लिए 50 मादा तथा 5 नर गधे पालने जरूरी होंगे। इस काम के लिए 50 लाख तक (50% कैपिटल सब्सिडी) सब्सिडी दी जाएगी। यह सब्सिडी सिर्फ स्वदेशी नस्लों के लिए (विदेशी नस्ल नहीं) दी जाएगी। सब्सिडी दो किस्तों में मिलती है:पहले बैंक लोन मिलने पर, फिर प्रोजेक्ट पूरा होने पर। इस योजना का लाभ लेने के लिए आधिकारिक वेबसाइट nlm.udyamimitra.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। बैंक से लोन लेकर प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं. सरकार की ओर से सब्सिडी सीधे मिलेगी। Donkey Breeding
Donkey Breeding : गधा शब्द हमेशा से मूर्खता का प्रतीक रहा है। किसी भी व्यक्ति को गधा कहने का अर्थ यह होता है कि वह व्यक्ति मूर्ख है। जल्दी ही गधा मूर्खता के प्रतीक से अलग हो जाएगा। भारत सरकार ने गधा पालने की एक बड़ी योजना घोषित की है। भारत सरकार की इस घोषणा में कहा गया है कि गधे पालने वाले व्यक्ति या संस्था को भारत सरकार 50ा लाख रूपए देगी।
भारत में तेजी से कम हो रहे हैं गधे
भारत में गधे बहुत तेजी से कम हो रहे हैं। गधों की प्रजाति का संरक्षण करने के मकसद से भारत सरकार ने गधे पालने की योजना घोषित की है। सरकारी आंकड़ों (2019 की 20वीं पशुगणना) के मुताबिक, देश में कुल 1.23 लाख (लगभग 1.2 लाख) गधे बचे हैं। 2012 से अब तक गधों की संख्या में करीब 60 फीसदी की कमी आ चुकी है. इसी कमी को पूरा करने के लिए केन्द्र सरकार गधा पालन को बढ़ावा दे रही है। दरअसल, गधे अब पहले जैसे काम (बोझ ढोना, ईंट-रेत ढोना) में कम इस्तेमाल हो रहे हैं, इसलिए उनकी संख्या घट रही है। सरकार चाहती है कि इनकी नस्ल बचे और लोग इन्हें पालें। नस्ल संरक्षण के लिए राज्यों सरकारों को भी केंद्र की ओर से मदद दी जाएगी। इसके लिए गधी के दूध से बने प्रोडक्ट का भी खूब प्रचार किया जा रहा है। एक सरकारी संस्थान ने तो गधी के दूध को फूड आइटम में शामिल करने के लिए FSSAI से मांगी है। इतना ही नहीं कुछ वक्त पहले ही सार्वजनिक तौर पर बाबा रामदेव ने गधी का दूध पीकर उसे स्वादिष्ट बताया था। राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) 2014-15 में शुरू हुई थी, लेकिन 2021-22 से इसे और बेहतर बनाया गया. इसका मुख्य उद्देश्य रोजगार पैदा करना, पशु नस्ल सुधारना, मांस, दूध, ऊन और चारे का उत्पादन बढ़ाना है।
गधा, घोड़ा तथा ऊंट पालने की योजना
एनएलएम योजना में अगर कोई व्यीक्ति, एफपीओ, एसएचजी, जेएलजी, एफसीओ और धारा 8 की कंपनी एनएलएम के तहत गधे-घोड़े और ऊंट पालन के लिए आवेदन करता है तो उसे स्कीम के तहत कुल लागत की 50 फीसद सब्सिडी का फायदा दिया जाएगा। सब्सिडी की ये रकम 50 लाख रुपये तक होगी। मतलब अगर आपका प्लान एक करोड़ रुपये का है तो केंद्र सरकार उसमें 50 लाख रुपये की मदद देगी। इतना ही नहीं अगर कोई राज्य सरकार गधे-घोड़े और ऊंट की नस्ल संरक्षण के लिए काम करती है तो केंद्र सरकार उसे भी मदद देगी. जैसे अगर कोई राज्य सरकार गधे-घोड़े और ऊंट संरक्षण के लिए वीर्य स्टेशन और न्यूक्लियस प्रजनन फार्म की स्थापना करना चाहती है तो उसे केन्द्र की ओर से 10 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इस योजना के तहत गधे पालने के लिए 50 मादा तथा 5 नर गधे पालने जरूरी होंगे। इस काम के लिए 50 लाख तक (50% कैपिटल सब्सिडी) सब्सिडी दी जाएगी। यह सब्सिडी सिर्फ स्वदेशी नस्लों के लिए (विदेशी नस्ल नहीं) दी जाएगी। सब्सिडी दो किस्तों में मिलती है:पहले बैंक लोन मिलने पर, फिर प्रोजेक्ट पूरा होने पर। इस योजना का लाभ लेने के लिए आधिकारिक वेबसाइट nlm.udyamimitra.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। बैंक से लोन लेकर प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं. सरकार की ओर से सब्सिडी सीधे मिलेगी। Donkey Breeding












