गधा अब मूर्खता का प्रतीक नहीं, गधे पालने पर मिलेंगे 50 लाख रूपए

जल्दी ही गधा मूर्खता के प्रतीक से अलग हो जाएगा। भारत सरकार ने गधा पालने की एक बड़ी योजना घोषित की है। भारत सरकार की इस घोषणा में कहा गया है कि गधे पालने वाले व्यक्ति या संस्था को भारत सरकार 50ा लाख रूपए देगी।

गधा पालन में निवेश का मौका
गधा पालन में निवेश का मौका
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar03 Mar 2026 03:16 PM
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Donkey Breeding : गधा शब्द हमेशा से मूर्खता का प्रतीक रहा है। किसी भी व्यक्ति को गधा कहने का अर्थ यह होता है कि वह व्यक्ति मूर्ख है। जल्दी ही गधा मूर्खता के प्रतीक से अलग हो जाएगा। भारत सरकार ने गधा पालने की एक बड़ी योजना घोषित की है। भारत सरकार की इस घोषणा में कहा गया है कि गधे पालने वाले व्यक्ति या संस्था को भारत सरकार 50ा लाख रूपए देगी।

भारत में तेजी से कम हो रहे हैं गधे

भारत में गधे बहुत तेजी से कम हो रहे हैं। गधों की प्रजाति का संरक्षण करने के मकसद से भारत सरकार ने गधे पालने की योजना घोषित की है। सरकारी आंकड़ों (2019 की 20वीं पशुगणना) के मुताबिक, देश में कुल 1.23 लाख (लगभग 1.2 लाख) गधे बचे हैं। 2012 से अब तक गधों की संख्या में करीब 60 फीसदी की कमी आ चुकी है. इसी कमी को पूरा करने के लिए केन्द्र सरकार गधा पालन को बढ़ावा दे रही है। दरअसल, गधे अब पहले जैसे काम (बोझ ढोना, ईंट-रेत ढोना) में कम इस्तेमाल हो रहे हैं, इसलिए उनकी संख्या घट रही है। सरकार चाहती है कि इनकी नस्ल बचे और लोग इन्हें पालें। नस्ल संरक्षण के लिए राज्यों सरकारों को भी केंद्र की ओर से मदद दी जाएगी। इसके लिए गधी के दूध से बने प्रोडक्ट का भी खूब प्रचार किया जा रहा है। एक सरकारी संस्थान ने तो गधी के दूध को फूड आइटम में शामिल करने के लिए FSSAI से मांगी है। इतना ही नहीं कुछ वक्त पहले ही सार्वजनिक तौर पर बाबा रामदेव ने गधी का दूध पीकर उसे स्वादिष्ट बताया था। राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) 2014-15 में शुरू हुई थी, लेकिन 2021-22 से इसे और बेहतर बनाया गया. इसका मुख्य उद्देश्य रोजगार पैदा करना, पशु नस्ल सुधारना, मांस, दूध, ऊन और चारे का उत्पादन बढ़ाना है।

गधा, घोड़ा तथा ऊंट पालने की योजना

 एनएलएम योजना में अगर कोई व्यीक्ति, एफपीओ, एसएचजी, जेएलजी, एफसीओ और धारा 8 की कंपनी एनएलएम के तहत गधे-घोड़े और ऊंट पालन के लिए आवेदन करता है तो उसे स्कीम के तहत कुल लागत की 50 फीसद सब्सिडी का फायदा दिया जाएगा। सब्सिडी की ये रकम 50 लाख रुपये तक होगी। मतलब अगर आपका प्लान एक करोड़ रुपये का है तो केंद्र सरकार उसमें 50 लाख रुपये की मदद देगी। इतना ही नहीं अगर कोई राज्य सरकार गधे-घोड़े और ऊंट की नस्ल संरक्षण के लिए काम करती है तो केंद्र सरकार उसे भी मदद देगी. जैसे अगर कोई राज्य सरकार गधे-घोड़े और ऊंट संरक्षण के लिए वीर्य स्टेशन और न्यूक्लियस प्रजनन फार्म की स्थापना करना चाहती है तो उसे केन्द्र की ओर से 10 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इस योजना के तहत गधे पालने के लिए 50 मादा तथा 5 नर गधे पालने जरूरी होंगे। इस काम के लिए 50 लाख तक (50% कैपिटल सब्सिडी) सब्सिडी दी जाएगी। यह सब्सिडी सिर्फ स्वदेशी नस्लों के लिए (विदेशी नस्ल नहीं) दी जाएगी। सब्सिडी दो किस्तों में मिलती है:पहले बैंक लोन मिलने पर, फिर प्रोजेक्ट पूरा होने पर। इस योजना का लाभ लेने के लिए आधिकारिक वेबसाइट nlm.udyamimitra.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। बैंक से लोन लेकर प्रोजेक्ट शुरू कर सकते हैं. सरकार की ओर से सब्सिडी सीधे मिलेगी। Donkey Breeding



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जाट, राजपूत तथा सिख सैनिक लगाए जाते हैं खास काम पर

इस सबके बीच एक बहुत बड़ी व्यवस्था यह है कि भारत के राष्ट्रपति की सुरक्षा के बड़ा काम में केवल जाट, राजपूत तथा सिख समाज से आने वाले सैनिक ही तैनात किए जाते हैं। भारत के राष्ट्रपति की सुरक्षा में तैनात किए जाने वाले सैनिकों की तैनाती भारत की सबसे पुरानी तथा वरिष्ठ रेजिमेंट से की जाती है।

PBG की गौरवशाली यात्रा
PBG की गौरवशाली यात्रा
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar03 Mar 2026 01:14 PM
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President’s Bodyguard PBG : भारतीय सेना का इतिहास बेहद गौरवशाली इतिहास है। भारत की सेना में प्रत्येक जाति तथा धर्म के सैनिक भर्ती किए जाते हैं। इस सबके बीच एक बहुत बड़ी व्यवस्था यह है कि भारत के राष्ट्रपति की सुरक्षा के बड़ा काम में केवल जाट, राजपूत तथा सिख समाज से आने वाले सैनिक ही तैनात किए जाते हैं। भारत के राष्ट्रपति की सुरक्षा में तैनात किए जाने वाले सैनिकों की तैनाती भारत की सबसे पुरानी तथा वरिष्ठ रेजिमेंट से की जाती है। राष्ट्रपति की सुरक्षा में तैनात रहने वाली रेजिमेंट का नाम प्रेसिडेंटस बॉडीगार्ड (PBG) है।

राष्ट्रपति की सुरक्षा में केवल जाट, राजपूत तथा सिख सैनिक

राष्ट्रपति की सुरक्षा में सेना के होनहार टूपर्स को तैनात किया जाता है। राष्ट्रपति की सुरक्षा में तैनात रहने वाले पीबीजी (PBG) गार्ड की विशेषता यह है कि इसके ट्रूपर्स केवल तीन समुदायों हिंदू जाट, हिंदू राजपूत और जाट सिख से लिए जाते हैं और तीनों का अनुपात लगभग 33.3% रखा जाता है. हालांकि यह प्रतिबंध सिर्फ ट्रूपर्स पर लागू होता है. यूनिट के अफसर, क्लर्क और अन्य स्टाफ देश के किसी भी समुदाय से हो सकते हैं. सेना का कहना है कि यह व्यवस्था परंपरा और कार्यात्मक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। यह बहुत पुरानी परम्परा है जो लगातार जारी रखी जा रही है। 

वर्ष 1773 से शुरू हुई थी इस यूनिट की शुरूआत 

इस खास यूनिट की शुरुआत 1773 में बनारस (अब वाराणसी) में हुई थी, जब उस समय के गवर्नर वॉरेन हेस्टिंग्स ने 50 चुने हुए घुड़सवारों के साथ इसे खड़ा किया। बाद में राजा चेत सिंह ने भी 50 घुड़सवार जोड़ दिए और संख्या बढ़ती गई। आजादी से पहले इस यूनिट में पंजाबी मुस्लिम, सिख और राजपूत शामिल थे। लेकिन 1947 के बंटवारे के बाद मुस्लिम सैनिक पाकिस्तान चले गए, जिससे खाली पद जाटों से भरे गए। इसी के बाद मौजूदा तीन-समुदाय वाला ढांचा स्थिर हो गया। पुरानी रेजिमेंट की परंपरा और एकजुटता बनाए रखने के लिए इसे जारी रखा गया।

अदालत में भी जा चुका है मामला

जाट, राजपूत तथा सिख जाट की तैनाती का यह मामला अदालत में भी जा चुका है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह संविधान के समानता अधिकार (अनुच्छेद 14, 15, 16) के खिलाफ है। लेकिन सेना ने कोर्ट में दलील दी कि PBG एक छोटी और विशेष यूनिट है, जहां सेरेमोनियल ड्यूटी के लिए बिल्कुल एक जैसी लंबाई, कद-काठी और व्यक्तित्व जरूरी होता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि रेजिमेंटल सिस्टम अपने आप में असंवैधानिक नहीं है और इसका सैन्य उद्देश्य हो सकता है। सेना का कहना है कि यह व्यवस्था भेदभाव नहीं बल्कि “फंक्शनल जरूरत” और परंपरा पर आधारित है।

असली युद्ध में भी माहिर होते हैं 

अक्सर लोग PBG को सिर्फ परेड और एस्कॉर्ट तक सीमित समझते हैं, लेकिन हकीकत इससे कहीं अलग है। इस यूनिट का हर ट्रूपर प्रशिक्षित पैराट्रूपर होता है और एयरबोर्न ऑपरेशन के लिए तैयार रहता है। ये सैनिक टैंक और बख्तरबंद गाड़ियां चलाने में भी माहिर होते हैं। PBG के जवान सियाचिन ग्लेशियर जैसे दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र में तैनात रह चुके हैं। इसके अलावा श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (IPKF) और संयुक्त राष्ट्र मिशनों में भी इनकी तैनाती हो चुकी है। यानी यह यूनिट परंपरा और ताकत दोनों का अनोखा संगम है। President’s Bodyguard PBG selection criteria

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घर पर पपीता उगाने का सबसे आसान तरीका, जानें पूरी गाइड

पपीता मूल रूप से गर्म मौसम का पौधा है। इसे लगाने के लिए सबसे उपयुक्त समय फरवरी से अप्रैल या फिर जून से जुलाई के बीच का माना जाता है। तेज ठंड में इसकी वृद्धि रुक सकती है, इसलिए ऐसे मौसम का चुनाव करें जहाँ पर्याप्त धूप मिलती हो।

Grow Papaya at Home
सेहत का खजाना है पपीता (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar03 Mar 2026 01:46 PM
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Grow Papaya at Home: क्या आप भी बाजार में मिलने वाले केमिकलयुक्त फलों से परेशान हैं और घर पर ताजे और जैविक फल खाने का सपना देखते हैं? अगर हाँ, तो पपीता आपके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प हो सकता है। आम धारणा के विपरीत, पपीते का पौधा लगाने के लिए आपको बहुत बड़े बगीचे या खेत की जरूरत नहीं होती। बस आपके पास छत, बालकनी या छोटा सा आंगन हो, तो आप आसानी से इसे उगा सकते हैं।

आइए जानते हैं कि कैसे सही देखभाल और आसान तरीकों से आप कुछ ही महीनों में अपने घर पर पपीते का पौधा फलदार बना सकते हैं।

मौसम का रखें ध्यान

पपीता मूल रूप से गर्म मौसम का पौधा है। इसे लगाने के लिए सबसे उपयुक्त समय फरवरी से अप्रैल या फिर जून से जुलाई के बीच का माना जाता है। तेज ठंड में इसकी वृद्धि रुक सकती है, इसलिए ऐसे मौसम का चुनाव करें जहाँ पर्याप्त धूप मिलती हो।

बीज से पौधा तैयार करना है बेहद आसान

पपीता लगाने का सबसे सस्ता और आसान तरीका बीज का उपयोग है।

  • बीज की तैयारी: किसी पके हुए पपीते से बीज निकालें और उन्हें साफ पानी से धोकर एक दिन छांव में सुखा लें।
  • मिट्टी का चयन: पौधे के लिए ढीली और उपजाऊ मिट्टी का होना जरूरी है। अगर आप गमले में लगा रहे हैं, तो कम से कम 15 से 20 इंच गहरा गमला चुनें। मिट्टी में गोबर की खाद और थोड़ी रेत मिलाकर उसे पोषणयुक्त बनाएं।
  • रोपण: सूखे बीज को एक से डेढ़ इंच गहराई तक मिट्टी में दबाएं और हल्का पानी दें।

धूप और पानी का संतुलन है अहम

पपीते के पौधे को तेजी से बढ़ने के लिए रोजाना 6 से 8 घंटे की सीधी धूप चाहिए। पानी के मामले में सावधानी बरतना जरूरी है; ज्यादा पानी देने से जड़ें सड़ सकती हैं। गर्मियों में रोज थोड़ा-थोड़ा पानी दें, जबकि सर्दियों में मिट्टी की नमी देखकर ही सिंचाई करें।

कुछ ही महीनों में मिलेगा फल

सही देखभाल करने पर पपीते का पौधा 6 से 8 महीने में फल देना शुरू कर देता है। पौधे को स्वस्थ रखने के लिए खरपतवार साफ रखें और महीने में एक बार जैविक खाद का इस्तेमाल करें।

कीड़ों से ऐसे करें बचाव

पौधे पर कीड़े लगना आम है, लेकिन केमिकल दवाओं से बचें। इसके बजाय नीम के पानी या हल्के जैविक घोल का छिड़काव करें। पौधे को हवादार जगह पर रखने से भी कीड़े कम लगते हैं। घर पर उगाया गया पपीता न केवल ताजा होता है, बल्कि यह आपके स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद साबित होता है। तो देर किस बात की, अभी से शुरू करें अपना खुद का 'किचन गार्डन'। Grow Papaya at Home