भारतीय राजनीति में आज जिस पार्टी का सबसे अधिक प्रभाव दिखाई देता है, वह है भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)। 6 अप्रैल 1980 को स्थापित हुई यह पार्टी अब 46 साल की हो चुकी है।

Bharatiya Janata Party : भारतीय राजनीति में आज जिस पार्टी का सबसे अधिक प्रभाव दिखाई देता है, वह है भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)। 6 अप्रैल 1980 को स्थापित हुई यह पार्टी अब 46 साल की हो चुकी है। एक छोटे से राजनीतिक प्रयोग के रूप में शुरू हुई भाजपा आज दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करती है। करोड़ों कार्यकर्ताओं, मजबूत संगठन और वैचारिक आधार के बल पर भाजपा ने भारतीय राजनीति में एक अलग पहचान बनाई है। भाजपा का इतिहास केवल चुनावी जीत का इतिहास नहीं है, बल्कि यह विचारधारा, संघर्ष, संगठन और नेतृत्व के उतार-चढ़ाव की कहानी भी है।
भाजपा की जड़ें 1951 में स्थापित भारतीय जनसंघ से जुड़ी हैं, जिसकी स्थापना श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी। जनसंघ का उद्देश्य राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक पहचान और मजबूत शासन व्यवस्था को स्थापित करना था। 1975 में देश में लगे आपातकाल (भारत, 1975–1977) के दौरान विपक्षी दलों ने एकजुट होकर संघर्ष किया। इसके बाद 1977 में कई पार्टियों को मिलाकर जनता पार्टी का गठन हुआ और कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया गया। हालांकि वैचारिक मतभेदों के कारण जनता पार्टी ज्यादा समय तक एकजुट नहीं रह सकी। अंततः 6 अप्रैल 1980 को अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और उनके साथियों ने नई पार्टी के रूप में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना की।
भाजपा के संस्थापक नेताओं में कई प्रमुख नाम शामिल थे। इनमें अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, भैरों सिंह शेखावत, नानाजी देशमुख और सिकंदर बख्त शामिल थे। इनमें सबसे रोचक तथ्य यह है कि संस्थापक सदस्यों में सिकंदर बख्त मुस्लिम समुदाय से आते थे। बाद में वे भाजपा के वरिष्ठ नेता बने और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे। यह तथ्य बताता है कि पार्टी की स्थापना के समय ही विविध सामाजिक पृष्ठभूमि के नेताओं को साथ लाने की कोशिश की गई थी।
भाजपा का चुनाव चिन्ह “कमल का फूल” है, जो भारतीय संस्कृति में पवित्रता, ऊर्जा और पुनर्जन्म का प्रतीक माना जाता है।
जब भाजपा का गठन हुआ तब पार्टी को नया चुनाव चिन्ह चाहिए था। उस समय चुनाव आयोग ने “कमल का फूल” चिन्ह आवंटित किया। कमल की खासियत यह है कि वह कीचड़ में खिलकर भी अपनी सुंदरता और पवित्रता बनाए रखता है। पार्टी ने इसे अपने राजनीतिक दर्शन से जोड़ते हुए संदेश दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी स्वच्छ और मजबूत राजनीति संभव है। इसके अलावा कमल भारत के सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीकों में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यही कारण है कि समय के साथ यह चिन्ह भाजपा की पहचान बन गया।
भाजपा की शुरुआत आसान नहीं थी। 1984 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को केवल 2 सीटें ही मिली थीं। यह भाजपा के इतिहास का सबसे कठिन दौर माना जाता है।
लेकिन इसके बाद पार्टी ने धीरे-धीरे अपनी रणनीति और संगठन को मजबूत किया। लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्राओं और वैचारिक आंदोलनों ने पार्टी को नई ऊर्जा दी।
1990 के दशक में भाजपा तेजी से उभरने लगी। 1996 में भाजपा पहली बार केंद्र में सरकार बनाने की स्थिति में पहुंची। हालांकि यह सरकार ज्यादा समय तक नहीं चल सकी। इसके बाद 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा ने गठबंधन सरकार बनाई। यह भाजपा के इतिहास का अहम मोड़ था। वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने कई बड़े फैसले लिए, जिनमें पोखरण-II परमाणु परीक्षण प्रमुख था।
2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत हासिल की और पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र में सरकार बनाई। इसके बाद 2019 के चुनाव में भी पार्टी ने और बड़ी जीत दर्ज की। मोदी युग में भाजपा का संगठन देश के लगभग हर राज्य तक फैल चुका है। पार्टी न केवल राष्ट्रीय राजनीति में बल्कि कई राज्यों की सरकारों में भी प्रमुख भूमिका निभा रही है।
भाजपा आज खुद को दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बताती है। पार्टी का कहना है कि उसके करोड़ों सक्रिय सदस्य हैं। मजबूत संगठन, बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं का नेटवर्क और वैचारिक ढांचा भाजपा की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है।
46 साल का सफर तय करने के बाद भी भाजपा लगातार अपने संगठन को विस्तार दे रही है। डिजिटल सदस्यता अभियान, युवाओं को जोड़ने की रणनीति और नए सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाने के प्रयास जारी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का इतिहास केवल एक पार्टी का इतिहास नहीं है, बल्कि यह भारतीय राजनीति में हुए बड़े बदलावों की कहानी भी है। Bharatiya Janata Party