BRICS समिट 2026 के मेन्यू को लेकर भारत की सियासत गरमा गई है। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में आयोजित गाला डिनर में विदेशी मेहमानों को शाकाहारी भारतीय व्यंजन परोसे गए।

National News : भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया के प्रमुख नेताओं के लिए आयोजित गाला डिनर अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से ज्यादा भारत की घरेलू राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में भारत मंडपम में आयोजित रात्रिभोज में पूरी तरह शाकाहारी भारतीय व्यंजन परोसे जाने के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सवाल खड़े किए। इसके बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कांग्रेस पर खाने के मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। इस पूरे विवाद ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक नई बहस छेड़ दी है कि क्या किसी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मेहमानों के लिए तैयार किए गए भोजन को भारत की विविध खान-पान संस्कृति के प्रतिनिधित्व के नजरिए से देखा जाना चाहिए या फिर इसे केवल भारत की समृद्ध शाकाहारी पाक परंपरा के प्रदर्शन के तौर पर लिया जाना चाहिए? National News
BRICS गाला डिनर में केवल शाकाहारी व्यंजन परोसे जाने के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि 80 प्रतिशत भारतीय मांसाहारी हैं। उन्होंने भारतीय मांसाहारी भोजन को स्वादिष्ट बताते हुए अपनी बहन के बनाए छोले-भटूरे का भी जिक्र किया। राहुल गांधी की इस टिप्पणी को कांग्रेस की ओर से BRICS डिनर के मेन्यू पर अप्रत्यक्ष सवाल के तौर पर देखा गया। कांग्रेस की ओर से यह तर्क भी सामने आया कि भारत की खान-पान संस्कृति बेहद विविध है और अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने इस विविधता की पूरी तस्वीर पेश की जानी चाहिए। National News
राहुल गांधी के बयान पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार किया। BJP की ओर से कहा गया कि BRICS जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत ने अपनी समृद्ध और विविध शाकाहारी पाक परंपरा को दुनिया के सामने रखा है। रिजिजू और BJP की ओर से कांग्रेस पर आरोप लगाया गया कि वह मेहमानों को परोसे गए भोजन को भी राजनीतिक विवाद का विषय बना रही है। BJP का कहना है कि भारतीय शाकाहारी भोजन केवल किसी एक वर्ग या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं और खान-पान की विविधता का प्रतिनिधित्व करता है। National News
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारत मंडपम में आयोजित गाला डिनर में मेहमानों को भारत के अलग-अलग हिस्सों की पाक परंपराओं से जुड़े कई व्यंजन परोसे गए। मेन्यू की शुरुआत खंडवी मिले-फुई और खुंब गलौटी से हुई। मुख्य भोजन में पनीर लबाबदार, गुच्छी मार्मिक, कैरेट-बीन पोरियल, थक्काली बेल्ले सारू, मिलेट पुलाव और चुकंदर रायता शामिल थे। मिठाई में ओल्ड दिल्ली फ्रूट क्रीम विद जलेबी और शहतूत फिरनी परोसी गई। इस पूरे मेन्यू में भारत के अलग-अलग क्षेत्रों और पारंपरिक स्वादों को शामिल करने की कोशिश दिखाई दी। National News
BRICS सम्मेलन का उद्देश्य आर्थिक सहयोग, वैश्विक शासन व्यवस्था, व्यापार और ग्लोबल साउथ की भूमिका जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करना था। ऐसे में गाला डिनर का मेन्यू अचानक भारतीय राजनीति का मुद्दा बन जाना अपने आप में चर्चा का विषय है। कांग्रेस का कहना है कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में भोजन की पसंद भी विविध है और अंतरराष्ट्रीय मेहमानों को भारत की पूरी खाद्य संस्कृति से परिचित कराया जाना चाहिए। वहीं BJP का तर्क है कि भारत की शाकाहारी पाक परंपरा भी उतनी ही प्राचीन, समृद्ध और विविध है और विदेशी मेहमानों के सामने उसे प्रस्तुत करना किसी भी तरह से गलत नहीं है। National News
राहुल गांधी की टिप्पणी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई। कुछ लोग इसे भारत की विविध खान-पान संस्कृति से जोड़ रहे हैं, जबकि दूसरे पक्ष का कहना है कि BRICS जैसे वैश्विक सम्मेलन में शाकाहारी भारतीय भोजन की प्रस्तुति भारत की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक व्यंजनों को दुनिया के सामने रखने का अवसर थी। National News
BRICS अब केवल पांच देशों का समूह नहीं रह गया है। इसके विस्तार के बाद इसका वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ा है। भारत की मेजबानी में हुए इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित कई देशों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधि शामिल हुए। ऐसे समय में जब BRICS वैश्विक शासन व्यवस्था में ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहा था, उसी सम्मेलन के डिनर का मेन्यू भारत में राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया। National News
BRICS डिनर का विवाद अब केवल शाकाहारी और मांसाहारी भोजन की पसंद तक सीमित नहीं है। इसके पीछे भारत की विविधता, सांस्कृतिक पहचान और राजनीतिक संदेश को लेकर बहस खड़ी हो गई है। एक पक्ष इसे भारतीय शाकाहारी भोजन की वैश्विक ब्रांडिंग के रूप में देख रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे भारत की खान-पान की विविधता के अधूरे प्रतिनिधित्व से जोड़ रहा है। यही वजह है कि BRICS समिट का डिनर मेन्यू अब केवल मेन्यू नहीं रहा, बल्कि भारत की राजनीति में नया सियासी मुद्दा बन गया है। National News
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