अब धरती रहेगी कूल-कूल, सूरज की गर्माहट का मिल गया तोड़
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 05:31 PM
सूरज की तेज किरणें और बढ़ती गर्मी पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बन चुकी हैं। स्किन कैंसर का खतरा बढ़ता जा रहा है बिजली की खपत बढ़ रही है और जल संकट गहरा रहा है। इसी समस्या का हल निकालने के लिए ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने एक नई योजना बनाई है। उनका दावा है कि इस योजना के जरिए सूरज की गर्मी को अस्थायी तौर पर कम किया जा सकेगा और इससे धरती को ठंडा रखने में मदद मिलेगी। Dim Sun Plan
क्या है वैज्ञानिकों का नया प्लान?
ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए 50 मिलियन पाउंड की योजना बनाई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सूरज की किरणों की गर्मी को धरती तक पहुंचने से रोकना है। इसे जियो-इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट का नाम दिया गया है जो सूर्य के प्रकाश को नियंत्रित करने की एक नई तकनीक पर काम करेगा।
सूरज की गर्मी को कैसे रोका जाएगा?
इस योजना के तहत वैज्ञानिक सूरज की किरणों को धरती तक पहुंचने से रोकने के लिए कुछ अभिनव तकनीकों पर काम कर रहे हैं। एक तरीका यह है कि रिफ्लेक्टिंग पार्टिकल्स वाले बादलों को आसमान में छोड़ा जाएगा, जो सूर्य की किरणों को वापस अंतरिक्ष में भेजने का काम करेंगे। इसके अलावा, सी-वॉटर स्प्रे करने से बादल और अधिक चमकदार हो जाएंगे जिससे धूप का असर कम होगा। साथ ही, वैज्ञानिक सिरस बादलों का भी सहारा लेंगे जो बहुत ऊंचाई पर बनते हैं और हल्के, पतले होते हैं। इन बादलों के जरिए सूरज की तेज किरणों को कमजोर किया जा सकेगा।
क्या धरती सच में ठंडी होगी?
वैज्ञानिकों का दावा है कि यदि यह प्रयोग सफल होता है तो धरती को अस्थायी रूप से ठंडा किया जा सकेगा। इस तरीके को सस्ता माना जा रहा है लेकिन कुछ आलोचक चेतावनी दे रहे हैं कि इससे मौसम के पैटर्न में बड़े बदलाव आ सकते हैं और यहां तक कि फसल उत्पादन वाले क्षेत्रों से बारिश का वितरण भी प्रभावित हो सकता है।
प्रोजेक्ट की फंडिंग और समयसीमा
ब्रिटिश सरकार ने इस प्रयोग के लिए 50 मिलियन पाउंड का बजट तय किया है, लेकिन अगले चार सालों में इस परियोजना पर कुल 800 मिलियन पाउंड खर्च होने की संभावना है। इसका फंडिंग एडवांस रिसर्च एंड इन्वेंशन एजेंसी (ARIA) करेगी।
कौन हैं इस परियोजना के प्रमुख?
इस परियोजना का नेतृत्व कर रहे प्रोफेसर मार्क सिम्स, जो ARIA के कार्यक्रम निदेशक हैं, ने कहा, "हमारी वर्तमान प्रगति जलवायु परिवर्तन के कई खतरों को जन्म दे रही है। इस परियोजना का उद्देश्य यह समझना है कि हम कैसे जलवायु आपदा से बचने के लिए पृथ्वी को सुरक्षित और ठंडा रख सकते हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि, हालांकि इस समस्या का स्थायी हल जीवाश्म ईंधनों का उपयोग कम करने में है, लेकिन यह तुरंत परिणाम देने वाली योजना नहीं हो सकती।
क्या है आगे की योजना?
प्रोफेसर सिम्स ने आश्वस्त किया कि इस परियोजना में किसी भी विषैले पदार्थ का उपयोग नहीं किया जाएगा और हर प्रयोग से पहले पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन किया जाएगा। साथ ही, स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों की राय भी ली जाएगी ताकि इस तकनीकी योजना का पर्यावरण पर नकारात्मक असर न पड़े।