Buddha Purnima : सोमवार 12 मई 2025 को पूरी दुनिया में बुद्ध पूर्णिमा Buddha Purnima का पर्व मनाया जा रहा है। बुद्ध पूर्णिमा Buddha Purnima भगवान गौतम बुद्ध को याद करने का सबसे बड़ा पर्व है। बुद्ध पूर्णिमा Buddha Purnima का पर्व हर साल वैशाख महीने की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। दुनिया में इससे बड़ा कोई संयोग नहीं हो सकता कि भगवान गौतम बुद्ध का जन्म बुद्ध पूर्णिमा के दिन हुआ। बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही भगवान गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ, तथा बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध का परीनिर्माण निधन हुआ था।
बुद्ध अमर थे अमर है तथा अमर रहेंगे
बुद्ध पूर्णिमा Buddha Purnima के अवसर पर बुद्ध के विषय में अनकही बातें जान लेना बहुत ही जरूरी है। भगवान गौतम बुद्ध का नाम पूरे संसार में प्रसिद्ध नाम है। भगवान गौतम बुद्ध अमर थे, अमर हैं तथा अमर ही रहेंगे। भगवान गौतम बुद्ध के जीवन के अनसुने तथा अनकहे किस्से हम आपको बता रहे हैं। लगातार 6 साल की कठोर तपस्या के बाद भगवान गौतम बुद्ध को परम सत्य का ज्ञान प्राप्त हुआ था। परम सत्य का ज्ञान प्राप्त होने से पहले भगवान गौतम बुद्ध का नाम सिद्धार्थ गौतम था। सिद्धार्थ गौतम शाक्य साम्राज्य के युवराज थे। परम सत्य की खोज में उन्होंने अपना राजपाठ त्याग दिया था। बुद्ध पूर्णिमा के दिन बौद्ध गया में बट वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।
भगवान बुद्ध की पहली शिष्या बनी थी देवी सुजाता, दिया था बुद्ध नाम
आपको बता दें कि युवराज सिद्धार्थ का बुद्ध नाम देवी सुजाता ने रखा था। देवी सुजाता वही देवी थीं जिन्होंने कठोर तप के दौरान बेहोश हो गए युवराज सिद्धार्थ को खीर खिलाकर नया जीवन दिया था। पूर्णिमा की जिस रात में सिद्धार्थ को परम सत्य का ज्ञान प्राप्त हुआ था उस रात की सुबह सबसे पहले देवी सुजाता ने ही सिद्धार्थ के अद्भुत रूप तथा स्वरूप के दर्शन किए थे। संन्यासी बन चुके सिद्धार्थ गौतम का अपूर्व रूप तथा स्वरूप देखकर देवी सुजाता ने सबसे पहले उन्हें बुद्ध कहकर पुकारा था। देवी सुजाता के गांव बकरौर के किनारे स्थित एक बरगद के पेड़ के नीचे ही सिद्धार्थ गौतम को परम सत्य का ज्ञान प्राप्त हुआ था। बकरौर गांव आज के बौद्धगया का हिस्सा है। देवी सुजाता ने जिस समय भगवान गौतम बुद्ध का नया नामकरण किया थ उस समय देवी सुजाता के साथ बकरौर गांव की रहने वाली स्वाती, चपलीका, पूर्वा तथा बालगुप्ता भी देवी सुजाता के साथ थे। इन्हीं पांचों को भगवान गौतम बुद्ध ने अपने जीवन का पहला प्रवचन दिया था।
बुद्ध पूर्णिमा पर बुद्ध को जानना जरूरी है
बुद्ध पूणर््िामा के मौके पर भगवान बुद्ध को जान लेना सभी के लिए उपयोगी है। भगवान गौतम बुद्ध 2500 साल पहले हुए थे। पिछले 2500 सालों से भगवान गौतम बुद्ध की दी गई शिक्षा पूरी दुनिया में फैली हुई है। भगवान गौतम बुद्ध की शिक्षा को मानने वाले करोड़ों लोग पृथ्वी के हर कोने पर मौजूद हैं। भगवान गौतम बुद्ध के मानने वालों का स्पष्ट मत है कि दुनिया में पूरी वैज्ञानिकता के साथ आध्यात्मिक ज्ञान देने वाले भगवान गौतम बुद्ध अकेले महापुरुष हुए हैं। बुद्धत्व प्राप्त होने के बाद भगवान गौतम बुद्ध घूम-घूमकर परम ज्ञान तथा परम सत्य का संदेश देते थे। भगवान गौतम बुद्ध भिक्षा ग्रहण करके अपना जीवन यापन करते थे। भिक्षा ग्रहण करने को मिश्राटन कहा जाता है। एक दिन भगवान गौतम बुद्ध एक गांव में मिश्राटन कर रहे थे। तभी एक व्यक्ति ने उनका घनघोर अपमान किया। उस व्यक्ति ने भगवान गौतम बुद्ध को ढोंगी, पाखंडी, झूठा और ना जाने क्या-क्या कहा। इतने अपमानजनक शब्द सुनकर भी भगवान गौतम बुद्ध जरा भी विचलित नहीं हुए। उनके विचलित ना होते देखकर अपमान करने वाले को भी आश्चर्य हुआ। उसने भगवान गौतम बुद्ध से पूछा कि मैं आपका अपमान कर रहा हूं। आपके ऊपर कोई प्रभाव क्यों नहीं पड़ रहा है ? इस भगवान गौतम बुद्ध ने कहा कि यह बताओ कि यदि कोई व्यक्ति किसी को उपहार (गिफ्ट) दे। सामने वाला व्यक्ति उस गिफ्ट को लेने की बजाय कहे कि यह गिफ्ट आप ही रख लो तो वह गिफ्ट किसका हुआ? उस पर वह व्यक्ति बोला कि इस प्रकार तो वह गिफ्ट उस देने वाला का ही हुआ। बुद्ध बोले कि बस इतनी सी ही बात है कि आप मुझे गिफ्ट पर गिफ्ट दे रहे थे किन्तु मैंने आपका वह गिफ्ट (अपमानजनक शब्द) लिया ही नहीं। यह शिक्षा सुनकर वह व्यक्ति भगवान गौतम बुद्ध के चरणों में गिर गया और भगवान गौतम बुद्ध का भिक्षुक बन गया। इस प्रकार एक छोटे से संकेत से भगवान बुद्ध ने बहुत बड़ी शिक्षा दे दी थी।
जब ब्राह्मणों के एक पूरे गांव ने दी भगवान गौतम बुद्ध को गालियां
एक बार भगवान गौतम बुद्ध अपने सैकड़ों भिक्षुकों के साथ गांव दर गांव भ्रमण कर रहे थे। मार्ग में ब्राहमणों का एक गांव पड़ता था। भगवान गौतम बुद्ध के भिक्षुक आनंद ने उनसे कहा कि हमें इस गांव के अंदर से ना जाकर बाहर ही बाहर आगे जाना चाहिए। आनंद जानते थे कि वह गांव भगवान गौतम बुद्ध के घोर विरोधियों का गांव था। भगवान गौतम बुद्ध ने कहा कि हम इस गांव के लोगों को भी ज्ञान का संदेश जरूर देंगे। भगवान गौतम बुद्ध ने जैसे ही ब्राहमणों के उस गांव में प्रवेश किया तो पूरा गांव उनके पीछे एकत्र हो गया। गांव वालों ने भगवान गौतम बुद्ध को गालियां देनी शुरू कर दी। गांव वालों ने उन्हें इतनी गालियां दी कि गिनी भी नहीं जा सकती थीं। भगवान बुद्ध प्रेम पूर्वक आगे बढ़ते रहे। धीरे-धीरे भगवान गौतम बुद्ध उस गांव से बाहर निकल गए। उस गांव की सीमा ठाकुर समाज के एक गांव से मिलती थी। दोनों गांव में आपस में बैर था। बैर भी इतना था कि एक-दूसरे के गांव की सीमा में जाने वाले की हत्या तक कर दी जाती थी। ब्राहमण समाज के लोग भगवान गौतम बुद्ध को अपने ही गांव की सीमा पर घेरकर खड़े हो गए। उन्होंने पूछा कि हमने आपको इतनी गालियां दी हैं किन्तु आपने एक भी गाली का उत्तर नहीं दिया। इस पर भगवान गौतम बुद्ध ने प्रेम पूर्वक उत्तर दिया कि आप लोगों ने मुझे कुछ देने का प्रयास किया किन्तु मैंने आपके दिए हुए को ग्रहण ही नहीं किया। भगवान बुद्ध की इस सहनशीलता तथा क्रोध पर नियंत्रण के कारण उस गांव के सभी नागरिक भगवान गौतम बुद्ध के अनुयाई हो गए तथा उनसे परम शांति का ज्ञान प्राप्त किया।
भगवान गौतम बुद्ध के ऊपर थूक दिया था एक विरोधी ने
भगवान गौतम बुद्ध एक पेड़ के नीचे बैठकर अपने शिष्यों को ज्ञान दे रहे थे। तभी वहां पर उनका एक दुश्मन आया और प्रवचन करते समय ही भगवान गौतम बुद्ध के मुंह पर थूक दिया। भगवान गौतम बुद्ध ने अपने अंगोछे से थूक को साफ किया और दोनों हाथ जोडकर थूकने वाले व्यक्ति से कहा कि क्या आप कुछ और भी कहना चाहते हैं? इस पर भगवान बुद्ध के शिष्य आनंद से नहीं रहा गया। आनंद बोले कि भगवान आप हमें आज्ञा दें तो हम इस व्यक्ति को उचित दंड देना चाहते हैं। इस पर भगवान बुद्ध ने कहा कि आनंद यह व्यक्ति कुछ कहना चाहता था किन्तु इसकी भाषा कमजोर है। इसी कारण इस व्यक्ति ने ऐसा व्यवहार किया है। यह सुनते ही वह व्यक्ति भगवान गौतम बुद्ध के चरणों में लेटकर माफी मांगने लगा। भगवान गौतम बुद्ध ने आनंद से कहा कि देखों उसकी भाषा अभी भी कमजोर है। फिर भगवान गौतम बुद्ध ने उस व्यक्ति को दीक्षा प्रदान की और परम सत्य का ज्ञान व दिया। इसी प्रकार की अनेक घटनाएं भगवान गौतम बुद्ध के जीवन में घटी। इन घटनाओं के बीच भगवान गौतम बुद्ध ने इशारों ही इशारों में बहुत बड़ा ज्ञान पूरी मानवता को दिया था। यहां तक कि उनकी हत्या का प्रयास करने वालों को भी भगवान गौतम बुद्ध ने ज्ञान दिया था।