बजट में शौक पर टैक्स बढ़ा सकती हैं वित्त मंत्री, कहीं होगा खुशी कहीं गम
Budget 2025
भारत
चेतना मंच
29 Jan 2025 07:26 PM
Budget 2025 : बजट 2025 का ऐलान 1 फरवरी 2025 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी। बजट घोषणा से पहले ही लोगों की उम्मीदें बढ़ती जा रही है, सभी अपने अपने हिसाब से बजट के होने का अनुमान लगा रहे हैं। टैक्स के बारे में आपको पता है ही कि आपकी कमाई पर सरकार आपसे टैक्स वसूलती है। आप जो भी सामान खरीदते हैं उसपर भी टैक्स लगता है, लेकिन क्या आपको पता है कि आपके शौक पर भी सरकार टैक्स वसूलती है। सरकार सबसे ज्यादा टैक्स तो आपके शौक पर ही लगाती है और आपके शौक से सरकार मोटी कमाई करती है। नौकरीपेशा वर्ग और खासकर मिडिल क्लास को इनकम टैक्स में राहत की बहुत उम्मीद है तो वहीं शौक पर टैक्स में बदलाव की उम्मीद भी लोगों को है। बजट 2025-26 में शौक पर टैक्स में बढ़ोतरी की आशंका है।
इस बजट में शौक पर टैक्स बढ़ने की उम्मीद
पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में शौक पर टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया था। इसलिए इसबार माना जा रहा है कि शौक पर टैक्स में बढ़ोतरी की जा सकती है। शराब, सिगरेट, तंबाकू जैसे उत्पादों पर लगने वाले टैक्स इस दायरे में आते हैं। वर्तमान में इस पर 28 फीसदी जीएसटी लगता है। पिछली बार कोई बढ़ोत्तरी न होने के कारण माना जा रहा है कि इस बार बजट में इस टैक्स में बढ़ोतरी की जा सकती है। एक्सपर्ट की माने तो चूंकि जीएसटी काउंसिल की बैठकों में शौक पर टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया था, जबकि ग्रुप आॅफ मिनिस्टर्स ने शौक पर टैक्स बढ़ाने की सलाह दी थी। सिगरेट, तंबाकू और एयरेटेड बेवरेजेज जैसे प्रोडक्ट्स पर टैक्स बढ़ सकता है। जीएसटी काउंसिल ने भी लोगों के मनोरंजन पर टैक्स बढ़ाने की मांग को ध्यान में रखते हुए इसके बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।
क्या होता है शौक पर टैक्स
ऐसे प्रोडक्ट्स जो लोगों के स्वास्थ्य और समाज के लिए हानिकारक हैं, उन्हें शौक पर टैक्स कहा जाता है। इसके तहत तम्बाकू, जुआ, शराब, सिगरेट, पान मसाला जैसे उत्पाद इसमें शामिल होते हैं। शौक पर टैक्स का मकसद लोगों को सामाजिक रूप से हानिकारक गतिविधियों में भाग लेने से रोकना होता है। इस टैक्स का मकसद स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों को खरीदना महंगा बनाना होता है, ताकि उनकी खपत को कम किया जा सके। ये टैक्स आमतौर पर पान मसाला, शराब, सिगरेट, काबोर्नेटेड ड्रिंक्स, कोल्ड ड्रिंक्स, महंगे परफ्यूम, इंपोर्टेड सामान और गाड़ियों पर वसूला जाता है। यूं तो इसे लग्जरी आइटम्स पर वसूला जाता है, इसे लोग अक्सर हेल्थ के लिए हानिकारक प्रोडक्ट से जोड़कर देखते हंै।
आपके शौक पर सरकार की मोटी कमाई
आपके शौक पर पर टैक्स लगाकर सरकार मोटी कमाई करती है। शौक पर टैक्स सरकार के लिए मोटी कमाई का माध्यम है। सरकार को ऐसे उत्पादों से अच्छा राजस्व हासिल होता है। देश में जीएसटी की व्यवस्था होने के बाद ऐसे उत्पादों को सबसे हाई टैक्स स्लैब में रखा गया और शौक पर और लग्जरी सामानों के एवज में 15 प्रतिशत तक का अतिरिक्त सेस वसूला गया। हालांकि भारत अकेला देश नहीं है, जहां इस तरह का टैक्स वसूला जाता है। यूके, स्वीडन और कनाडा जैसे देश तंबाकू और शराब से लेकर लॉटरी, जुआ और ईंधन तक कई प्रोडक्ट्स और सर्विसेस पर सिन टैक्स वसूलते हैं। भारत में सिगरेट पर 52.7 फीसदी, बीड़ी पर 22 फीसदी और स्मोकलेस तंबाकू पर 63 फीसदी टैक्स लगता है।
क्यों जरूरी है शौक पर टैक्स
शौक परटैक्स का उद्देश्य स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वस्तुओं को इतना महंगा करना है कि आम उपभोक्ता इसकी आदत छोड़ने पर मजबूर हो जाए। वहीं ऐसे प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियों से अधिक टैक्स हासिल करना है। हालांकि कई बार इसकी आलोचना भी हुई, लेकिन सरकार के लिए ये टैक्स सोने के अंडे देने वाली मुर्गी की तरह है। जो सरकारी खजाने में अधिक फंड लाती है। जब इसपर ज्यादा टैक्स लगाया जाता है तो आम जनता जो इसका उपयोग नहीं करती है वो प्रशन्न होती है, और सरकार को इतना ज्यादा राजस्व प्राप्त होता है कि वो इसे ज्यादा से ज्यादा लगाने में फायदा उठाती है।