कानून से चलेगी व्यवस्था, बुल्डोजर से नहीं : चीफ जस्टिस गवई
भारत
RP Raghuvanshi
28 Nov 2025 07:40 PM
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई ने मॉरीशस में दिए गए सर मौरिस रॉल्ट मेमोरियल लेक्चर 2025 में कहा कि भारतीय गणराज्य कानून के शासन पर चलता है, बुल्डोजर न्याय पर नहीं। उन्होंने बुल्डोजर न्याय की कड़ी निंदा की और याद दिलाया कि सरकार जज, जूरी या जल्लाद की भूमिका नहीं निभा सकती। जस्टिस गवई ने अपने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए बताया कि किसी आरोपी के कथित अपराध के जवाब में उसके घर को तोड़ना कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन है और यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का भी हनन करता है। Bulldozer Justice :
भाषण का प्रमुख बिंदु
* कानून का शासन लोकतंत्र की नींव है, न कि बुल्डोजर या ताकत का शासन।
* राजनीतिक और प्रशासनिक क्षेत्र में कानून का पालन अच्छे शासन और सामाजिक विकास की पहचान है।
* पुराने अन्याय को समाप्त करने और कमजोर समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानून बनाए गए हैं।
गांधी और अंबेडकर का उदाहरण
जस्टिस गवई ने महात्मा गांधी और बी.आर. अंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में कानून केवल नियमों का समूह नहीं है। यह नैतिक और आचरण का ढांचा है, जो समानता, इंसान की गरिमा और समाज में सही शासन सुनिश्चित करता है। लेखनी में मॉरीशस के राष्ट्रपति धरमबीर गोखूल, प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम, और मुख्य न्यायाधीश रेहाना मुंगली गुलबुल मौजूद थे।
कानून का शासन लोकतंत्र की असली ताकत
जस्टिस गवई ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का भी उल्लेख किया, जैसे 1973 का केशवानंद भारती मामला, जिसने संसद की संविधान संशोधन शक्ति को सीमित किया और मूल ढांचे के सिद्धांत को स्थापित किया। जस्टिस गवई के अनुसार, कानून का शासन लोकतंत्र की असली ताकत है, और किसी भी तरह की अवैध या बलपूर्वक कार्रवाई संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।