इस दिवाली मध्य प्रदेश में कार्बाइड गन ने कई लोगों की आंखों की रोशनी छीन ली। बच्चों समेत 30 लोग स्थायी रूप से अंधे हो गए जबकि करीब 300 लोग गंभीर चोटों के कारण अस्पताल में भर्ती हैं। यह हादसा मुख्य रूप से विदिशा जिले में हुआ जहां कार्बाइड गन स्थानीय बाजारों में बड़े पैमाने पर बिक रही थी। कार्बाइड गन एक देसी जुगाड़ है जिसे प्लास्टिक या लोहे के पाइप में कैल्शियम कार्बाइड और पानी मिलाकर बनाया जाता है। इसके रासायनिक प्रतिक्रिया से एसिटिलीन गैस उत्पन्न होती है जो अत्यधिक ज्वलनशील है। छोटी सी चिंगारी या माचिस से यह तुरंत धमाका कर देती है। विस्फोट इतना तेज होता है कि चेहरे और आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और पाइप के छोटे टुकड़े भी आंखों में घुस सकते हैं। Carbide Gun
हादसे के पीछे छिपा है बड़ा कारण
जब बच्चे गन में झांकते हैं या इसे अपने चेहरे के करीब रखते हैं तब रासायनिक प्रतिक्रिया पूरी हो जाती है और अचानक विस्फोट होता है। इसके परिणामस्वरूप एसिटिलीन गैस, गर्म कार्बाइड और प्लास्टिक के टुकड़े सीधे आंखों और चेहरे पर लगते हैं। इससे आंखों की कॉर्निया और कंजंक्टिवा गंभीर रूप से झुलस जाती हैं और कुछ मामलों में स्थायी रूप से रोशनी चली जाती है।
मध्य प्रदेश सरकार ने 18 अक्टूबर को कार्बाइड गन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद इसे बनाने और बेचना जारी रहा, क्योंकि यह पूरी तरह से स्थानीय स्तर पर, घर-गृहस्थी के जुगाड़ से तैयार की जाती है। इसकी कीमत केवल 150-200 रुपये होती है जिससे यह बच्चों और युवाओं के बीच लोकप्रिय हो गई। सोशल मीडिया पर इसके वीडियो वायरल होने के कारण लोग इसे बनाने और खरीदने के लिए आकर्षित हुए।
बता दें कि, पहले कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल फलों को पकाने के लिए किया जाता था, लेकिन अब यह विस्फोटक के रूप में अवैध रूप से इस्तेमाल हो रहा है। सामान्य विस्फोटकों की तरह इस पर कोई लाइसेंस नहीं होता। इस दिवाली धड़ल्ले से इस गन का निर्माण और बिक्री हुई। मध्य प्रदेश सरकार ने इसके चलते सख्ती शुरू कर दी है। अलग-अलग जिलों में छापेमारी की जा रही है, कार्बाइड गन जब्त की जा रही है और दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज की जा रही है। सरकार की जांच यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रतिबंध के बावजूद यह गन बाजार में कैसे पहुंच गई। Carbide Gun