देशभर में बिक रही दवाओं को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिन दवाओं पर लोग बीमारी के दौरान इलाज के लिए भरोसा करते हैं, उनमें से कई के सैंपल सरकारी गुणवत्ता जांच में ही सवालों के घेरे में आ गए हैं।

National News : देशभर में बिक रही दवाओं को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिन दवाओं पर लोग बीमारी के दौरान इलाज के लिए भरोसा करते हैं, उनमें से कई के सैंपल सरकारी गुणवत्ता जांच में ही सवालों के घेरे में आ गए हैं। जांच के नतीजों ने दवा कंपनियों की गुणवत्ता निगरानी और बाजार में पहुंच रही मेडिसिन को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि जांच में सामने आए मामले अलग-अलग राज्यों और दवा निर्माण से जुड़े बड़े केंद्रों तक फैले हुए हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश की 63 और उत्तराखंड की 39 दवाएं शामिल हैं। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित दवा कंपनियों और राज्य औषधि नियंत्रण अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। बड़ी संख्या में दवाओं के गुणवत्ता परीक्षण में फेल होने से दवा निर्माण और बाजार में उपलब्ध दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। National News
CDSCO की ओर से की गई दवाओं की नियमित गुणवत्ता जांच में कुल 221 सैंपल मानकों पर खरे नहीं पाए गए। इनमें 220 सैंपल Not of Standard Quality (NSQ) पाए गए, जबकि एक सैंपल के नकली यानी Spurious होने की जानकारी सामने आई है। इन सैंपलों की जांच देश की अलग-अलग औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में की गई थी। रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित दवा निर्माताओं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। National News
जांच में सबसे अधिक सैंपल हिमाचल प्रदेश से जुड़े पाए गए हैं। प्रदेश की 63 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता परीक्षण में फेल हुए हैं। हिमाचल देश के प्रमुख फार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में दवा निर्माण इकाइयां संचालित होती हैं। सैंपल फेल होने के बाद संबंधित कंपनियों से जवाब मांगा गया है। जिन दवाओं के बैच गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं, उनके संबंध में नियामकीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। National News
हिमाचल के बाद उत्तराखंड की 39 दवाओं के सैंपल भी जांच में मानक के अनुरूप नहीं पाए गए। इसके अलावा देश के अन्य राज्यों में निर्मित दवाओं के सैंपल भी गुणवत्ता परीक्षण में फेल हुए हैं। दवा के सैंपल का NSQ पाया जाना यह दर्शाता है कि संबंधित नमूना निर्धारित गुणवत्ता मानकों या विनिर्देशों को पूरा नहीं कर पाया। National News
फेल हुए सैंपलों में 191 सैंपल राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं की जांच में सामने आए, जबकि 29 सैंपल केंद्रीय प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इन जांचों का उद्देश्य बाजार में उपलब्ध दवाओं की गुणवत्ता की निगरानी करना और यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों तक निर्धारित मानकों के अनुरूप दवाएं ही पहुंचें। National News
जांच में अलग-अलग श्रेणियों की दवाओं के सैंपल गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाए गए हैं। इनमें एंटीबायोटिक, दर्द और बुखार की दवाएं, बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले सीरप, विटामिन उत्पाद, इंजेक्शन और अन्य चिकित्सकीय उत्पाद शामिल बताए गए हैं। कुछ मामलों में दवाओं के कंटेंट, एस्से, डिसॉल्यूशन, स्टेरिलिटी और अन्य गुणवत्ता मानकों से संबंधित कमियां सामने आईं। National News
सैंपल फेल होने के बाद CDSCO और संबंधित राज्य औषधि नियंत्रण विभागों की ओर से दवा निर्माताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। कंपनियों से संबंधित बैच और उत्पाद के संबंध में जवाब मांगा गया है। नियामकीय प्रक्रिया के तहत जरूरत पड़ने पर संबंधित दवा के बैच की बिक्री और वितरण पर रोक लगाने तथा बाजार से उत्पाद वापस लेने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। National News
221 मामलों में 220 दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं, जबकि एक सैंपल नकली (Spurious) पाया गया है। यह मामला सामान्य गुणवत्ता कमी से अलग माना जाता है और ऐसे मामलों में नियामकीय कार्रवाई अधिक गंभीर हो सकती है। दवाओं की गुणवत्ता की नियमित निगरानी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि खराब गुणवत्ता वाली दवा का असर उपचार की प्रभावशीलता पर पड़ सकता है। हालांकि, किसी विशेष दवा के सैंपल के फेल होने का मतलब यह नहीं होता कि उसी नाम की हर दवा खराब है; संबंधित बैच और निर्माता की जानकारी देखना जरूरी होता है। National News
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