Census 2027: सरकार के अनुसार जनगणना के लिए मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा और पहली बार Self-Enumeration यानी खुद जानकारी दर्ज करने की सुविधा भी दी जा रही है। इसी बीच जनगणना से जुड़े सवालों में साक्षरता और डिजिटल साक्षरता से जुड़ा सवाल खास ध्यान खींच रहा है।

भारत की अगली जनगणना कई मायनों में पहले से अलग होने जा रही है। इस बार सिर्फ आबादी की गिनती ही नहीं होगी बल्कि देश की बदलती सामाजिक और आर्थिक तस्वीर को समझने के लिए कई तरह की जानकारियां जुटाई जाएंगी। Census 2027 की प्रक्रिया में तकनीक का इस्तेमाल बड़े स्तर पर किया जा रहा है। सरकार के अनुसार जनगणना के लिए मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाएगा और पहली बार Self-Enumeration यानी खुद जानकारी दर्ज करने की सुविधा भी दी जा रही है। इसी बीच जनगणना से जुड़े सवालों में साक्षरता और डिजिटल साक्षरता से जुड़ा सवाल खास ध्यान खींच रहा है। सवाल है कि व्यक्ति की साक्षरता और डिजिटल साक्षरता की स्थिति क्या है। पहली नजर में यह एक सामान्य सवाल लग सकता है लेकिन आज के डिजिटल दौर में इसका दायरा काफी बड़ा है।
कुछ साल पहले किसी व्यक्ति के पढ़े-लिखे होने का मतलब मुख्य रूप से पढ़ने और लिखने की क्षमता से लगाया जाता था लेकिन अब जिंदगी का बड़ा हिस्सा मोबाइल और इंटरनेट से जुड़ चुका है। बैंकिंग से लेकर सरकारी सेवाओं, पढ़ाई, नौकरी के आवेदन और कई जरूरी कामों तक के लिए डिजिटल साधनों का इस्तेमाल बढ़ा है। ऐसे में सिर्फ यह जानना कि कोई व्यक्ति पढ़ सकता है या लिख सकता है पूरी तस्वीर नहीं बताता। यह भी महत्वपूर्ण है कि वह डिजिटल साधनों तक पहुंच रखता है या नहीं और उनका इस्तेमाल किस स्तर तक कर पाता है। यही वजह है कि साक्षरता के साथ डिजिटल क्षमता को समझने वाला डेटा देश की बदलती जरूरतों की तस्वीर देने में उपयोगी हो सकता है। हालांकि इस खास सवाल को शामिल करने के पीछे सरकार ने कोई अलग विस्तृत कारण बताया है या नहीं इसे आधिकारिक प्रश्नावली और दिशा-निर्देशों के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।
आज एक तरफ शहरों में स्मार्टफोन और इंटरनेट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है तो दूसरी तरफ देश के कई हिस्सों में डिजिटल पहुंच अभी भी एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में अगर लोगों की शिक्षा और डिजिटल पहुंच से जुड़ी जानकारी एक साथ सामने आती है तो इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि देश डिजिटल बदलाव के दौर में किस स्थिति में है। मसलन कोई व्यक्ति पढ़ा-लिखा हो सकता है लेकिन जरूरी नहीं कि वह ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल सरकारी सेवाओं या दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल आसानी से कर पाए। इसी तरह किसी व्यक्ति के पास स्मार्टफोन होना और उसका डिजिटल रूप से सक्षम होना एक ही बात नहीं है। इसलिए साक्षरता और डिजिटल साक्षरता को अलग-अलग समझना आज के समय में ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
जनगणना में साक्षरता और शिक्षा कोई बिल्कुल नया विषय नहीं है। भारत की अलग-अलग जनगणनाओं में समय के साथ शिक्षा और साक्षरता से जुड़े सवाल पूछे जाते रहे हैं। Census of India की आधिकारिक प्रश्नावली के इतिहास में भी साक्षरता और शिक्षा से जुड़े सवालों का उल्लेख मिलता है। यानी शिक्षा से जुड़ी जानकारी जनगणना का लंबे समय से हिस्सा रही है। फर्क यह है कि आज देश की जरूरतें बदल चुकी हैं और डिजिटल तकनीक आम जीवन का अहम हिस्सा बन गई है।
Census 2027 की एक बड़ी खासियत इसका डिजिटल रूप है। सरकार के अनुसार मोबाइल ऐप के जरिए डेटा जुटाया जाएगा जिससे जानकारी को आगे की प्रक्रिया के लिए जल्दी उपलब्ध कराया जा सकेगा। साथ ही Self-Enumeration की सुविधा भी दी जा रही है। यहां एक दिलचस्प पहलू सामने आता है। जिस जनगणना की प्रक्रिया खुद डिजिटल हो रही है उसी दौर में देश के लोगों की डिजिटल स्थिति को समझना भी महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि दोनों चीजों को सीधे जोड़कर यह कहना सही नहीं होगा कि डिजिटल जनगणना की वजह से ही डिजिटल साक्षरता का सवाल रखा गया है।
डिजिटल साक्षरता को समझते समय एक बात का ध्यान रखना जरूरी है। किसी व्यक्ति के पास मोबाइल फोन होना और उसका डिजिटल रूप से सक्षम होना अलग-अलग बातें हैं। उदाहरण के तौर पर कोई व्यक्ति मोबाइल पर कॉल और वीडियो देख सकता है लेकिन जरूरी नहीं कि वह ऑनलाइन फॉर्म भरना, डिजिटल भुगतान करना या किसी सरकारी वेबसाइट पर जरूरी जानकारी ढूंढना भी जानता हो। इसीलिए डिजिटल क्षमता की जानकारी देश में डिजिटल सेवाओं की वास्तविक पहुंच को समझने में मदद कर सकती है। इससे यह भी पता लगाने में मदद मिल सकती है कि तकनीक लोगों की जिंदगी में कितनी जगह बना चुकी है।
डिजिटल तरीके से जानकारी जुटाए जाने के कारण डेटा की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। Census की आधिकारिक Mobile App Privacy Policy के मुताबिक ऐप के जरिए जुटाई गई जानकारी का इस्तेमाल सरकार द्वारा लागू कानून और नियमों के तहत किया जाएगा। इसलिए डिजिटल जनगणना में एक तरफ जानकारी जुटाने की प्रक्रिया आसान और तेज करने की कोशिश है तो दूसरी तरफ डेटा के इस्तेमाल और सुरक्षा के लिए तय नियम भी महत्वपूर्ण रहेंगे।
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