
Amarnath Yatra : जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हालिया आतंकी हमले के बाद अमरनाथ यात्रा को लेकर सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। श्रद्धालुओं में असुरक्षा की भावना स्पष्ट रूप से देखी जा रही है। इसी संदर्भ में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। गृह मंत्रालय की बैठक में शाह ने सुरक्षा बलों को निर्देश दिया कि वे किसी भी प्रकार की चूक न होने दें और यात्रा को पूरी सतर्कता के साथ निर्बाध रूप से सम्पन्न कराएं। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन तीर्थयात्रियों को हर आवश्यक सुविधा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
बैठक के बाद शाह ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, “अमरनाथ तीर्थयात्रा की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी एजेंसियों को पूर्ण सजगता बनाए रखने का निर्देश दिया गया है ताकि पवित्र यात्रा बिना किसी रुकावट के सम्पन्न हो सके।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार तीर्थयात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगी।
इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से आरंभ होकर 9 अगस्त को सम्पन्न होगी। कुल मिलाकर यह यात्रा 38 दिनों तक चलेगी। वर्ष 2024 में यह यात्रा 52 दिनों तक चली थी, लेकिन इस बार यात्रा अवधि को कुछ कम रखा गया है, संभवतः सुरक्षा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने इस बार सुरक्षा के मद्देनज़र केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की 581 कंपनियों को तैनात करने का निर्णय लिया है। इनमें लगभग 42,000 जवान शामिल होंगे। इनमें से 424 कंपनियां सीधे जम्मू-कश्मीर भेजी जाएंगी, जबकि शेष कंपनियों को तीर्थ मार्ग, श्रीनगर और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात किया जाएगा। ये वही कंपनियां हैं जो 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भी कार्यरत थीं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हाल ही में कहा कि 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद इस साल की अमरनाथ यात्रा एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। हालांकि, प्रशासन यात्रा को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। Amarnath Yatra