जाट, राजपूत तथा सिख सैनिक लगाए जाते हैं खास काम पर

इस सबके बीच एक बहुत बड़ी व्यवस्था यह है कि भारत के राष्ट्रपति की सुरक्षा के बड़ा काम में केवल जाट, राजपूत तथा सिख समाज से आने वाले सैनिक ही तैनात किए जाते हैं। भारत के राष्ट्रपति की सुरक्षा में तैनात किए जाने वाले सैनिकों की तैनाती भारत की सबसे पुरानी तथा वरिष्ठ रेजिमेंट से की जाती है।

PBG की गौरवशाली यात्रा
PBG की गौरवशाली यात्रा
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar03 Mar 2026 01:14 PM
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President’s Bodyguard PBG : भारतीय सेना का इतिहास बेहद गौरवशाली इतिहास है। भारत की सेना में प्रत्येक जाति तथा धर्म के सैनिक भर्ती किए जाते हैं। इस सबके बीच एक बहुत बड़ी व्यवस्था यह है कि भारत के राष्ट्रपति की सुरक्षा के बड़ा काम में केवल जाट, राजपूत तथा सिख समाज से आने वाले सैनिक ही तैनात किए जाते हैं। भारत के राष्ट्रपति की सुरक्षा में तैनात किए जाने वाले सैनिकों की तैनाती भारत की सबसे पुरानी तथा वरिष्ठ रेजिमेंट से की जाती है। राष्ट्रपति की सुरक्षा में तैनात रहने वाली रेजिमेंट का नाम प्रेसिडेंटस बॉडीगार्ड (PBG) है।

राष्ट्रपति की सुरक्षा में केवल जाट, राजपूत तथा सिख सैनिक

राष्ट्रपति की सुरक्षा में सेना के होनहार टूपर्स को तैनात किया जाता है। राष्ट्रपति की सुरक्षा में तैनात रहने वाले पीबीजी (PBG) गार्ड की विशेषता यह है कि इसके ट्रूपर्स केवल तीन समुदायों हिंदू जाट, हिंदू राजपूत और जाट सिख से लिए जाते हैं और तीनों का अनुपात लगभग 33.3% रखा जाता है. हालांकि यह प्रतिबंध सिर्फ ट्रूपर्स पर लागू होता है. यूनिट के अफसर, क्लर्क और अन्य स्टाफ देश के किसी भी समुदाय से हो सकते हैं. सेना का कहना है कि यह व्यवस्था परंपरा और कार्यात्मक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। यह बहुत पुरानी परम्परा है जो लगातार जारी रखी जा रही है। 

वर्ष 1773 से शुरू हुई थी इस यूनिट की शुरूआत 

इस खास यूनिट की शुरुआत 1773 में बनारस (अब वाराणसी) में हुई थी, जब उस समय के गवर्नर वॉरेन हेस्टिंग्स ने 50 चुने हुए घुड़सवारों के साथ इसे खड़ा किया। बाद में राजा चेत सिंह ने भी 50 घुड़सवार जोड़ दिए और संख्या बढ़ती गई। आजादी से पहले इस यूनिट में पंजाबी मुस्लिम, सिख और राजपूत शामिल थे। लेकिन 1947 के बंटवारे के बाद मुस्लिम सैनिक पाकिस्तान चले गए, जिससे खाली पद जाटों से भरे गए। इसी के बाद मौजूदा तीन-समुदाय वाला ढांचा स्थिर हो गया। पुरानी रेजिमेंट की परंपरा और एकजुटता बनाए रखने के लिए इसे जारी रखा गया।

अदालत में भी जा चुका है मामला

जाट, राजपूत तथा सिख जाट की तैनाती का यह मामला अदालत में भी जा चुका है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यह संविधान के समानता अधिकार (अनुच्छेद 14, 15, 16) के खिलाफ है। लेकिन सेना ने कोर्ट में दलील दी कि PBG एक छोटी और विशेष यूनिट है, जहां सेरेमोनियल ड्यूटी के लिए बिल्कुल एक जैसी लंबाई, कद-काठी और व्यक्तित्व जरूरी होता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि रेजिमेंटल सिस्टम अपने आप में असंवैधानिक नहीं है और इसका सैन्य उद्देश्य हो सकता है। सेना का कहना है कि यह व्यवस्था भेदभाव नहीं बल्कि “फंक्शनल जरूरत” और परंपरा पर आधारित है।

असली युद्ध में भी माहिर होते हैं 

अक्सर लोग PBG को सिर्फ परेड और एस्कॉर्ट तक सीमित समझते हैं, लेकिन हकीकत इससे कहीं अलग है। इस यूनिट का हर ट्रूपर प्रशिक्षित पैराट्रूपर होता है और एयरबोर्न ऑपरेशन के लिए तैयार रहता है। ये सैनिक टैंक और बख्तरबंद गाड़ियां चलाने में भी माहिर होते हैं। PBG के जवान सियाचिन ग्लेशियर जैसे दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र में तैनात रह चुके हैं। इसके अलावा श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (IPKF) और संयुक्त राष्ट्र मिशनों में भी इनकी तैनाती हो चुकी है। यानी यह यूनिट परंपरा और ताकत दोनों का अनोखा संगम है। President’s Bodyguard PBG selection criteria

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सऊदी अरब में शिया-सुन्नी आबादी का पूरा 'हिसाब-किताब'

अमेरिकी विदेश विभाग के 2023 के आंकड़ों के मुताबिक, सऊदी अरब की कुल आबादी लगभग 32.02 मिलियन (3.2 करोड़) है। इस आबादी का एक बड़ा हिस्सा, लगभग 40 प्रतिशत से ज्यादा, एशिया, अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों के विदेशी निवासियों और मजदूरों का है।

Saudi Arabia Population
सऊदी की धार्मिक पहचान (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar03 Mar 2026 12:35 PM
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Saudi Arabia Population: मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे तनाव ने सऊदी अरब को भी अपनी चपेट में ले लिया है। देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी 'अरामको' की रास तनुरा रिफाइनरी पर हुए ड्रोन हमले के बाद खेलते हुए देखे गए इस तनाव ने सऊदी अरब की आंतरिक स्थिति और वहां की जनसांख्यिकी (Demographics) को लेकर चर्चाएं फिर से तेज कर दी हैं। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने एक ड्रोन को मार गिराने की पुष्टि की है, लेकिन इस घटना के बाद सऊदी अरब में सुन्नी और शिया आबादी का आंकड़ा सामने आया है, जो काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कुल आबादी और विदेशियों का असर

अमेरिकी विदेश विभाग (US Department of State) के 2023 के आंकड़ों के मुताबिक, सऊदी अरब की कुल आबादी लगभग 32.02 मिलियन (3.2 करोड़) है। इस आबादी का एक बड़ा हिस्सा, लगभग 40 प्रतिशत से ज्यादा, एशिया, अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों के विदेशी निवासियों और मजदूरों का है। यही कारण है कि देश की सामाजिक संरचना काफी विविध है। सऊदी सरकार आधिकारिक तौर पर धार्मिक जनगणना के विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक नहीं करती है, लेकिन अनुमानों से स्थिति स्पष्ट होती है।

सुन्नी बहुल देश, वहाबी परंपरा का दबदबा

सऊदी अरब की नागरिक आबादी में सुन्नी मुसलमानों की संख्या सबसे अधिक है। अनुमान के अनुसार, देश की लगभग 85% से 90% आबादी सुन्नी इस्लाम को मानती है। सऊदी शासन इस्लामी कानून के हनबली स्कूल और वहाबी धार्मिक परंपरा पर आधारित है। सऊदी अरब खुद को सुन्नी इस्लाम के दो सबसे पवित्र शहरों—मक्का और मदीना—का संरक्षक मानता है, जिससे इसकी राजनीतिक और धार्मिक साख इस्लामी दुनिया में बहुत ऊंची है।

शिया आबादी: संख्या कम, लेकिन रणनीतिक अहमियत

देश की कुल आबादी में शिया मुसलमानों की हिस्सेदारी 10% से 12% अनुमानित है। हालांकि वे पूरे देश में अल्पसंख्यक हैं, लेकिन उनकी भौगोलिक उपस्थिति बेहद महत्वपूर्ण है। सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत में शिया समुदाय की अच्छी-खासी आबादी है, और यही वह इलाका है जहां देश के अधिकांश तेल भंडार और रिफाइनरियां स्थित हैं।

इसके अलावा:

  • जैदी शिया: यमन सीमा के पास दक्षिणी क्षेत्रों में निवास करते हैं (लगभग 20,000)।
  • इस्माइली शिया: मुख्य रूप से नजरान क्षेत्र में रहते हैं और इनकी संख्या 5 से 7 लाख के बीच है।

तेल अवसंरचना (Oil Infrastructure) पर हाल हुए हमले और शिया बहुल इलाकों का होना सऊदी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, क्योंकि इस क्षेत्र की सुरक्षा किसी भी कीमत पर सुनिश्चित करनी होती है।

सऊदी अरब में शिया समुदाय को ऐतिहासिक रूप से कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। सेना और सुरक्षा सेवाओं में उच्च पदों पर पहुंचना उनके लिए मुश्किल रहा है, जबकि आशुरा जैसे त्योहारों पर भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के नेतृत्व में बदलाव की हवा बह रही है। धार्मिक पुलिस 'हाइया' की शक्तियों को सीमित किया गया है और शिक्षा प्रणाली से भेदभावपूर्ण सामग्री को हटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। Saudi Arabia Population

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अमित शाह की नई योजना से महाराष्ट्र सियासी गर्माहट

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Maharashtra Rajya Sabha Election 2026
अमित शाह के निर्देश पर बदली रणनीति (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar02 Mar 2026 04:00 PM
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Maharashtra Rajya Sabha Election 2026: देशभर में राज्यसभा की 37 सीटों के लिए 16 मार्च को होने वाले चुनाव से पहले महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के मास्टर स्ट्रैटजिस्ट अमित शाह की ओर से मिले नए निर्देश ने राज्य के सत्तारूढ़ गठबंधन 'महायुति' की रणनीति में बदलाव का संकेत दे दिया है। खबर है कि भाजपा अब केवल 6 सीटों पर संतोष करने के बजाय सातवीं सीट पर भी अपना पैर जमाने की तैयारी में है, जिससे महाराष्ट्र में सियासी तापमान बढ़ गया है।

अमित शाह का 'सातवीं सीट' फॉर्मूला

माना जा रहा था कि मौजूदा संख्या बल के हिसाब से महायुति (भाजपा, शिंदे गुट, अजित पवार गुट) को 6 सीटें (भाजपा-4, अजित पवार गुट-1, शिंदे गुट-1) आसानी से मिल जाएंगी। लेकिन भाजपा के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की दिल्ली यात्रा और अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद चित्र बदल गया है। सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह ने साफ शब्दों में कहा है कि महायुति को सिर्फ छह सीटों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने पार्टी को सातवीं सीट के लिए पूरी ताकत झोंकने के निर्देश दिए हैं। अगर भाजपा सातवीं सीट की दावेदारी करती है, तो उसे करीब 20 अतिरिक्त मतों की जरूरत होगी।

विपक्ष के खेमे में दरार, भाजपा को मौका

सत्तापक्ष की इस नई रणनीति के पीछे विपक्षी गठबंधन 'महाविकास आघाडी' (मविआ) में बढ़ते मतभेदों को अहम वजह माना जा रहा है। विपक्ष के हिस्से में अभी मात्र एक सीट आने की संभावना है, लेकिन इस एक सीट पर कांग्रेस, उद्धव ठाकरे गुट और शरद पवार गुट के बीच जबरदस्त खींचतान चल रहा है। अमित शाह इसी आपसी लड़ाई का फायदा उठाकर विपक्ष के किसी असंतुष्ट धड़े को अपने पक्ष में करने और सातवीं सीट पर कब्जा करने का दांव खेल रहे हैं।

25 दावेदारों की लंबी सूची, इन नामों पर ज्यादा फोकस

इस बीच, महाराष्ट्र भाजपा ने 4 सीटों के लिए करीब 25 दावेदारों की सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेज दी है। इस सूची में कुछ चौंकाने वाले नाम भी शामिल हैं। प्रमुख रूप से अमरावती की पूर्व सांसद नवनीत राणा, चंद्रपुर के पूर्व सांसद और ओबीसी आयोग के पूर्व अध्यक्ष हंसराज अहीर, और गडचिरोली के पूर्व सांसद अशोक नेते के नाम शीर्ष पर चर्चा में हैं। तीनों नेताओं ने पार्टी से राज्यसभा टिकट के लिए पुरजोर दबाव बनाया है।

भाजपा की ओर से उम्मीदवारों के चयन का मामला अब 2 मार्च को होने वाली केंद्रीय चुनाव समिति की अहम बैठक में तय होगा। अमित शाह की रणनीति के मद्देनजर यह लगभग तय है कि भाजपा इस बार 4 की जगह 5 उम्मीदवार चुनाव में उतारेगी। यह पांचवां उम्मीदवार कौन होगा और क्या विपक्ष के खेमे में बने तूफान के बीच भाजपा सातवीं सीट पर कब्जा कर पाएगी, यह आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे बड़ा सवाल होगा। Maharashtra Rajya Sabha Election 2026

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