Chandrayaan 3 Mission 2023: इस अभियान की सफलता के साथ ही, जुड जाएगा भारत के गौरवशाली इतिहास में एक और अध्याय
भारत
चेतना मंच
11 Jul 2023 07:06 PM
Chandrayaan 3 Mission 2023: भारतीय अंतरिक्ष मिशन में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव आने वाला है, जब 14 जुलाई को दोपहर 2 बजकर 35 मिनट पर चंद्रयान 3 (Chandrayaan 3) को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर (Satish Dhawan Space Center) से लॉन्च किया जाएगा। इंडियन रिसर्च स्पेस ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) चंद्रयान 3 मिशन (Chandrayaan 3 Mission 2023) को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। मिशन चंद्रयान 3 की काउंट डाउन शुरू हो गई है।
Chandrayaan 3 Mission 2023:
14 जुलाई को चार साल बाद फिर से इसरो अंतरिक्ष पर अपना यान भेजेगा। चंद्रयान 3 अपनी लॉन्चिंग के बाद 45 दिनों तक अंतरिक्ष में रहेगा। इसरो चंद्रयान 3 को एलवीएम 3 (LVM 3) रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजेगा। इससे पहले भारत ने 2019 को चंद्रयान 2 (Chandrayaan 2) लॉन्च किया था, जो दुर्भाग्यवश अंतिम समय में असफल हो गया था और चांद पर लैंड करते समय वह क्रैश हो गया था।
चंद्रयान 3 की सफलता खोलेगी प्रगति के द्वार
मिशन चंद्रयान 3 की सफलता से भारत न सिर्फ अंतरिक्ष अभियानों में अपनी ताकत बढ़ाएगा, बल्कि इससे भारत की कई क्षेत्रों में उन्नति के रास्ते भी खुलेंगे। इस मिशन का भारत को काफी फायदा होगा, इसकी सफलता से भारतीय अंतरिक्ष अभियान में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा। दुनिया में अभी तक सिर्फ 3 देशों को चांद पर अंतरिक्ष यानों को उतारने में सफलता मिली है। ये देश हैं अमेरिका, रूस और चीन। जैसी कि पूरी संभावना है, चंद्रयान 3 मिशन सफल होते ही भारत भी इस विशेष क्लब में शामिल हो जाएगा।
इस बार इस मिशन में ऑर्बिटर नहीं भेजा जाएगा। इस बार इस मिशन में प्रोपल्शन मॉड्यूल, लैंडर मॉड्यूल और रोवर ही शामिल होंगे। प्रोपल्शन मॉड्यूल जोकि स्पेसशिप को उड़ाने वाला हिस्सा होता है। जबकि लैंडर मॉड्यूल का काम स्पेसशिप को चंद्रमा में उतारने का रहेगा। वहीं रोवर चंद्रमा का डेटा जुटाने के काम को अंजाम देगा। फिर भी अगर जरूरी हुआ तो चंद्रयान 2 के साथ भेजे गए ऑर्बिटर से संपर्क किया जाएगा।
इसरो प्रमुख सोमनाथ ने इस बार किए गए परिवर्तनों के बारे में बताया
इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने इस बार किए गए परिवर्तनों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि "इस बार चंद्रयान 2 के 'सफलता आधारित डिजाइन' की जगह चंद्रयान 3 में 'विफलता आधारित डिजाइन' का विकल्प चुना गया है। इस बार इस बात का ख्याल रखा गया है, कि क्या यान विफल हो सकता है और कैसे इसकी सुरक्षा की जाए, ताकि उसकी सफल लैंडिंग सुनिश्चित हो।"
आगे इसरो प्रमुख ने कहा "इसके लिए हमने लैंडिंग साइट को 500 मीटर x 500 मीटर से बढ़ाकर 2.5 किलोमीटर कर दिया है। यह कहीं भी उतर सकता है। यह आपको एक विशिष्ट बिंदु को लक्षित करने के लिए सीमित नहीं करता है। इस बार स्पेसशिप में ज्यादा फ्यूल और कई सेफ्टी मेजर्स किए गए हैं, ताकि मिशन नाकाम न हो। क्योंकि सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी के चलते 2019 में चंद्रयान 2 की क्रैश-लैंडिंग हो गई थी।"
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