बिहार:पत्नियों से बदले की आग में मर्यादा भूले पति,गिरफ्तार

पति कमलेश महतो को पता चला कि उनकी पत्नी के वीडियो वायरल किए गए हैं, उन्होंने गुस्से में आकर एक और अपराध किया। बदले की भावना में कमलेश ने आरोपी राम सुजीत शर्मा की पत्नी के फोटो पर आपत्तिजनक शब्द लिखकर सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिए।

viral on social media
दरभंगा पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar09 Mar 2026 08:39 PM
bookmark

Bihar News: बिहार के दरभंगा जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ दो युवकों ने एक-दूसरे से बदला लेने के लिए उनकी पत्नियों के आपत्तिजनक फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए। साइबर थाना पुलिस ने इस गंभीर मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस के अनुसार, मामला ईर्ष्या और बदले की भावना का है। मनीगाछी थाना क्षेत्र के रहने वाले आरोपी राम सुजीत शर्मा ने कुछ समय पहले एक अविवाहित युवती से वीडियो कॉल के दौरान बातचीत की और धोखे से उसके आपत्तिजनक फोटो व वीडियो बना लिए। इसके बाद वह उस युवती को ब्लैकमेल करने लगा और शादी न करने की धमकी देने लगा। जब नवंबर 2025 में उस युवती की शादी सकतपुर थाना क्षेत्र के निवासी कमलेश महतो के साथ हो गई, तो आरोपी राम सुजीत ने उसके आपत्तिजनक फोटो और वीडियो इंटरनेट पर वायरल कर दिए।

पति ने लिया बदला, पत्नी बनी निशाना

जैसे ही पति कमलेश महतो को पता चला कि उनकी पत्नी के वीडियो वायरल किए गए हैं, उन्होंने गुस्से में आकर एक और अपराध किया। बदले की भावना में कमलेश ने आरोपी राम सुजीत शर्मा की पत्नी के फोटो पर आपत्तिजनक शब्द लिखकर सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिए। इस तरह, दोनों पुरुषों ने अपनी-अपनी ईर्ष्या और गुस्से का बदला एक-दूसरे की पत्नियों की बदौलत लिया।

पुलिस की कार्रवाई

इस पूरे प्रकरण में जब दोनों पक्षों की पत्नियां परेशान होकर साइबर थाना पहुंचीं और एक-दूसरे के पति के खिलाफ मामला दर्ज कराया, तो पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। साइबर डीएसपी विपिन बिहारी ने बताया कि दोनों शिकायतों की जांच के बाद छापेमारी कर राम सुजीत शर्मा और कमलेश महतो दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। अदालत में पेश करने के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

पुलिस का संदेश

साइबर डीएसपी ने इस मामले पर कहा कि देश में विश्व महिला दिवस मनाए जाने के बीच महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के खिलाफ ऐसी घटनाएं चिंताजनक हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर किसी की भी आपत्तिजनक तस्वीरें या वीडियो वायरल करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।Bihar News

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

ईरान क्यों है गाढ़े काले सोने का दीवाना? लिक्विड गोल्ड का रहस्य जानें

कच्चा तेल कोई एक समान तरल नहीं है, बल्कि यह हजारों हाइड्रोकार्बन अणुओं का मिश्रण है। इसमें कार्बन और हाइड्रोजन परमाणुओं की जंजीरें होती हैं। छोटी जंजीरें हल्की होती हैं जो महंगे पेट्रोल और जेट ईंधन बनाती हैं, जबकि लंबी और भारी जंजीरें सस्ते डामर जैसा उत्पाद देती हैं।

Liquid Gold Iran
भारी तेल के बीच का 'परफेक्ट बैलेंस' (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar09 Mar 2026 12:31 PM
bookmark

Iranian oil quality : ईरानी तेल की गुणवत्ता इतनी अनूठी है कि रिफाइनरियों के लिए इसे छोड़ना सिर्फ राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि तकनीकी और आर्थिक आत्महत्या जैसा साबित हो सकता है। जब भी आप अपनी कार में पेट्रोल भरवाते हैं या किसी हवाई जहाज में सफर करते हैं, तो उस ईंधन के पीछे एक रिफाइनरी इंजीनियर की मेहनत और गणित छिपा होता है। दशकों से दुनिया भर के इंजीनियर चाहे विरोधी देश हों या कड़े प्रतिबंधों का दौर, ईरान के तेल को चुनते आए हैं। सवाल उठता है कि आखिर इस दीवानगी की वजह क्या है? इसका जवाब राजनीति में नहीं, बल्कि शुद्ध केमिस्ट्री में छिपा है।

क्या है 'शुद्ध केमिस्ट्री' का राज?

कच्चा तेल कोई एक समान तरल नहीं है, बल्कि यह हजारों हाइड्रोकार्बन अणुओं का मिश्रण है। इसमें कार्बन और हाइड्रोजन परमाणुओं की जंजीरें होती हैं। छोटी जंजीरें हल्की होती हैं जो महंगे पेट्रोल और जेट ईंधन बनाती हैं, जबकि लंबी और भारी जंजीरें सस्ते डामर जैसा उत्पाद देती हैं। ईरान का कच्चा तेल रसायनिक रूप से एक ऐसे 'स्वीट स्पॉट' पर बैठा है, जिसे बदलना दुनिया की बड़ी रिफाइनरियों के लिए एक दुःस्वप्न साबित होता है।

'API ग्रेविटी' और संतुलित सल्फर का जादू

किसी भी तेल की गुणवत्ता दो पैमानों पर मापी जाती है—घनत्व (API ग्रेविटी) और सल्फर की मात्रा।

  1. सही घनत्व: पानी की API ग्रेविटी 10 होती है। ईरानी लाइट क्रूड की API ग्रेविटी 33 से 36 के बीच होती है। यह इसे 'मीडियम' और 'लाइट' की सीमा पर रखता है, जो दुनिया भर की रिफाइनरियों की पसंदीदा श्रेणी है।
  2. कम खर्चीली सफाई: ईरानी तेल में सल्फर की मात्रा 1.36 से 1.5 प्रतिशत होती है। सल्फर हटाने की प्रक्रिया (हाइड्रोडिसल्फराइजेशन) 450 डिग्री सेल्सियस तापमान और भारी दबाव में होती है, जो बेहद खर्चीली है। ईरानी तेल में सल्फर इतना संतुलित है कि इसे साफ करने के लिए एशिया की मध्यम स्तर की रिफाइनरियों को भारी निवेश करने की जरूरत नहीं पड़ती।

70% का 'गोल्डन यील्ड'

ईरानी लाइट क्रूड की सबसे बड़ी ताकत इसका 'डिस्टिलेशन यील्ड' है।इसके एक बैरल से लगभग 20% हल्का हिस्सा (पेट्रोल आदि) और 50% 'मिडिल डिस्टिलेट्स' (डीजल, जेट फ्यूल, हीटिंग ऑयल) प्राप्त होता है। इसका मतलब है कि प्रत्येक बैरल का करीब 70% हिस्सा सीधे प्रीमियम ईंधन में बदल जाता है। रिफाइनरी इंजीनियरों के लिए यह कन्वर्जन रेट सबसे ज्यादा मुनाफे का सौदा होता है। अगर यह सप्लाई कटती है, तो रिफाइनरियों की कार्यक्षमता और मुनाफा दोनों गिरने लगते हैं।

अमेरिका और वेनेजुएला क्यों नहीं दे सके विकल्प?

अक्सर सवाल पूछा जाता है कि चीन और भारत जैसे देश अमेरिकी शेल ऑयल या वेनेजुएला के तेल पर क्यों नहीं शिफ्ट हो जाते? इसका जवाब फिर से केमिस्ट्री देती है:

  • अमेरिकी तेल (WTI):यह बहुत हल्का होता है (API 39 से ऊपर)। सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन इससे बहुत अधिक 'नैफ्था' बनता है और डीजल-जेट फ्यूल कम मिलता है। मीडियम ग्रेड के लिए बनी रिफाइनरियाँ इसे प्रोसेस करके अपनी कुशलता खो बैठती हैं।
  • वेनेजुएला का तेल: यह इसके विपरीत बहुत भारी होता है (API 8-10)। यह पाइपलाइनों में ठीक से नहीं बहता और इसे रिफाइन करने के लिए अरबों डॉलर के 'कोकर' और 'हाइड्रोक्रैकर' यूनिट्स चाहिए होते हैं। Iranian oil quality

संबंधित खबरें

अगली खबर पढ़ें

राज्यसभा चुनाव से पहले भाजपा का संगठनात्मक दांव, केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने बिहार, हरियाणा और ओडिशा जैसे अहम राज्यों के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर साफ संदेश दिया है कि भाजपा इस चुनाव को पूरी गंभीरता, सतर्कता और रणनीतिक अनुशासन के साथ लड़ने जा रही है।

भाजपा का बड़ा संगठनात्मक दांव
भाजपा का बड़ा संगठनात्मक दांव
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar09 Mar 2026 12:04 PM
bookmark

Rajya Sabha Elections : राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी सियासी और संगठनात्मक तैयारियों को निर्णायक चरण में पहुंचा दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने बिहार, हरियाणा और ओडिशा जैसे अहम राज्यों के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर साफ संदेश दिया है कि भाजपा इस चुनाव को पूरी गंभीरता, सतर्कता और रणनीतिक अनुशासन के साथ लड़ने जा रही है। हाल के दिनों में कई राज्यों के लिए उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद अब पर्यवेक्षकों की तैनाती को चुनावी प्रबंधन की अगली और बेहद महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व हर स्तर पर समन्वय, विधायकों से संपर्क, संगठनात्मक निगरानी और मतदान प्रक्रिया को पूरी मजबूती के साथ साधना चाहता है, ताकि चुनावी मैदान में कोई ढिलाई या असमंजस की स्थिति पैदा न हो। 

बिहार में दो नेताओं को सौंपी गई जिम्मेदारी

पार्टी की ओर से साझा जानकारी के मुताबिक बिहार के लिए दो वरिष्ठ नेताओं को सेंट्रल ऑब्जर्वर बनाया गया है। इनमें छत्तीसगढ़ सरकार के डिप्टी चीफ मिनिस्टर विजय शर्मा और भारत सरकार में यूनियन मिनिस्टर ऑफ स्टेट हर्ष मल्होत्रा शामिल हैं। बिहार को राजनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण राज्य माना जाता है, इसलिए यहां भाजपा ने दो पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर अपनी गंभीरता का संकेत दिया है।

हरियाणा में हर्ष सांघवी को मिली कमान

हरियाणा के लिए हर्ष सांघवी को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। भाजपा की यह नियुक्ति इस बात का संकेत मानी जा रही है कि पार्टी राज्यसभा चुनाव में विधायकों के समन्वय, रणनीतिक संवाद और मतदान प्रबंधन पर विशेष फोकस बनाए रखना चाहती है। राज्यसभा चुनावों में इस तरह की जिम्मेदारियां अक्सर संगठनात्मक अनुशासन और चुनावी गणित को साधने के लिहाज से काफी अहम होती हैं।

ओडिशा की जिम्मेदारी चंद्रशेखर बावनकुले के पास

ओडिशा के लिए चंद्रशेखर बावनकुले को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाकर भाजपा ने यह संकेत दे दिया है कि वह राज्यसभा चुनाव को लेकर किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। पार्टी ने अलग-अलग राज्यों में अनुभवी नेताओं को जिम्मेदारी सौंपकर अपनी रणनीतिक गंभीरता जाहिर की है। भाजपा की कोशिश है कि संगठन, विधायकों और नेतृत्व के बीच तालमेल पूरी तरह मजबूत बना रहे, ताकि चुनावी प्रक्रिया अनुशासित, स्पष्ट और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सके। Rajya Sabha Elections

संबंधित खबरें