
Cheetah: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 72वें जन्मदिन पर नामीबिया से लाए गए चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ने जा रहे हैं। भारत देश में ऐसे कई जंगल है, जहां पर इन चीतों को छोड़ा जा सकता था, लेकिन एमपी के कूनो उद्यान में ही इन चीतों को क्यों छोड़ा जा रहा है। आईए जानते हैं क्या है वजह।
जिन चीतों को कूनो उद्यान में छोड़ा जा रहा है, उन्हें नामीबिया देश से लगाया गया है। कुल 8 चीता वहां से भारत लाए गए है। उन्हें कूनो उद्यान में छोडने का पहला कारण तो यह है कि कूनो का मौसम और वातावरण काफी हद तक नामीबिया के जंगलों जैसा ही बताया जा रहा है। इसके अलावा इन चीतों को यहां रखने का दूसरा बड़ा कारण यह है कि इसके आसपास कोई बस्ती नहीं है। यह वन क्षेत्र छत्तीसगढ़ के कोरिया के साल जंगलों के बहुत करीब है। इन्हीं जंगलों में लगभग 70 साल पहले एशियाई मूल के चीते अंतिम बार दिखे थे।
चीतों के लिए वैसे तो मनुष्यों के साथ संघर्ष की संभावना कम होती है, वे मनुष्यों का शिकार नहीं करते हैं। वे बड़े पशुओं पर भी हमला नहीं करते हैं। उच्च जनसंख्या घनत्व और खुले घास के मैदान भारत में जानवरों के लिए खतरा पैदा करते हैं। कूनो शायद देश के कुछ वन्यजीव स्थलों में से एक है, जहां सालों पहले पार्क के अंदर से लगभग 24 गांवों और उनके पालतू पशुओं को पूरी तरह से बाहर निकाल दिया गया था।
इसके अलावा वर्ष 2010 और 2012 के बीच मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश में दस जगहों का सर्वेक्षण किया गया था। बाद में यह पाया गया कि कूनो चीतों को रखने के लिए सबसे उपयुक्त जगह है। भारतीय वन्यजीव संस्थान और भारतीय वन्यजीव ट्रस्ट ने जलवायु और आबादी सहित अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह सर्वे किया और कूनो को सबसे उपयुक्त जगह करार दिया।