डा. नवाज देवबंदी
तेरे आने की जब ख़बर महके,
तेरी ख़ुशबू से सारा घर महके।
शाम महके तेरे तसव्वुर से,
शाम के बाद फिर सहर महके।
रात भर सोचता रहा तुझ को,
ज़ेहन - ओ - दिल मेरे रात भर महके।
याद आए तो दिल मुनव्वर हो,
दीद हो जाए तो नज़र महके।
वो घड़ी दो घडी जहाँ बैठे,
वो ज़मीं महके वो शजर महके।
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