एक साथ क्यों होती है सूर्य देव-छठी मैया की पूजा? छिपा है बड़ा शास्त्रीय रहस्य
भारत
चेतना मंच
25 Oct 2025 11:02 AM
भारत के सबसे प्राचीन और वैदिक पर्वों में से एक छठ महापर्व (Chhath Puja) हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व न सिर्फ लोक आस्था का प्रतीक है बल्कि सूर्य देव और छठी मैया दोनों की संयुक्त उपासना का अद्भुत उदाहरण भी है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस पर्व में सूर्य देव और छठी मैया (Chhathi Maiya) की एक साथ पूजा क्यों की जाती है? इसके पीछे गहरा शास्त्रीय और पौराणिक महत्व छिपा है। आइए जानते हैं। Chhath Puja
पौराणिक मान्यता: छठी मैया हैं सूर्य देव की बहन
लोककथाओं और पुराणों के अनुसार, छठी मैया को सूर्य देव की बहन माना गया है। ऐसे में जब व्रती (व्रत करने वाले) सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं तो वे उनकी बहन छठी मैया को भी प्रसन्न करते हैं। यह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और प्रकृति के संतुलन का प्रतीक है। ‘छठ’ शब्द संस्कृत के ‘षष्ठी’ से बना है जिसका अर्थ होता है छठा दिन इसी दिन छठी मैया की पूजा की जाती है। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि छठी देवी बालकों की रक्षा करती हैं और उन्हें दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन का आशीर्वाद देती हैं। यही कारण है कि महिलाएं यह व्रत संतान की कुशलता और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं।
हिंदू धर्म में यह मान्यता है कि किसी भी देवता की आराधना से पहले उनकी शक्ति की पूजा करना आवश्यक है। शास्त्रों के अनुसार, छठी मैया को सूर्य देव की शक्ति स्वरूपा माना गया है। इसलिए छठ महापर्व के दौरान व्रती पहले सूर्य की शक्ति यानी छठी मैया की पूजा करते हैं और फिर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं।
ऊषा और प्रत्यूषा का रहस्य
छठ पूजा का सबसे सुंदर पक्ष है डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देना। सायंकालीन अर्घ्य डूबते सूर्य की अंतिम किरण जिसे ‘प्रत्यूषा’ कहा जाता है, को दिया जाता है। सुबह का अर्घ्य उगते सूर्य की पहली किरण, यानी ‘ऊषा’ को समर्पित होता है। वेदों में छठी मैया को ऊषा देवी यानी सूर्य की पत्नी या किरण की देवी कहा गया है। इस प्रकार, जब व्रती सूर्य को अर्घ्य देते हैं तो वे उनकी शक्ति और प्रकाश दोनों की आराधना करते हैं।
छठ पूजा केवल व्रत या आस्था का पर्व नहीं है यह सूर्य की ऊर्जा, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और मातृत्व की शक्ति का संगम है। सूर्य देव जीवन और स्वास्थ्य के प्रतीक हैं। छठी मैया संतति और पारिवारिक कल्याण की अधिष्ठात्री देवी हैं। इस तरह, छठ पूजा में ऊर्जा और जीवन, शक्ति और सृजन, पुरुष और प्रकृति सबका सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। संक्षेप में कहा जाए तो, छठ पूजा इस बात का प्रतीक है कि जब हम सूर्य की ऊर्जा का सम्मान करते हैं और छठी मैया की करुणा को स्वीकारते हैं तब जीवन में संतुलन, स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। Chhath Puja