चीन-पाक गुप्त सैन्य गठजोड़ का पदार्फाश : जे-10टीए हेलीकॉप्टर तैनात, लेकिन भारत का जवाब अभी बाकी है!
New Delhi/Islamabad
भारत
चेतना मंच
08 Jul 2025 08:22 PM
New Delhi/Islamabad : पाकिस्तान और चीन के सैन्य संबंधों की गहराई किसी से छिपी नहीं है, लेकिन हाल ही में सामने आई कुछ तस्वीरों और वीडियो ने एक नए और चौंकाने वाले घटनाक्रम की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने चीन से मिले अत्याधुनिक जे-10टीए अटैक हेलीकॉप्टर को चुपचाप अपनी सीमा पर तैनात कर दिया है। न कोई आधिकारिक बयान, न कोई पुष्टि पूरी डील पर्दे के पीछे संपन्न हुई।
बिना शोर-शराबे के चीनी मॉन्स्टर की एंट्री
जे-10टीए दरअसल चीन के मौजूदा जे-10टीए अटैक हेलीकॉप्टर का उन्नत संस्करण है, जिसे उच्च ऊंचाई वाले दुर्गम युद्धक्षेत्रों के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें न केवल बेहतर इंजन और एवियोनिक्स हैं, बल्कि यह इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से भी लैस है। इसकी उड़ान रेंज लगभग 800 किलोमीटर है, और यह 1500 किलोग्राम तक मिसाइल, रॉकेट और तोपें ढो सकता है। रात्रिकालीन आॅपरेशंस में भी यह कारगर है।
सीमा पार तनाव बढ़ाने वाली रणनीति?
यह तैनाती ऐसे वक्त पर हुई है जब पाकिस्तान आर्थिक संकट से जूझ रहा है, और आंतरिक अस्थिरता भी चरम पर है। बावजूद इसके, पाकिस्तान ने चीन से मिल रही सैन्य सहायता को तेज कर दिया है। जानकार मानते हैं कि इस तरह के हाई-एंड हेलीकॉप्टर्स की तैनाती भारत-पाक सीमा पर शक्ति संतुलन को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है।
भारत की तैयारी, अपाचे से मिलेगा जवाब
हालांकि पाकिस्तान ने एक नया कदम जरूर उठाया है, लेकिन भारत भी हाथ पर हाथ रखकर बैठा नहीं है। भारतीय सेना को अमेरिका से पहले तीन एएच-64ई अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर 15 जुलाई तक मिलने वाले हैं। बाकी तीन हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी नवंबर 2025 तक पूरी हो जाएगी। अपाचे को विश्व के सबसे भरोसेमंद और ताकतवर अटैक हेलीकॉप्टरों में गिना जाता है।
अपाचे का युद्ध कौशल कहीं अधिक सटीक और घातक
विशेषज्ञों का मानना है कि जे-10टीए की तुलना में अपाचे का युद्ध कौशल कहीं अधिक सटीक और घातक है। जहां पाकिस्तान एक सस्ते विकल्प से काम चला रहा है, वहीं भारत पूर्ण क्षमता और गुणवत्ता पर जोर दे रहा है। चीन और पाकिस्तान का यह गुप्त सैन्य गठजोड़ भले ही कुछ समय के लिए रणनीतिक बढ़त देने वाला हो, लेकिन भारत की जवाबी रणनीति स्पष्ट है। हर मोर्चे पर मजबूती से खड़ा रहना। आने वाले महीनों में यह साफ हो जाएगा कि दक्षिण एशिया की सैन्य शक्ति संतुलन की दिशा किस ओर मुड़ती है।