चुनाव में आपकी उंगली पर लगाई जाती है चमत्कारी स्याही, यह स्याही है खास
chunavi syahi
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 11:29 AM
चुनावी स्याही : भारत में लोकसभा के चुनाव चल रहे हैं। चुनाव में आपने भी वोट दिया होगा या देने वाले होंगे। वोट देने से पूर्व आपके हाथ की एक उंगली पर स्याही का निशान लगाया जाता है। क्या आपको पता है कि आपकी उंगली पर जो स्याही का निशान लगाया जाता है वह कोई साधारण स्याही नहीं है, बल्कि चमत्कारी स्याही है। इस स्याही का निशान केवल भारत में ही नहीं लगाया जाता बल्कि दुनिया के अनेक देशों के चुनाव में इसी स्याही का निशान लगाया जाता है। पूरी दुनिया में यह स्याही भारत से ही निर्यात की जाती है।
जान लीजिए चुनाव वाली स्याही का पूरा विवरण
हम आपको चुनाव में आपकी उंगली पर लगाई जाने वाली स्याही का पूरा विवरण बता रहे हैं। किसी भी चुनाव में आपकी तर्जनी उंगली पर स्याही लगाने का सीधा अर्थ होता है कि अपने वोट डाल दिया है। आपकी उंगली पर लगाई जाने वाली स्याही ऐसी होती है कि उसका निशान मिटाया नहीं जा सकता है। शुरू में यह बैंगनी रंग की नजऱ आती है, लेकिन समय बीतने के साथ ही यह काली पड़ जाती है। इस स्याही को अमिट स्याही या इंडेलिबल इंक के नाम से जाना जाता है। स्याही लगाने का एक फ़ायदा तो यह है कि इससे पता चलता है कि इस व्यक्ति ने मतदान कर दिया है। दूसरा फायदा यह कि वो व्यक्ति दोबारा वोट नहीं डाल सकता है। भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों में मतदान के बाद स्याही से चिन्हित किया जाना अनिवार्य है। ख़ास बात यह है कि दुनिया के अधिकांश देशों में यह स्याही भारत से ही जाती है।
कहां बनती है यह स्याही
अब आपके मन में यह सवाल भी उठ रहा होगा कि आखऱि यह स्याही बनती कहां है? यह अमिट स्याही भारत में दो जगहों पर बनती है- तेलंगाना के हैदराबाद की रायुडू लेबोरेटरी और कर्नाटक के मैसूर के मैसूर पेंट्स और वार्निश लिमिटेड कंपनी में। भारत का चुनाव आयोग मैसूर पेंट्स और वार्निश लिमिटेड में बनी स्याही का इस्तेमाल करता है जबकि रायुडू लेबोरेटरी में बनी स्याही दुनिया के दूसरे देशों में भेजी जाती है। दुनिया के कऱीब 90 देशों में इस स्याही का इस्तेमाल होता है। इसमें से 30 देशों में स्याही की आपूर्ति मैसूर पेंट्स और वार्निश लिमिटेड कंपनी भी करती है। शुरुआती दिनों में इस स्याही को छोटी बोतलों में भरकर निर्यात किया जाता था।
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रायुडू लेबोरेटरी के सीईओ शशांक रायुडू के मुताबिक़ आधुनिकतम तकनीकों के चलते 2014 के बाद से इस अमिट स्याही से बने मार्कर का निर्यात किया जा रहा है। इस स्याही का इस्तेमाल पल्स पोलियो प्रोग्राम में भी होता है जिन बच्चों को टीका लग जाता है, उन्हें टीके लगने का चिन्ह भी इसी स्याही से लगाया जाता है। चुनाव के दौरान बैंगनी रंग की इस स्याही को बाएं हाथ की तर्जनी पर लगाया जाता है।
चुनावी स्याही में 10 से 18 प्रतिशत मात्रा सिल्वर नाइट्रेट केमिकल की होती है। जब चुनाव अधिकारी इसे उंगली पर लगाता है तो यह हमारे शरीर में मौजूद नमक के साथ प्रतिक्रिया कर के सिल्वर क्लोराइड बनाता है। चूंकि सिल्वर क्लोराइड पानी में घुलता नहीं है तो यह हमारी त्वचा से जुड़ा रह जाता है। उंगली पर लगने के सेकेंड भर बाद ही यह अपना निशान बना लेता है और 40 सेकेंड में पूरी तरह सूख भी जाता है। खास बात यह है कि पानी के संपर्क में आने के बाद इसका रंग काला हो जाता है। आप चाहे जितना भी साबुन, पाउडर या तेल रगड़ लें, ये छूटेगा नहीं। इसका निशान कम-से-कम 72 घंटे तक त्वचा से मिटाया नहीं जा सकता।
भारतीय चुनाव आयोग हर चुनाव के दौरान लाखों बॉटल स्याही के आर्डर देता है। चुनाव आयोग के मुताबिक़ 2014 के आम चुनाव के दौरान 21 लाख बॉटल स्याही का ऑर्डर दिया गया था, जो 2019 के आम चुनावों में बढ़कर 26 लाख तक पहुंच गया था। इसका इस्तेमाल 1960 के दशक से हो रहा है। चुनाव आयोग की ओर से मार्च 2015 में जारी हुए एक आदेश के मुताबिक़ स्याही बाएं हाथ की तर्जनी उंगली के नाखून के आखऱिी सिरे से प्रथम जोड़ के नीचे तक ब्रश से लगाई जाएगी। जिस ब्रश से यह स्याही लगाई जाती है, उसका निर्माण भी मैसूर पेंट्स एंड वार्निश लिमिटेड ही करता है।
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मतदान अधिकारी जो ईवीएम कंट्रोल यूनिट के प्रभारी होते हैं, उनका काम यह सुनिश्चित करना होता है कि कंट्रोल बैलेट का बटन दबाने से पहले मतदाता की उंगली पर स्याही का निशान पूरी तरह से लगा हो। एक सवाल यह भी उठता है कि अगर किसी मतदाता के हाथ पर पिछले चुनाव की स्याही का निशान लगा हो तो स्याही कहां लगाई जाएगी। इस सवाल का जवाब चुनाव आयोग ने राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों को मार्च 2021 में लिखे एक पत्र में दिया है।
आयोग ने इस पत्र में लिखा है, बाएं हाथ की तर्जनी पर अगर पिछले चुनाव की स्याही लगी हो और उसके निशान दिख रहे हों तो स्याही बाएं हाथ की तर्जनी की जगह मध्यमा या बीच की उंगली में लगाई जाएगी। आयोग का कहना है कि अगर स्याही मध्यमा पर भी लगी हो तो अनामिका उंगली में लगाई जाएगी। इसके लिए ज़रूरी है कि वर्तमान चुनाव और पूर्व चुनाव के बीच का अंतर दो महीने से अधिक का न हो। अब आप जरूर समझ गये होंगे कि हम चुनाव में लगने वाली स्याही को चमत्कारी स्याही क्यों बता रहे होंगे। हमे पक्का पता है कि आज से पहले इस चमत्कारी स्याही के विषय में किसी ने भी आपको यह सारी जानकारी नहीं दी होगी। chunavi syahi
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