कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक एवं अध्यक्ष अभिजीत दीपके की दादी सावित्रीबाई शंकर दीपके का महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के पैतृक गांव संतुक पिंपरी में निधन हो गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 85 वर्षीय सावित्रीबाई पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थीं।

National News: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक एवं अध्यक्ष अभिजीत दीपके के परिवार पर अचानक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। दिल्ली में CJP के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन को लेकर चल रहे घटनाक्रम के बीच उनकी दादी सावित्रीबाई शंकर दीपके का निधन हो गया। परिवार के लिए यह बेहद दुखद समय है। एक ओर अभिजीत दीपके दिल्ली में पुलिस हिरासत में हैं, वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र में उनके पैतृक गांव में शोक का माहौल है। 10 अक्टूबर 2026 को सामने आई इस खबर ने CJP के समर्थकों और आंदोलन से जुड़े लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जिस दिन अभिजीत दीपके दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे, उसी दिन उनके परिवार में यह दुखद घटना सामने आई।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अभिजीत दीपके की दादी सावित्रीबाई शंकर दीपके का महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में स्थित उनके पैतृक गांव संतुक पिंपरी में निधन हुआ। उनकी उम्र लगभग 85 वर्ष बताई गई है। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थीं और उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं। दादी के निधन की खबर ऐसे समय आई, जब अभिजीत दीपके दिल्ली में राजनीतिक और आंदोलन संबंधी घटनाक्रम के बीच पुलिस हिरासत में थे। ऐसे में परिवार के इस दुख में उनके शामिल हो पाने को लेकर भी सवाल उठने लगे। परिवार के लिए किसी बुजुर्ग सदस्य को खोना अपने आप में बड़ा आघात होता है। ऐसे समय में अपनों के बीच मौजूद रहने की इच्छा स्वाभाविक है। हालांकि, अभिजीत दीपके अपने गांव पहुंच पाए या नहीं, इसकी पुष्टि के बिना कोई दावा करना उचित नहीं होगा।
CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करने की घोषणा की थी। इस प्रदर्शन को लेकर पार्टी और उसके समर्थकों के बीच पहले से तैयारी चल रही थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अभिजीत दीपके प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे। दिल्ली पहुंचने के बाद पुलिस ने उन्हें विमान के भीतर ही हिरासत में ले लिया। उनके साथ CJP से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका को भी हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। यह घटनाक्रम उस समय हुआ, जब राजधानी दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। प्रदर्शन को लेकर पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनने की खबरें भी सामने आईं। इसी घटनाक्रम के बीच अभिजीत दीपके की दादी के निधन की खबर ने मामले को एक नया भावनात्मक पहलू दे दिया है।
CJP के प्रस्तावित आंदोलन का संबंध मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर उठाए गए सवालों से बताया गया है। आंदोलन से जुड़े लोगों ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों की ओर से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग किए जाने की खबरें सामने आईं। हालांकि, मतदाता सूची में बदलाव को लेकर लगाए गए राजनीतिक आरोपों और उनके जवाबों को अलग-अलग समझना जरूरी है। किसी आरोप को स्थापित तथ्य मानने से पहले संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और चुनाव आयोग का पक्ष देखना आवश्यक है। CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के बीच अभिजीत दीपके और उनके साथियों को हिरासत में लिए जाने की घटना पहले ही चर्चा में थी। अब उनकी दादी के निधन की खबर ने इस घटनाक्रम को और संवेदनशील बना दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या अभिजीत दीपके अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र स्थित अपने गांव पहुंच पाएंगे। 10 अक्टूबर को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके को उनकी दादी के निधन की सूचना दी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया कि पुलिस ने उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए घर लौटने की अनुमति देने की बात कही। यह जानकारी परिवार के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन अनुमति दिए जाने और वास्तव में गांव पहुंचने के बीच अंतर है। अभिजीत दीपके की रवानगी, यात्रा और अंतिम संस्कार में उनकी उपस्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती। इसलिए फिलहाल यह कहना सही होगा कि उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने की संभावना से जुड़ी खबर सामने आई है, लेकिन उनके गांव पहुंचने की पुष्टि होने तक इस घटनाक्रम को अपडेट की प्रतीक्षा में माना जाना चाहिए।
राजनीतिक आंदोलन, विरोध-प्रदर्शन और हिरासत की खबरें आम तौर पर राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखी जाती हैं। लेकिन किसी व्यक्ति के परिवार में मृत्यु जैसी घटना निजी जीवन का ऐसा दुख है, जो राजनीतिक परिस्थितियों से अलग अपनी गंभीरता रखता है। अभिजीत दीपके के मामले में भी एक ओर दिल्ली में CJP के प्रदर्शन और पुलिस की कार्रवाई का घटनाक्रम चल रहा है, जबकि दूसरी ओर महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में उनका परिवार दादी के निधन से शोक में है। दादी सावित्रीबाई शंकर दीपके के निधन से परिवार को गहरा आघात पहुंचा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अभिजीत दीपके को घर लौटने के लिए मिली अनुमति के बाद आगे क्या घटनाक्रम सामने आता है।
CJP के अध्यक्ष अभिजीत दीपके की दादी के निधन की खबर ऐसे समय सामने आई है, जब दिल्ली में उनका प्रस्तावित प्रदर्शन और पुलिस हिरासत राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। इस मामले में अब दो महत्वपूर्ण पहलू हैं—एक तरफ विरोध-प्रदर्शन से जुड़ा राजनीतिक घटनाक्रम और दूसरी तरफ परिवार में हुआ दुखद निधन। चेतना मंच इस मामले में उपलब्ध विश्वसनीय जानकारियों के आधार पर आगे के घटनाक्रम पर नजर रखेगा। अभिजीत दीपके की रिहाई या घर लौटने की स्थिति, अंतिम संस्कार में उनकी उपस्थिति तथा CJP के आंदोलन से जुड़े अगले कदमों की पुष्टि होने पर समाचार को अपडेट किया जा सकता है। National News:
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