दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और पुलिस की कार्रवाई से जुड़ी पूरी खबर पढ़ें।

National News : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। जंतर-मंतर पर प्रतिबंधों के बावजूद प्रदर्शन स्थल में प्रवेश करने के मामले में सीजेपी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। दोनों को तिहाड़ जेल भेजने का आदेश विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दिया। वहीं, इस मामले में सीजेपी नेता अजिंक्य शिंदे को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था। National News
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार, 13 अक्टूबर को सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे अपने समर्थकों के साथ जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल में प्रवेश कर गए थे। यहां प्रदर्शन को लेकर प्रतिबंध लागू थे और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा प्रभावी थी। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की। दिल्ली पुलिस ने मौके पर कार्रवाई करते हुए तीनों नेताओं और उनके समर्थकों को हिरासत में लिया। इसके बाद उन्हें पुलिस थाने ले जाया गया। National News
दिल्ली पुलिस ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने दलील दी कि सौरव दास और आशुतोष रांका को कुछ दिन पहले भी एहतियातन हिरासत में लिया गया था। उस समय उन्हें शांति बनाए रखने और भविष्य में कानून-व्यवस्था भंग नहीं करने की शर्त पर रिहा किया गया था। पुलिस का आरोप है कि दोनों नेताओं ने दोबारा प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करके निर्धारित शर्तों का उल्लंघन किया। पुलिस ने आशंका जताई कि यदि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो वे भविष्य में भी शांति व्यवस्था प्रभावित कर सकते हैं। इन्हीं दलीलों के आधार पर मजिस्ट्रेट ने सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह पांच दिन की न्यायिक हिरासत है, न कि किसी आपराधिक मुकदमे में सुनाई गई अंतिम सजा। National News
सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करके नेताओं की गिरफ्तारी की जानकारी दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि नेताओं को देर रात तक अपने वकीलों से मिलने नहीं दिया गया और उन्हें सुबह के समय पुलिस थाने लाया गया। रत्ना सिंह के मुताबिक, नेताओं पर बिना अनुमति प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने, पहले से दिए गए बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने और सरकारी अधिकारी के काम में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि नेताओं को अदालत में पेश किया जाना था। हालांकि, पुलिस की दलीलों और सीजेपी की ओर से लगाए गए आरोपों के बीच मामले की कानूनी स्थिति को लेकर आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। आरोपों के संबंध में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है। National News
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सीजेपी और कई अन्य संगठनों ने हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शन किए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम हटाने और संशोधन की प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं। इसी मुद्दे पर वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। हालांकि, मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर लगाए गए आरोपों को संबंधित पक्षों की स्थिति और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही देखा जाना चाहिए। निर्वाचन आयोग और सत्तारूढ़ दल इन आरोपों से असहमत रहे हैं। National News
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