कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीप ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को आंदोलन की बड़ी सफलता बताया है। CJP ने 5 सितंबर का प्रस्तावित विरोध मार्च रद्द कर दिया।

भारत में कॉकरोच जनता पार्टी बनने के बाद से पूरे देश में कॉकरोच की खूब चर्चा हो रही है। ऐसे में देश में सबसे बड़ा कॉकरोच कौन है? यह सवाल भी बहुत बड़ा है। दरअसल कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का गठन तथा उसका मूल आधार व्यांगात्मक शैली में मौजूद है। इस व्यांगात्मक शैली को आगे बढ़ाते हुए हमने भी इस स्टोरी में व्यांगात्मक भाषा का ही प्रयोग किया है।
कॉकरोच जनता पार्टी CJP की भाषा है तथा व्यांगात्मक शैली में CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके इन दिनों देश तथा दुनिया के सबसे बड़े कॉकरोच हैं। देश तथा दुनिया के इस कॉकरोच ने भारत के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ऐलान किया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कारण देश के छात्रों को सही अर्थों में सफलता मिली है। (CJP) के संस्थापक तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने कहा कि NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के खिलाफ शुरू हुआ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन अब अपने एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द किए जाने के बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दीप ने आंदोलन को बड़ी सफलता बताया है। अभिजीत दीप का कहना है कि आंदोलन के दौरान उठाई गई प्रमुख मांगों पर सरकार और न्यायपालिका की कार्रवाई के बाद अब आंदोलन को वह परिणाम मिला है, जिसके लिए छात्र लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CJP ने 5 सितंबर को प्रस्तावित अपने विरोध मार्च को भी वापस लेने का फैसला किया है।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत उस समय निर्णायक मोड़ पर पहुंची, जब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में आवेदन देकर NEET पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में दर्ज FIR को समाप्त करने की मांग की। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करने का अनुरोध किया था। 31 अगस्त को केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले का उल्लेख किया था। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी। इसके बाद 1 सितंबर को मामले में महत्वपूर्ण आदेश सामने आया।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR रद्द किए जाने के बाद CJP की ओर से प्रस्तावित 5 सितंबर का विरोध मार्च वापस लेने की घोषणा की गई। संगठन की ओर से कहा गया कि जब सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को हटाने की दिशा में कदम उठा दिया और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर आदेश पारित कर दिया है, तो आंदोलन को आगे बढ़ाने की आवश्यकता नहीं रह गई। सुप्रीम कोर्ट में CJP की ओर से सौरव दास ने संगठन का आधिकारिक रुख रखा। इसके बाद संगठन के संस्थापक अभिजीत दीप ने इसे आंदोलन की बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अभिजीत दीप ने कहा कि उनकी मांगों को लेकर शुरू किया गया संघर्ष अब अपने लक्ष्य तक पहुंच गया है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के सामने संगठन का आधिकारिक पक्ष रखे जाने और उसके बाद आए आदेश ने छात्रों के आंदोलन को न्यायिक संरक्षण दिया है। अभिजीत दीप के मुताबिक, आंदोलन का उद्देश्य केवल प्रदर्शन करना नहीं था, बल्कि NEET पेपर लीक के आरोपों से प्रभावित छात्रों और प्रदर्शन के दौरान कार्रवाई झेलने वाले युवाओं की आवाज को मजबूती से उठाना था। उनका दावा है कि सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले ने आंदोलन की उस मांग को पूरा कर दिया है, जिसके तहत प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज मामलों को समाप्त करने की मांग की जा रही थी। उनके अनुसार, “अब सही मायने में हमारा आंदोलन सफल हुआ है।”
कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन पिछले कई महीनों से NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और छात्रों के अधिकारों को लेकर चर्चा में रहा है। संगठन की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन के रूप में हुई थी, लेकिन बाद में यह युवाओं के बीच एक बड़े आंदोलन के रूप में उभरा। जून में CJP ने जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। उस समय संगठन के संस्थापक अभिजीत दीप ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे समेत कई मांगें उठाई थीं। इसके बाद आंदोलन लगातार तेज होता गया। संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की हिरासत के बाद विवाद और गहरा गया था। CJP ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया था।
CJP आंदोलन के लिए जुलाई का घटनाक्रम भी महत्वपूर्ण रहा था। उस समय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अभिजीत दीप ने इसे अपने आंदोलन की बड़ी उपलब्धि बताया था। उन्होंने आंदोलन से जुड़े युवाओं को संबोधित करते हुए इसे सरकार को अपनी मांगें सुनने के लिए मजबूर करने वाली लड़ाई के तौर पर पेश किया था। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR समाप्त किए जाने के बाद CJP नेतृत्व इसे आंदोलन की दूसरी बड़ी कानूनी जीत के रूप में देख रहा है।
CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में विरोध मार्च निकालने की घोषणा की थी। यह मार्च छात्रों पर दर्ज मामलों और NEET पेपर लीक विवाद को लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाने की योजना का हिस्सा था। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में FIR वापस लेने की पहल और उसके बाद अदालत के आदेश ने परिस्थितियां बदल दीं। CJP ने सुप्रीम कोर्ट में ही स्पष्ट कर दिया कि अब प्रस्तावित मार्च नहीं किया जाएगा। यानी जिस मुद्दे को लेकर CJP सड़क पर उतरने की तैयारी कर रही थी, उसी मुद्दे पर सरकार के कदम और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संगठन ने आंदोलन को फिलहाल समाप्त करने का रास्ता चुना।
अभिजीत दीप द्वारा आंदोलन को “पूरी सफलता” और “पूर्ण न्याय” बताए जाने के बीच यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश मुख्य तौर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR से संबंधित है। इस आदेश का अर्थ यह नहीं है कि NEET पेपर लीक से जुड़े प्रत्येक मामले की जांच समाप्त हो गई है या पेपर लीक से प्रभावित अथवा आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के सभी दावे पर अंतिम न्यायिक फैसला हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान दर्ज मामलों में राहत दी है, जबकि गंभीर आपराधिक गतिविधियों से जुड़े आरोपियों के संबंध में अलग कानूनी कार्रवाई जारी रह सकती है। यही अंतर इस पूरे घटनाक्रम को समझने में बेहद महत्वपूर्ण है।
कॉकरोच जनता पार्टी के लिए यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि संगठन ने जिस आंदोलन की शुरुआत सड़क और सोशल मीडिया से की थी, वह अंततः सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। CJP के नेताओं का दावा है कि लगातार दबाव, प्रदर्शन और कानूनी लड़ाई के बाद सरकार को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों पर कदम उठाना पड़ा। अब संगठन के सामने अगली चुनौती यह होगी कि आंदोलन के दौरान उठाए गए व्यापक मुद्दों—NEET परीक्षा की विश्वसनीयता, पेपर लीक पर जवाबदेही और छात्रों की सुरक्षा—को किस तरह आगे बढ़ाया जाए। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CJP ने 5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च वापस ले लिया है और अभिजीत दीप इसे अपने आंदोलन की निर्णायक सफलता के तौर पर पेश कर रहे हैं।
इस तरह देखें तो कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन फिलहाल सड़क से अदालत तक पहुंचकर एक महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव पर समाप्त होता दिखाई दे रहा है। अभिजीत दीप के लिए यह केवल FIR खत्म होने का मामला नहीं, बल्कि उनके नेतृत्व में चले छात्र आंदोलन की राजनीतिक और सामाजिक स्वीकार्यता का दावा भी है।
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