महिलाओं को 40% टिकट देने के पीछे कांग्रेस की है यह मजबूरी!
Congress gender quota for UP
भारत
RP Raghuvanshi
02 Dec 2025 02:44 AM
भारत
RP Raghuvanshi
02 Dec 2025 02:44 AM
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने यूपी विधानसभा चुनाव से पहले 40% टिकट महिलाओं को देने की घोषणा कर सबको चौंका दिया है। रामायण के युद्ध में मेघनाथ के वाण से लक्ष्मण मरणासन्न हो गए थे, तब हनुमान ने संजीवनी बूटी लाकर उनके प्राण बचाए थे। तो क्या प्रियंका गांधी की यह घोषणा कांग्रेस के लिए संजीवनी साबित होगी?
कांग्रेस के कमजोर होने की सबसे बड़ी वजह
यूपी में कांग्रेस लगभग मरणासन्न है। पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में पार्टी को यूपी में क्रमश: एक और सात सीटें मिली थी। मंडल की राजनीति के बाद यूपी में जाति ही चुनाव का मुख्य मुद्दा बन गई। इससे सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को हुआ।
दलित और अति-पिछड़ी जातियां बहुजन समाज पार्टी को वोट देने लगीं जबकि, अन्य पिछड़ी जातियों सहित मुसलमानों का वोट समाजवादी पार्टी को मिलने लगा। सवर्णों के वोट कांग्रेस और बीजेपी में बंट गए। राम मंदिर आंदोलन के बाद कांग्रेस का बचाखुचा जनाधार भी भारतीय जनता पार्टी की ओर खिसकने लगा। पिछले तीन दशक से भी ज्यादा समय से कांग्रेस यूपी में सम्मानजनक विपक्ष का दर्जा पाने के लिए संघर्ष कर रही है।
क्यों कांग्रेस ने पकड़ा महिलाओं का हाथ
कांग्रेस जानती है कि जाति या धर्म को मुद्दा बनाकर खोई हुई जमीन वापस नहीं पा सकती। किसान आंदोलन से पार्टी को कुछ आस बंधी थी, लेकिन लखीमपुर खीरी की घटना के बावजूद यूपी के छोटे किसानों का आंदोलन में शामिल न होना पार्टी के लिए परेशानी का सबब बन गया।
कांग्रेस के लिए यह साबित करना मुश्किल हो गया है कि आखिर वह किसके पक्ष में खड़ी है। दलित-पिछड़े, बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक में से कोई भी वर्ग अब कांग्रेस का वोट बैंक नहीं रहा। कांग्रेस एक ऐसे वर्ग की तलाश में है जो दलित-पिछड़े, बहुसंख्यक या अल्पसंख्यक सब में मौजूद हो। किसान ऐसा ही वर्ग है जिसके कंधे पर सवार हो वह यूपी, पंजाब और उत्तराखंड के चुनाव में अपनी जमीन को मजबूत बनाना चाहती है। किसान आंदोलन से कांग्रेस को पंजाब में तो फायदा मिल सकता है, लेकिन यूपी और उत्तराखंड में इसका कोई खास असर नहीं है।
यही वजह है कि कांग्रेस ने महिलाओं को अपने पक्ष में करने के लिए 40% टिकट का दांव खेला है। पिछले विधानसभा चुनाव में भी प्रियंका गांधी ही यूपी में कांग्रेस का चेहरा थीं लेकिन, तब कांग्रेस ने केवल 11 महिलाओं को टिकट दिया था। जबकि, सपा ने 33 और बसपा ने 19 महिलाओं को चुनाव में खड़ा किया था। बीजेपी ने 43 महिलाओं को टिकट दिया था। यूपी में 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद कुल 38 महिलाएं एमएलए बनीं जिनमें से 32 बीजेपी से थीं।
इन 10% वोटों पर है कांग्रेस की नजर
यूपी में 14 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं जिनमें लगभग 6.5 करोड़ महिला वोटर हैं। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 6.25%, बसपा को 22.23% और सपा को 21.82% वोट मिले थे, जबकि बीजेपी 39.67% वोट पाकर सरकार बनाने में सफल हुई थी। यानी, यूपी का 90% वोटर इन चार पार्टियों के बीच बंटा हुआ है। महिलाओं को टिकट देने से अगर कांग्रेस के वोट बैंक में 10 फीसदी की भी बढ़त होती है, तो इससे बीजेपी को पूर्ण बहुमत पाने से रोका जा सकता है।
कांग्रेस का लक्ष्य बीजेपी के 2017 के प्रदर्शन को दोहराने से रोकना है। यूपी विधानसभा 2022 के चुनाव परिणाम, 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों का लिटमस टेस्ट होंगे। लखीमपुर खीरी में प्रियंका की उपस्थिति और महिलाओं को 40% टिकट देने से अगर कांग्रेस को फायदा होता है, तो इससे एक बार फिर पार्टी पर गांधी परिवार का बर्चस्व स्थापित हो जाएगा।