पंजाब कांग्रेस में सियासती तलवार की धार तेज होती जा रही है। हाल ही में पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के अल्टीमेटम से नेताओं में खलवली मच गई है। सिद्धू खेमें के सलाहकार का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद फिर पंजाब की सियायत में सिरदर्द देखने को मिला है। शनिवार को कांग्रेस प्रभारी हरीश रावत राहुल गांधी से मुलाकात करने के लिए उनके घर पहुंचे। जानकारी के मुताबिक ये मुलाकात करीब डेढ़ घंटे तक चली है। बता दें कि पिछले दिन सिद्धू ने पार्टी की आलाकमान के फैसले को लेकर ईंट से ईंट बजाने की चेतावनी दी थी। इसी दौरान सलाहकार मनीष तिवारी ने ट्वीट कर आलाकमान की टेंशन को बढ़ा दिया है। मनीष ने ट्वीट में लिखा कि “हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम, वो कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती”। इस ट्वीट से स्पष्ट समझ आ रहा है कि कांग्रेस में उठा-पटक जारी है, इसका मूल कारण सत्ता हथियाना है। राहुल गांधी और हरीश रावत के बीच मुलाकात के बाद उनके चेहरे पर मुस्कान झलक रही थी। सवाल है कि इस मुलाकात में रावत को कौन सा मंत्र दिया गया है। हरीश रावत ने कहा कि सबका शासन नियंत्रण करने का अंदाज अलग-अलग होता है। वहीं कहा कि पंजाब में कांग्रेस के नेता एकजुट है, साथ ही सोनिया गांधी के सामने पूरी समस्या रखने के बाद अग्रिम चुनावी सफर के लिए सभी को प्रेरणा दी गई। सवाल यह है कि क्या पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धू की सरगर्मी यही तक सीमित थी, या आगे कोई बड़ा प्लान कर सकते है। फिलहाल अगले साल होने वाले चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस में शांति की आधार शिला रखी जा रही है, यानि सभी को समझा बुझाकर जनता को आकर्षित करने की नीति पर फोकस करने की सहमति दी जा रही है।