
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के क्षेत्रीय मंत्री गोविंद शेंडे ने औरंगजेब की कब्र(Aurangzeb's Tomb) को गुलामी का प्रतीक बताते हुए इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि औरंगजेब ने छत्रपति संभाजी महाराज को शहीद करने से पहले उन्हें 40 दिन तक यातनाएं दी थीं, और ऐसे तानाशाह का निशान भारत में क्यों रहना चाहिए। शेंडे ने 17 मार्च को शिवाजी महाराज की जयंती के मौके पर छत्रपति संभाजीनगर में प्रदर्शन करने का ऐलान किया। इसी बीच, तेलंगाना के भाजपा विधायक टी राजा सिंह ने भी कब्र हटाने की मांग का समर्थन किया और कहा कि सरकार को उस पर खर्च हो रहे करदाताओं के पैसे को रोकना चाहिए। उन्होंने औरंगजेब की कब्र को भारतीय संस्कृति के लिए अपमानजनक बताया और कहा कि यह तानाशाह हिंदू राजाओं की हत्या और मंदिरों को नष्ट करने के लिए कुख्यात था।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कब्र हटाने से कोई समाधान नहीं मिलेगा। विधायक विजय वडेट्टीवार ने बजरंग दल और VHP पर आरोप लगाया कि वे महाराष्ट्र में शांति भंग करना चाहते हैं और राज्य के विकास को बाधित कर रहे हैं। वहीं, औरंगजेब की कब्र (Aurangzeb's Tomb)के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस ने इलाके में बैरिकेड्स लगाए हैं और मुख्य द्वार को बंद कर दिया है, जिससे किसी को भी कब्र के पास जाने की अनुमति नहीं है।
यह कब्र 1707 में औरंगजेब की मृत्यु के बाद उनकी इच्छा के अनुसार खुल्दाबाद में उनके आध्यात्मिक गुरु शेख जैनुद्दीन की दरगाह के पास बनाई गई थी। यह स्थान ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और आज भी लोग यहां श्रद्धांजलि अर्पित करने आते हैं।
यह विवाद अब राज्य के सामाजिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में एक नई बहस को जन्म दे रहा है, और इस पर जल्द ही कोई अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।Aurangzeb's Tomb: