कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के संवेदनशील वन क्षेत्रों में रील और वीडियो बनाने वाले पांच सोशल मीडिया यूजर्स की पहचान हुई है। प्रशासन नोटिस जारी करने की तैयारी में है। वन्यजीव सुरक्षा को देखते हुए सोशल मीडिया निगरानी के साथ GPS और ड्रोन सर्विलांस भी बढ़ाया जाएगा।

National News : सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली रील और वीडियो बनाने का चलन अब देश के संवेदनशील वन क्षेत्रों तक पहुंच गया है। उत्तराखंड के कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में कुछ सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा ऐसे इलाकों में वीडियो और रील बनाए जाने का मामला सामने आया है, जिन्हें वन्यजीवों और पर्यटकों की सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। मामला सामने आने के बाद रिजर्व प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है और सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए कंटेंट की भी जांच की जा रही है। National News
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन ने ऐसे पांच सोशल मीडिया यूजर्स की पहचान की है, जिन्होंने कथित तौर पर ढिकुली, गर्जिया, धनगढ़ी और मोहान के आसपास संवेदनशील वन क्षेत्रों में वीडियो या रील बनाई हैं। अधिकारियों के अनुसार इन लोगों को नोटिस जारी किए जाएंगे। इसके अलावा ऐसे अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है, जिन्होंने इसी तरह का कंटेंट बनाया है। National News
अधिकारियों के मुताबिक सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और रील अब निगरानी का हिस्सा बन गए हैं। संवेदनशील इलाकों में बनाए गए कंटेंट को देखकर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि किसने नियमों की अनदेखी की और किस क्षेत्र में शूटिंग की गई। वन अधिकारियों का कहना है कि ये सिर्फ जंगल के सामान्य हिस्से नहीं हैं, बल्कि कई जगह वन्यजीव कॉरिडोर भी हैं। ऐसे स्थानों पर रुकना, वीडियो बनाना या वन्यजीवों के बहुत करीब जाना इंसानों और जानवरों दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। कॉर्बेट से जुड़े इलाकों में खूबसूरत प्राकृतिक दृश्य सोशल मीडिया कंटेंट बनाने वालों को आकर्षित करते हैं। खासकर रानीखेत रोड के आसपास युवा और पर्यटक वीडियो बनाने के लिए रुकते हैं। प्रशासन का कहना है कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक रुकने और शूटिंग से वन्यजीवों के व्यवहार में भी खलल पड़ सकता है। National News
रिजर्व प्रशासन इस ऑपरेशनल सीजन से निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी में है। पंजीकृत सफारी जिप्सियों में GPS ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए रूट, गति और वाहनों की संख्या पर नजर रखने की व्यवस्था की जाएगी। इसके साथ ही रिजर्व की सीमा और वन्यजीव क्षेत्र की निगरानी के लिए विशेष ड्रोन स्क्वॉड भी तैनात किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसका उद्देश्य मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावित स्थितियों पर वास्तविक समय में नजर रखना भी है। National News
कॉर्बेट के दोबारा खुलने से पहले प्रशासन ने कंटेंट क्रिएटर्स और मीडिया से जुड़े लोगों के लिए कार्यशाला भी आयोजित की। इसमें मानव-वन्यजीव मुठभेड़ और वन्यजीवों से जुड़ी घटनाओं को जिम्मेदारी के साथ ऑनलाइन प्रस्तुत करने के तरीकों पर चर्चा की गई। प्रशासन के अनुसार अगले महीने नेचर गाइड्स के लिए भी Wildlife Institute of India के विशेषज्ञों की ओर से एक अलग कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। National News
कॉर्बेट के निदेशक साकेत बडोला के मुताबिक फिलहाल पांच सोशल मीडिया यूजर्स की पहचान की जा चुकी है। उनकी टीम ऐसे अन्य लोगों का भी पता लगा रही है, जिन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में इसी तरह की गतिविधियां की हैं। ऐसे मामलों में परिस्थितियों के आधार पर वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई का प्रावधान भी लागू हो सकता है। National News
कॉर्बेट जैसे वन क्षेत्र में सोशल मीडिया कंटेंट बनाना केवल वायरल होने तक सीमित मामला नहीं है। यहां वन्यजीवों की मौजूदगी के कारण किसी भी असावधानी से इंसान और जानवर दोनों खतरे में पड़ सकते हैं। यही वजह है कि प्रशासन अब सोशल मीडिया कंटेंट, GPS और ड्रोन निगरानी को अपनी सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ रहा है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की ओर से जारी आधिकारिक सूचनाओं में भी पर्यटकों को लागू नियमों और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। National News
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